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पहली बारिश में

सोमवार, 22 अप्रैल 2013



मौसम की पहली बारिश में जब
जमीन की देह भाप बनकर
उड़ती है
खुशबू से तर हो जाती है हवा
धुआंसा आकाश
खिड़की पे बेचैन उतर आता है

दस्तक देते हैं झकोरे
हल्की टकोर जिस्म को
नदी बना देती है
रसमसाती है इक आदिम चाहना
रगो-रेश में
बेहया इरादे जगते हैं
देर तक

मेंहदियां गंध में
भींगता है आंगन
उतरकर लहू में
घुलती है शाम
शराब बन जाती है
महुआ सी फूलती है
वर्जित इच्छाएं

अंखुआती है देह पर कोंपलें
अनवरत
पाप के
फरेब के इस मौसम में
मुझे तुम,
बस तुम याद आते हो !
0000
कवियत्रीजयश्री राय
        
जयश्री राय हिन्दी की चर्चित कहानीकार हैं।गोवा युनिवर्सिटी से हिन्दी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएशन।हिन्दी की लगभग सभी प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में कहानियां,कविताएं प्रकाशित। औरत जो नदी है(उपन्यास), तुम्हें छू लूं जरा, अनकही(कहानी संग्रह), तुम्हारे लिये(कविता संग्रह), साथ चलते हुए  नवीनतम उपन्यास प्रकाशितकुछ समय तक अध्यापन कार्य।सम्प्रति स्वतन्त्र लेखन।
ई-मेल—jaishreeroy@ymail.com



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घर में बनाएं माहौल कुछ पढ़ने और पढ़ाने का------

शनिवार, 9 मार्च 2013


      स्कूलों में जाकर अक्सर अभिभावक यह शिकायत करते हैं कि उनके बच्चे का मन पढ़ाई में लगता ही नहीं है। या कि मास्साब आप कैसे पढ़ाते हैं कि इसे कुछ याद ही नहीं रहता।कभी कभी यह भी शिकायत करते हैं कि आप इसे होमवर्क नहीं देते इसीलिये यह घर पर कुछ पढ़ता ही नहीं। कुछ अभिभावकों को मैंने यह भी कहते हुये सुना है कि अरे फ़लां स्कूल---अब तो बेकार हो चुका हैकभी होती थी वहां भी अच्छी पढ़ाई--- अब तो बस उस स्कूल का नाम भर रह गया है।
       यानी कि बच्चा घर में पढ़े न,उसका मन पढ़ने में न लगे,वह हमेशा टी0वी0 से चिपका रहे,खेलता रहे -----इन सब की जिम्मेदारी स्कूल की और मास्साब की। अभिभावक ने ले जाकर स्कूल में नाम लिखा दिया और उनकी जिम्मेदारी खत्म।अब बच्चे के पढ़ने,विकसित होने,अच्छे नंबर लाने सबका दारोमदार मास्टर जी के ऊपर।
          यहां सवाल यह उठता है कि क्या बच्चों के पढ़ाने,लिखाने की अभिभावक या मां बाप की कोई जिम्मेदारी नहीं है?क्या उनकी जिम्मेदारी बस बच्चे को स्कूल तक पहुंचाने की है?जबकि बच्चा स्कूल में 24घण्टों में से सिर्फ़ 5-6 घण्टे रहता है। बाकी के 18घण्टे वो आपके साथ बिताता है। स्कूल तो एक जगह भर है जहां उसे शिक्षा का एक रास्ता बताया जाता है। सीखने सिखाने की एक प्रक्रिया से परिचित करा कर ज्ञान के एक अथाह समुद्र की तरफ़ बढ़ाया जाता है। ज्ञान के इस समुद्र में बच्चे को तैरना सिखाया जाता है। अब इस अथाह समुद्र के नये तैराक को एक कुशल,बेहतरीन तैराक बनाने में शिक्षकों के साथ अभिभावकों की भी बहुत बड़ी भूमिका होती है। जब तक वो अपनी भी जिम्मेदारियां नहीं निभायेंगे बच्चा ज्ञान के सागर का एक कुशल तैराक नहीं बन पायेगा।पढ़ने लिखने में आगे नहीं बढ़ सकेगा।
 क्या जिम्मेदारियां हैं एक अच्छे अभिभावक की----- ?
                                            बच्चे को पढ़ने लिखने के लिये सबसे जरूरी चीज है अच्छे और खुशनुमा माहौल की। स्कूल में भी और घर पर भी। खुशनुमा माहौल का मतलब है ऐसा माहौल जिसमें बच्चा सहज ढंग से शान्तिपूर्ण वातावरण में पढ़ लिख सके। उसके ऊपर किसी तरह का मानसिक दबाव न हो। वह संकुचित या भयभीत न रहे। वह अपने मन में उठने वाले प्रश्नों को आपसे बिना किसी संकोच के पूछ सके। माना कि ऐसा वातावरण उसे स्कूल में अध्यापकों की कृपा और सहयोग से मिल जाता है। लेकिन क्या हम उसे घर पर ऐसा माहौल दे पा रहे हैं? अगर दे रहे हैं तो बहुत अच्छा है। यदि नहीं तो क्यों? और साथ ही हमें यह भी विचार करना पड़ेगा कि हम अपने घर का कैसा माहौल बनायें जिसमें बच्चा अच्छे ढंग से पढ़ लिख सके। यहां मैं कुछ ऐसे ही महत्वपूर्ण बिन्दुओं की ओर इंगित करूंगा जिन पर ध्यान देकर आप घर का वातावरण बच्चों की पढ़ाई के अनुकूल बना सकते हैं।
*शान्तिपूर्ण माहौल
 बच्चों को पढ़ने के लिये सबसे जरूरी शन्तिपूर्ण माहौल होता है। बच्चों की पढ़ाई के  समय उनके पढ़ने की जगह पर तेज आवाज में बातचीत न करें। टी0वी0,रेडियो धीमी आवाज में बजायें। यदि उनके पढ़ने के समय में घर में कोई मेहमान आ जाता है तो कोशिश करें कि बच्चे की पढ़ाई डिस्टर्ब न हो। मेहमानों को आप दूसरे कमरे में बैठा कर उनका स्वागत कर सकते हैं।
*समय का निर्धारण---
  स्कूल के अलावा बच्चे 18घण्टों का जो समय आपके साथ बिताते हैं उनका सही उपयोग करना बच्चों को आप ही सिखला सकते हैं। इसके लिये यह जरूरी है कि आप अपने बच्चे के लिये एक संक्षिप्त टाइम टेबिल बनायें। जिसमें उसके सुबह उठने,स्कूल जाने,खेलने कूदने,मनोरंजन ,पढ़ाई और सोने का समय निर्धारित हो। यह जरूरी नहीं कि आपका बच्चा एकदम उसी समय सारिणी पर चले। जरूरत पड़ने पर उसमें आप या बच्चा फ़ेर बदल भी कर सकते हैं। लेकिन इससे उसके अंदर काम को समय पर और सही ढंग से करने की आदत पड़ेगी।
*टी0वी0,कम्प्युटर का समय निश्चित करें---
 आजकल बच्चों का ध्यान सबसे ज्यादा टी0वी0,वीडियो गेम्स और कम्प्युटर में लगता है। आप इससे उन्हें पूरी तरह रोक नहीं सकते।क्योंकि आज तो इलेक्ट्रानिक माध्यमों का ही युग है। इनके बिना वह बहुत सारे ज्ञान और सूचनाओं से वंचित रह जाएगा। लेकिन इस पर बहुत ज्यादा समय देना भी स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित नहीं है। इसलिये अपने बच्चों को इन माध्यमों के फ़ायदों और हानियों से परिचित करा दें।
तथा इनके उपयोग का समय भी तय कर दें। जिससे वह अपना समय अन्य गतिविधियों को भी दे सके।
*खुद भी पढ़ें---
   बच्चों को पढ़ाई के लिये उचित माहौल देने के लिये यह बहुत जरूरी बिन्दु है। क्योंकि बच्चे बहुत सी बातें अनुकरण से भी सीखते हैं। आप को कोशिश यह करनी चाहिये कि आप बच्चों के पढ़ने के समय में खुद भी अपनी रुचि की कोई पुस्तक,पत्रिका या अखबार पढ़ें। आपको पढ़ता देखकर बच्चे के अंदर भी पढ़ाई के प्रति रुचि जागृत होगी। उसे यह महसूस होगा कि मेरे पिता या मां भी मेरे साथ पढ़ रहे हैं।
*कुछ बाल पत्रिकाएं और रोचक बाल साहित्य बच्चों को दें----
       हर भाषा में आजकल हर उम्र के बच्चों के लिये बहुत सी पत्रिकाएं बाजार में उपलब्ध हैं। आप अपने बच्चे की आयु के अनुरूप कुछ बाल पत्रिकाएं घर में लायें। उनसे बच्चों का मनोरंजन तो होगा ही,उनके ज्ञान में बढ़ोत्तरी भी होगी। क्योंकि इन पत्रिकाओं में सिर्फ़ कहानी,कविता ही नहीं बल्कि बच्चों के लिये ढेरों सामग्री रहती है। जैसे चित्रों में रंग भरने,वर्ग पहेली,च्त्र देखकर कहानी लिखने,वाक्य पूरा करने,आदि के अभ्यास इनसे बच्चे की बुद्धि तीव्र होने के साथ उसका मनोरंजन भी होगा। और पत्रिकाओं में सामग्री की विविधता के कारण उसकी पढ़ने में रुचि भी  जागृत होगी।
          यहां कुछ अभिभावक यह प्रश्न उठा सकते हैं कि बच्चों के ऊपर वैसे ही बस्ते का इतना बड़ा बोझ है। उसमें ये पत्रिकायें या बाल साहित्य---?उनके प्रश्न का सीधा सा जवाब यह है कि जैसे आप आफ़िस में अपने काम से ऊबने लगते हैं तो क्या करते हैं?दोस्तों से गप शप,टहलना घूमना।फ़िर तरोताजा होकर अपना काम शुरू कर देते हैं। ठीक वैसे ही बच्चों की ये पत्रिकाएं या बाल साहित्य,बच्चों के लिये थोड़े समय का मनोरंजन का काम करेगा। यानि कि वो कुछ समय के लिये कोर्स की किताबों से हट कर ज्ञान के ऐसे संसार में जायेंगे जहां उन्हें ज्ञान और मनोरंजन दोनों मिलेगा।जहां उनकी कल्पनाओं के भी पंख लगेंगे। उन्हें आनन्द की अनुभूति होगी।
*बच्चों को घर पर ही कभी कभी रोचक शैक्षिक फ़िल्में दिखाएं---
   आज तो पढ़ाई में भी इलेक्ट्रानिक माध्यमों का वर्चस्व होता जा रहा है। पत्रिकाओं की ही तरह बाजर में हर कक्षा,हर विषय की पाठ्यक्रम आधारित या पूरक कार्यक्रमों की सी0डी0 उपलब्ध हैं। यद्यपि इनकी संख्या अभी उतनी नहीं है जितनी होनी चाहिये। आज हर घर में टी0वी0 और सी0डी0प्लेयर भी मौजूद हैं। आप बच्चों के लिये उनकी कक्षा के अनुरूप शैक्षिक फ़िल्मों या इण्टरैक्टिव(ऐसे कार्यक्रम जिसमें बच्चे के लिये भी काफ़ी कुछ करने की गुंजाइश रहती है।) कार्यक्रमों की सी0डी0लाकर बच्चों को दिखायें। इनसे भी बच्चों  के अंदर पढ़ने की रुचि पैदा होगी।
         ये कुछ ऐसी छोटी छोटी बातें हैं जिन पर ध्यान देकर इन्हें अपनाकर आप अपने घर का माहौल बच्चों की पढ़ाई लिखाई के अनुरूप बना सकते हैं बच्चों के अंदर पढ़ने लिखने की रुचि जगा सकते हैं। उन्हें यह महसूस करा सकते हैं कि उनके पढ़ने की जगह सिर्फ़ स्कूल में ही नहीं बल्कि घर पर भी है।
                                 

डा0हेमन्त कुमार

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मंगलवार, 20 नवंबर 2012


कीमत

पुरस्कार
सम्मान
मरणोपरान्त……परमवीर चक्र
और अब मुआवजा……शोक संवेदना पत्र,
ये पांच शब्द ईजाद किये हैं
हमारी संसद ने
पिछले पैंसठ सालों में
भूख से कुलबुलाती  अंतड़ियों का
पेट भरने के लिये।

फ़िक्स कर दिया है रेट
हमारी संसद ने
देश की जनता के
हर काम हर कुर्बानी
उनके साथ घटने वाली
घटनाओं,दुर्घटनाओं और
हादसों का।

लिखने पर किसी खद्दरधारी की
यशोगाथा
मिलेगा सम्मान या
पुरस्कार अंगवस्त्रम
पत्रं पुष्पं और रूपये इक्यावन हज़ार
कारगिल में शहादत पर
मिलेगा मरणोपरान्त चक्र
और छोड़ दिया जायेगा परिवार
राम भरोसे/सड़क पर भटकने को।

मरने पर किसी दुर्घटना/बिल्डिंग कोलैप्स
या किसी मेले की भगदड़ में
परिवार को मिलेंगे रुपये
दो,एक लाख या फ़िर पचास हजार।

अगर गलती से भी मौत
हो जाती है किसी युवक की
नौकरी खोजने के दौरान
किसी सेप्टिक टैंक में गिरने
या धूप में बेहोश होने से
(कहने कोअसली वजह है भूख)
तो मृतक के परिवार को मिलेंगे
रूपये पच्चीस हजार
नगर प्रशासन से,
और पचास हजार
प्रधानमंत्री सहायता कोष से।

इन सब से भी अलग
अगर आप मर जाते हैं
किसी थू थू/धिक्कार
या शक्ति प्रदर्शन रैली के दौरान
प्लेटफ़ार्म पर मची भगदड़ में
ट्रक पलटने अथवा
मंच ढहने पर उसके नीचे दबकर
तो
इत्मिनान रखिये आप
आपके शवदाह का खर्च भी
परिवार वालों को नहीं उठाना होगा
आपका शव
बहा दिया जाएगा किसी नदी में
या दफ़ना दिया जाएगा कब्रिस्तान में
क्योंकि आपके शव की शिनाख्त ही
नहीं हो सकी थी
फ़िर कुछ दिनों के बाद
आपके परिवार को मिलेगा
रैली की आयोजक पार्टी
की ओर से
सिर्फ़ एक शोक संवेदना पत्र।

अब ये
तय करना है आपको
कि आपको कौन सी मौत चाहिये
हमारी संसद तो
हर तरह से तैयार है।
0000
हेमन्त कुमार


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बैग में क्या है---?

शुक्रवार, 10 अगस्त 2012

    (हिन्दी में बच्चों को लेकर कविताएं बहुत ज्यादा नहीं हैं।बहुत कम रचनाकार बच्चों को अपना विषय बनाते हैं या फ़िर उनके अन्तर्मन में झांकने की कोशिश करते हैं। जबकि आज बच्चों की हालातों के बारे में हम सभी को सोचना लिखना चाहिये। आज मैं शैलजा पाठक की एक ऐसी ही कविता प्रकाशित कर रहा हूं।       
      मुंबई---महानगरकक्षा सात में पढ़ने वाली एक मासूम लड़की की आत्महत्या की खबर किसी भी संवेदनशील मन व्यक्ति को विचलित और उद्वेलित कर देगी।इस घटना ने शैलजा पाठक के अन्तर्मन को कितना अधिक व्यथित किया था ये बात हम उनकी इस कविता में देख सकते हैं--- )


बैग में क्या है?
बिस्कुट है पानी है
परियां हैं कहानी है
(बच्चे इतना ही जानते हैं चाहते हैं)
लेकिन बैग में इनके
बिखरा सा भारत है
नदियां हैं झरने हैं
नेता के धरने हैं
बैग में मेरे
मम्मी के सपने हैं
टीचर का गुस्सा है
नम्बर हैं अक्षर हैं
पीठ पर भार सा
बिजली के तार सा
सहमा हुआ चिपका हूं
बैग के अंदर तो
आगे की सोच है
छूने से डरता हूं
हमको भी कहने दो
अपनी सी करने दो
मैं तुम्हारी जिन्दगी हूं
पर मेरी भी जिन्दगी है
जी नहीं पाऊंगा जो तुम यूं करोगे
कब कहूं कि बोझ है ये
थक गया हूं
कब कहूं कि चाहता कुछ और हूं मैं
मैं बता सकता हूं अपने मन की तुमसे
तुम जरा सा वक्त दो मुझको सुनो तुम
रोपते क्यों हो
नहीं है जिंदगी जिसमें हमारी
थोपते क्यों हो ये मुझ पर
जो नहीं बनना है मुझको
चाहते हो क्यों वही
जो दे नहीं सकता हूं तुमको
नन्हीं सी आंखों में
भविष्य का बोझ मत थोपो
अंकुर हूं पनपने से पहले
मौत की गोद में मत सौंपो------।
0000

शैलजा पाठक

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48 घण्टों का सफ़र-----

शनिवार, 4 अगस्त 2012


(काफ़ी पहले लिखी गयी कविता,जब मैं किसी सरकारी यात्रा पर था और पहली बार अपनी एक साल की बेटी से दो दिन अलग रहा था।)
नहीं आ रही कोई दस्तक
बाथरूम के दरवाजे पर
न बर्तनों की उठा पटक का शोर
न नन्हें कदमों के भागने की ध्वनि
न भू-भू की आवाजें।
सब कुछ शान्त होकर
सिमट गया है
मेरे व्यवस्थित सुसज्जित
अभेद्य सन्नाटे का कवच पहने हुये
कमरे के कोने में
पड़ी हुई गेंद के भीतर
पिछले 48 घण्टों से।
गली में गुब्बारे वाला
आवाज लगा कर
वापस लौट गया
सामने बालकनी में
छोटा पामेरियन उदास बैठा है
थम गयी है चीं चीं की आवाजें
बाहर टेरेस पर।
नहीं हुआ कोई प्रयास
आल्मारी में करीने से सजी
किताबों को फ़ाड़ने का
पिछले 48 घण्टों से।
ऐसा महसूस हो रहा है
अचानक होगा अभी कोई धमाका
फ़ूट जाएगी गेंद
टूट जाएगा सन्नाटे का
अभेद्य कव
कमरा हो जाएगा
फ़िर पहले की तरह गुंजायमान।
अचानक दो नन्हें कोमल हाथ
खींचेंगे मेरे बाल
और सुनाई पड़ेगी
एक मीठी कोमल आवाज
पापा सू सू आई----।
000
हेमन्त कुमार 

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मां का दूध अमृत समान

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012


अपने बच्चे को स्तनपान कराने में मां एवं बच्चे दोनों को जिस सुख का अनुभव होता है उसे शब्दों में नहीं व्यक्त किया जा सकता है। उस अलौकिक सुख को या तो स्तनपान कराने वाली मां समझ सकती है या फ़िर वह अबोध शिशु। इस सुख से भी बढ़कर शिशु के विकास में भी स्तनपान की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।उसके शरीर की वृद्धि,पोषण और मानसिक विकास भी इससे प्रभावित होता है। इसका कारण यह भी है कि दुनिया में आने के बाद शिशु को सबसे पहला आहार मां के दूध के रूप में मिलता है। यह आहार प्रकृति द्वारा शिशु को दिया गया एक ऐसा सम्पूर्ण आहार है जो कि उसे इस दुनिया में रहने,विकसित होने और बाहर के जीवाणुओं,बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है।
             चूंकि पैदा होते ही शिशु को पहला चेहरा मां का ही दिखता है,सबसे पहले वह मां से ही परिचित होता है शायद इसी लिये प्रकृति ने स्वाभाविक रूप से मां के शरीर के माध्यम से ही उसे यह आहार देने की व्यवस्था भी कर दी है।
           लेकिन दुख की बात यह है कि स्तनपान के विषय में युवा माताओं एवम पिताओं को बहुत कम जानकारियां हैं। इसी लिये हम यहां स्तनपान से संबन्धित कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं जिन्हें हर मां,पिता के साथ ही उन नव विवाहितों को भी जानना चाहिये जिन्हें भविष्य में मां,पिता बनना है।
(1)      जन्म के तुरंत बाद स्तनपान बहुत जरूरी:
                                            बच्चा पैदा होने के बाद शुरू के दो
 तीन दिनों में मां के स्तन से निकला हुआ दूध (खीस या कोलेस्ट्रम) बच्चों के लिये अमृत की तरह होता है। यही खीस ही बच्चों के शरीर को जीवन भर रोगों से लड़ने की ताकत देने के साथ उसके सम्पूर्ण विकास में भी सहायक बनता है। खीस दो तीन दिनों के बाद सामान्य दूध में बदल जाता है। यदि बच्चा शुरू में ही इसे नहीं पी पाता तो जीवन भर इस अमृत से वंचित रहेगा। इसी लिये बच्चे के पैदा होने के आधे घण्टे बाद से यह खीस पिलाना शुरू कर देना चाहिये। यदि बच्चा स्तन को मुंह में नहीं लगा रहा है(कुछ बच्चे शुरू में ऐसा करते हैं) तो किसी व्यक्ति  को चाहिये कि वह इस खीस को साफ़ चम्मच में निकाल कर बच्चे को पिलाये।इसी खीस को लेकर ही शायद छ्ठी का दूध याद दिलाने का मुहावरा भी बनाया गया है।बहुत से परिवारों में यह भी कहा जाता है कि खीस गन्दा दूध होता है इसे शिशु को नहीं पिलाना चाहिये। लेकिन यह बात तमाम शोधों से साबित हो चुकी है कि खीस पीने वाले बच्चों में आगे चलकर रोग रोधी शक्ति अधिक रहती है।
(2)      स्तनपान के फ़ायदे:
                 पैदाइश के बाद पहले चारसे छ महीनों तक बच्चे का पेट मां के दूध से ही भर जाता है।उसे इसके अलावा किसी दूसरे ऊपरी आहार की जरूरत नहीं रहती। स्तनपान के कुछ और भी फ़ायदे हैं जिन्हें हर मां को जानना चाहिये----0बच्चे को जरूरत के अनुसार शुद्ध और गरम दूध मिलता है। इस दूध से उसे दस्त नहीं आता।0मां का दूध आसानी से पच जाता है,इसीलिये इससे बच्चे के पेट में गैस नहीं बनती।0सबसे बड़ी बात यह है कि मां का दूध बच्चे की रोग रोधी ताकत (रेजिस्टेंस) को बढ़ाता है।0स्तनपान से मां और उसके शिशु को जो सुख मिलता है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता।इससे बच्चे के अन्दर सुरक्षा,प्यार और खुद को विशिष्ट मानने की भावना बढ़ती है।0स्तनपान से सबसे महत्वपूर्ण और अन्तिम फ़ायदा यह है कि बच्चे को स्तनपान कराने के दौरान मां को दुबारा गर्भ धारण करने की संभावना कम रहती है।(इसका यह मतलब कदापि नहीं कि आप परिवार नियोजन के उपायों को अपनाना छोड़ दें।)
   (3)स्तनपान कैसे करायें: आज भी बहुत सी माताओं को स्तनपान कराने का सही  तरीका नहीं मालूम है। हम स्तनपान कराने के  सही तरीके को यहां बता रहे हैं----
   0 शिशु को स्तनपान कराने के पहले हाथ एवं स्तन दोनों को अच्छी तरह धो लें।अन्यथा हाथ  या स्तनों पर मौजूद मैल दूध के साथ बच्चे के शरीर में भी जायेगी,जो उसके स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होगी।
0 बच्चे को स्तनपान हमेशा बैठ कर करायें। नहीं तो दूध बच्चे के कान या श्वास नली में जाकर उसे नुक्सान पहुंचा सकता है। पहले आप खुद व्यवस्थित ढंग से बैठ जायें। फ़िर बच्चे का सर अपनी बांह पर इस तरह रखें कि उसका सर स्तन से ऊंचा रहे। इससे उसके कान में दूध नहीं जायेगा।यदि आप दूध लेटकर ही पिलाना चाहें तो ध्यान रखें बच्चे की नाक कहीं से न दबे।
0 बच्चे को भूख के हिसाब से ही दूध पिलायें। एक बार 10-15 मिनट दूध पीकर बच्चा दो-तीन घण्टे तक भूख नहीं महसूस करेगा। दुबारा जब बच्चा चाहे तभी उसे स्तनपान करायें।
0 दूध पिलाकर बच्चे को अपने कंधे पर लिटा कर उसकी पीठ पर दो-तीन हल्की थपकियां दें ताकि बच्चा डकार ले। इससे बच्चा दूध उल्टेगा नहीं। अक्सर दूध पीने के बाद डकार न कराने पर शिशु डकार आने पर उसके साथ दूध भी बाहर उलट देते हैं। डकार करा देने से ऐसा नहीं होगा।यदि वह स्तनपान करते करते सो जाय तो उसे सोने दें।
0 यदि आपके स्तन में बच्चे की जरुरत से ज्यादा दूध आये तो उसे निकाल दें। नहीं तो स्तनों में कड़ापन और सूजन आ जायेगी। इससे आपको बच्चे को दूध पिलाने में परेशानी होगी।
0पहले 2-3 महीनों में बच्चा रात में भी मां को स्तनपान के लिये जगायेगा। रात में भी बच्चे को स्तनपान कराना नुक्सान दायक नहीं होता। दूध पीकर वह फ़िर सो जायेगा। कुछ महीनों बाद बच्चा जब रात में ठीक से सोने लगेगा तो धीरे धीरे रात में उसकी स्तनपान करने की आदत  खुद ही बन्द हो जायेगी।
             स्तनपान से सम्बन्धित ये कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें समझ और अपनाकर
   आप शिशु और अपना दोनों का ही जीवन संवार सकेंगी।
                
                  जन्म से छः सालों तक दो,बच्चे को प्यार सुरक्षा।
           बिन बाधा बढ़ता जायेगा ,बनेगा वो फ़िर बच्चा अच्छा॥
                           0000000
डा0हेमन्त कुमार

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पिता (दस क्षणिकाएं)

शनिवार, 16 जून 2012


आज पितृ दिवस पर मैं अपनी इन क्षणिकाओं के साथ अपनी बेटियों द्वारा बनाया गया यह चित्र पोस्ट कर रहा हूं।
(एक)
पिता
विशाल बाहुओं का छत्र
वट वृक्ष
हम पौधे
फ़लते फ़ूलते
वट वृक्ष की
छाया में।
000
(दो)
पिता
अनन्त असीमित आकाश
हम सब
उड़ते नन्हें पाखी।
000
(तीन)
हम
लड़खड़ाते
जब जब भी
सम्हालते पिता
आगे बढ़ कर
बांह पसारे।
000
(चार)
आंसू
बहते गालों पर
ढाढ़स देता
पिता के खुरदरे
हाथों का स्पर्श।
000
(पांच)
पिता
बन जाते उड़नखटोला
हम करते हैं सैर
दुनिया भर की।
000
(छः)
हमारी ट्रेन
खिसकती प्लेटफ़ार्म से
पिता
पोंछ लेते आंसू
पीछे मुड़कर।
000
(सात)
पिता
बन जाते हिमालय
कोई आक्रमण
होने से पहले
हम पर।
000
(आठ)
जब भी
आया तूफ़ान कोई
हमारे जीवन में
पिता बन गये
अजेय अभेद्य
दीवार।
000
(नौ)
पिता
बन गये बांध
समुन्दर को
बढ़ते देख
हमारी ओर।
000
(दस)
पिता
बन गये बिछौना
हमें नंगी जमीन पर
सोते देख कर।
000

डा0हेमन्त कुमार

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कैसे-कैसे बढ़ता बच्चा-----

शनिवार, 9 जून 2012


(आज इतना शिक्षित होने के बाद भी प्रायः बहुत से युवा माता पिता अपने नन्हें बच्चों की देखभाल सही ढंग से नहीं कर पाते।उन्हें यह भी नहीं पता होता कि पैदा होने के बाद से बच्चे की क्या जरूरतें रहेंगी?उनकी देख रेख कैसे की जाय?बच्चे के अंदर हर आने वाले दिन में क्या बदलाव आयेंगे?मैंने अपने इस लेख में पैदाइश से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चों को पालने से सम्बन्धित कुछ खास बिन्दुओं को लिखने कोशिश की है।इससे शायद उन युवाओं को लाभ मिल सकेगा जिन्हें भविष्य में माता पिता बनना है।)

                   नारियों को प्रकृति की अनोखी रचना कहा गया है। अन्य बातों को छोड़ भी दें तो भी इस बात को दुनिया का कोई भी व्यक्ति नहीं नकार सकता है कि केवल नारियों का शरीर ही बच्चा रचने में समर्थ है। दुनिया की हर नारी बहुत ही उत्सुकता से उस दिन का इन्तजार करती है जब उसे मां बनने का सुख मिलेगा।इसीलिये हर नारी के साथ ही पुरुषों को भी बच्चों के पालन पोषण से सम्बन्धित कुछ बातें जरूर जाननी चाहिये।ताकि वे अपने बच्चों का सही विकास कर सकें।
 पहला साल हर बच्चे का,मांगे बहुत सुरक्षा।
प्यार,सफ़ाई,टीका ,भोजन दें हम उसको अच्छा॥
बच्चे के जीवन के पहले साल में की जाने वाली देखभाल ही उसके आगे के जीवन की नींव मजबूत बनाती है।यहां हम आपको कुछ खास गुर बता रहे हैं,जिससे आप पहले साल में अपने बच्चे की सही देख भाल कर सकते हैं।
 पानी:-बच्चे को दूध की तरह पानी भी पिलाना जरूरी है। यह पानी स्वछ होना चाहिये।अच्छा होगा यदि आप पानी उबाल कर ठंढा कर लें।पानी में चीनी या ग्लूकोज भी साफ़ चम्मच से मिलाया जा सकता है।हमेशा बच्चे को स्वच्छ पानी ही पिलायें।
कपड़े:-बच्चे को ढीले,नरम और सूती कपड़े ही पहनायें।बाजार से खरीदे कपड़े धो कर ही पहनायें।मौसम के हिसाब से उसे ऊनी या सूती कपड़े पहनायें। नाइलोन या सेन्थेटिक कपड़ों का इस्तेमाल कम से कम करें।
सफ़ाई:- बच्चे को हमेशा साफ़ सुथरा रखें।उसे शुरू से ही रोज नहाने की आदत डालें।नाखूनों को काटकर छोटा रखें।
स्तनपान:- यह बच्चे के लिये बहुत जरूरी है। खासकर पैदाइश के आधे घण्टे बाद मां के स्तन से निकलने वाली खीस बच्चे को जरूर पिलायें।यह बच्चे में जीवन भर रोगों से लड़ने की ताकत पैदा करता है।स्तनपान करते समय बच्चे को शुद्ध गरम दूध मिलता है। यह आसानी से पचता है और बच्चे की रोग रोधी ताकत को बढ़ाता है।हां,स्तनपान हमेशा सही ढंग से ही कराना चाहिये।
अन्य आहार:- चार पांच माह के बच्चे के लिये मां के दूध के अलावा ऊपरी आहार की जरूरत होती है।इसके लिये उसे:(1) ऊपर का दूध,सब्जी,दाल का जूस,फ़लों का रस आदि तरल पदार्थ दें।(2) उसे कुछ तरल ठोस चीजें जैसे घुटी हुयी दाल,अनाज की लप्सी,पका हुआ केला या उबला आलू(मसलकर) दें।उसे ठोस चीजें जैसे कच्चे फ़ल,चावल का माड़,दाल,सब्जियां या सूजी का हलवा भी दें।धीरे धीरे मां का दूध कम हो जायेगा।स्तनपान छोड़ने के बाद उसे ऊपरी दूध दिन में 5-6 बार दें।उसे रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सोने दें।बच्चे को तीसरे चौथे माह अन्य तरल चीजें देना शुरू करें। पांचवे छ्ठे माह कुछ गीली ठोस चीजें,आठवें नवें माह ठोस,तथा बारहवें माह से साधारण खाना देना शुरू करें।
शारीरिक विकास:-बच्चे के सामान्य शारीरिक विकास की जानकारी उसकी बढ़ती लंबाई और वजन से हो सकती है।
आयु(माह में) -- वजन किलो में लंबाई सेण्टी मी0 मेंलंबाई इंच में
पैदाइश के समय 3------     ------45---------   -----18-------
-------1------  ---4------     ------50---------   -----20-------
------2-------  ----5------    ------55---------   -----22-------
------3-------  ----5.5----    ------60---------   -----24-------
-----4--------  ----6------    ------62---------   -----25-------
-----5--------  ----6.5----    ------65---------   -----26-------
-----6--------  ----7------    ------70---------   -----28-------
-----8--------  ----7.7----    ------75---------   -----30-------
-----10-------  ----8.9----    ------80---------   -----32-------
-----12-------  ----9.2----    ------90---------   -----36-------
जब आपका बच्चा एक से डेढ़ साल के बीच पहुंच जाय,आप उसे दिन में कम से कम 5-6 बार खाना खिलायें। ड़ेढ़ से तीन  साल के बीच पहुंचने पर आप यह ध्यान रखें कि उसका भोजन एक बड़े व्यक्ति का आधा हो।बच्चे के विकास को 5 भागों में बांटा जा सकता है।
शारीरिक,मानसिक,भाषा सम्बन्धी, सामाजिक और रचनात्मक।
सामान्य विकास के कुछ संकेत:-
 आयु (माह में) ----------------क्रियाएं-------------
1 से 2        हंसता,मां को पहचानता है।
3 से 4        अपनी गर्दन संभाल सकता है।
4 से 5        करवट बदलना,खिलौने पकड़ना।
6 से 7        बैठना,खिलौने पकड़ना।
8 से 9        घुटने के बल चलना।
10से12        सहारा लेकर खड़ा होना।चलने की कोशिश।
 एक से तीन साल के बीच
बच्चा चले फ़िरे छुये हर चीज।
एक से तीन साल के बीच बच्चा----
*ज्यादा से ज्यादा जानना चाहता है।
*घर के लोगों को पहचानता है।
*अकेले खेलना पसद करता है।
*शौच करने की समझ आती है।
 हो गया तीन साल का बच्चा
   चौथा साल बनाओ अच्छा।
इस उम्र में बच्चा अपनी पहचान चाहता है।हाथ,आंख का तालमेल बैठाता है।बड़ों की नकल करता है।भाषा,रंग,आकार की समझ बढ़ाता है। नये शब्द सीखता है।
चार साल का हो गया बच्चा
       दिलवाओ इसको अब शिक्षा।\
इस उम्र में बच्चा हर काम खुद करना चाहता है।कहानी सुनता,समझता है।मिलजुल कर खेलना चाहता है।
 पांच-छः साल का बच्चा
लिखता,पढ़ता और समझता।
बच्चा अब संतुलन बना लेता है।लिखने की शुरुआत के साथ कल्पना शक्ति का विकास। नियम से खेलने ,आसान काम करने की क्षमता का विकास होता है।
 किस उम्र में क्या पढ़ सकता----?
 6 माह पर रंग बिरंगे चित्रों वाली किताबें दिखायें।वह चित्र,रंग देखेगा। कागज को छुयेगा।
9 माह पर -- बच्चा चाहेगा कि आप उसे कुछ पढ़ कर सुनायें।सुनकर वह शब्दों को समझने की कोशिश करेगा।
1 साल पर -- किताब के पन्ने पलट सकेगा।उसे छोटी छोटी कहनियां पढ़ कर सुनायें।रंगीन चित्र दिखायें।
2 साल पर -- किताबें पसन्द करेगा। आपके पढ़ने पर खुश होगा।उसे रोज नयी किताबें पढ़ कर सुनाइये। किताबों से उसे खेलने दीजिये।
3 साल पर -- बच्चे की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। वह हर चीज जानने,समझने,छूने की कोशिश करता है।उसे छोटी कहानियां गीत सुनाइये।
4 साल पर -- इस उम्र में आकाश,सूरज ,चांद,जानवर बच्चे को अच्छे लगते हैं।उसे ऐसी किताबें पढ़ कर सुनायें जो उसकी कल्पना को बढ़ायें।अच्छे गीत सुनायें।
5 साल पर -- अब वह गद्य,कहानियां पढ़ने,सुनने के योग्य हो जाता है।उसकी उत्सुकता पढ़ने,सुनने,जानने  के प्रति बढ़ जाती है।उसे रोज कुछ पढ़ कर सुनायें। आपको चाहिये कि बच्चे को कम से कम रोज एक कहानी सुनायें।कहानी सुनाने से उसकी कल्पना शक्ति का विकास होगा साथ ही वह नये शब्दों,भाषा को सीखेगा।
 इस प्रकार आप पांच साल तक अपने बच्चे की पूरी विकास प्रक्रिया को खुद जांच परख सकते हैं।
                                     
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डा0हेमन्त कुमार

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