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बच्चों के अधिकार,देने को सब तैयार

शनिवार, 13 नवंबर 2010

आज 14 नवम्बर यानि बाल दिवस है। हमारे पूरे देश में इस दिन बच्चों के लिये बहुत सारे आयोजन होंगे। बच्चों के विकास की तमाम बातें होंगी। उनके मनोरंजन के लिये मेलों,तमाशों का आयोजन भी होगा। लेकिन क्या हम सभी यह जानते हैं कि बच्चे हमसे यानि समाज से क्या चाहते हैं?या हमारा, आपका,समाज का ,देश का उनके प्रति क्या कर्तव्य है? इन सभी प्रश्नों का उत्तर हमें बाल अधिकारों को पढ़े और जाने बिना नहीं मिल सकता। आज मैं उन्हीं बाल अधिकारों की चर्चा यहां कर रहा हूं।
 बच्चों के अधिकार,देने को सब तैयार

        बच्चों के अधिकारों की बात तो आज सभी करते हैं।लेकिन ये अधिकार कौन कौन से हैं इसकी जानकारी बहुत कम लोगों को है। आइये देखें बच्चों के वो कौन कौन से अधिकार हैं जिन्हें देकर हम बच्चों का जीवन संवार सकते हैं।
       बच्चों के अधिकारों से सम्बन्धित घोषणा पत्र अन्तर्राष्ट्रीय मानव अधिकारों के कानून में सबसे अधिक स्पष्ट व वृहद हैं। इसके 54 अनुच्छेदों में बच्चों को पहली बार आर्थिक,सामाजिक एवम राजनीतिक अधिकार एक साथ दिये गये हैं। यह घोषणा पत्र संयुक्तराष्ट्र महासभा द्वारा 1989 में स्वीकृत होकर नौ माह के भीतर ही लागू हो गया। इतनी शीघ्रता से अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा स्वीकार होने वाला यह पहला घोषणा पत्र था।
         घोषणा पत्र संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 20 नवंबर 1989 को स्वीकार किया गया और 26 जनवरी 1990 को अन्य देशों द्वारा हस्ताक्षर एवं निश्चय के लिये प्रस्तुत किया गया। यह 2 सितंबर 1990 से लागू कर दिया गया। 18 मई 1990 तक कुल 159 देशों ने या तो घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर दिया या उसके समर्थक राज्य बन गये। भारत ने भी इस घोषणा का 11 दिसंबर 1992 को समर्थन कर दिया था।
       इन 54 अनुच्छेदों में बच्चों को 41 विशिष्ट अधिकार दिये गये हैं।
0बच्चे की परिभाषा 0कोई भेदभाव नहीं 0बाल हितों की रक्षा 0अधिकारों को लागू करना 0मां बाप की जिम्मेदारियों का मार्गदर्शन 0जिन्दा रहना व विकसित होना 0नाम और राष्ट्रीयता 0पहचान का संरक्षण 0मां बाप के साथ रहना 0पारिवारिक एकता 0अपहरण से बचाव0बच्चों के विचार 0अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता 0वैचारिक एवं धार्मिक स्वतंत्रता 0मिलने जुलने की स्वतंत्रता 0गोपनीयता की रक्षा 0सूचनाओं के उचित साधन 0मां बाप की जिम्मेदारी 0लापरवाही व दुर्व्यवहार से रक्षा 0अनाथ बच्चों की रक्षा 0बच्चों का गोद लेना 0शरणार्थी बच्चों की देखभाल 0विकलांग बच्चों के लिये उचित व्यवस्था 0स्वास्थ्य सेवायें 0स्थानान्तरित बच्चों की नियमित देखभाल 0सामाजिक सुरक्षा 0अच्छा जीवन स्तर 0शिक्षा की व्यवस्था 0शिक्षा सम्पूर्ण विकास के लिये 0अल्पसंख्यक आदिवासी बच्चों की संस्कृति 0क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक गतिविधियां 0बाल श्रमिकों की सुरक्षा 0नशीले पदार्थों से बचाव 0यौन शोषण से बचाव0बेचने भगाये जाने पर रोक 0अन्य शोषणों से बचाव 0यातना व दासता पर रोक 0सेना में भर्ती पर रोक 0पुनर्वास व देखरेख 0किशोर न्याय का प्रबन्ध 0उच्चतर स्तर लागू।

इन 41 बाल अधिकारों में से 16 अधिकार भारतीय बच्चों के सन्दर्भ में ज्यादा जरूरी हैं। इन्हें हर भारतीय को जानना भी चाहिये। इसी लिये मैं उन्हीं 16 अधिकारों के बारे में विस्तार से लिख रहा हूं।
1-     जिन्दा रहना एवम विकसित होना:हर बच्चे को जिन्दा रहने का मौलिक अधिकार है।इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य पर है। हर राज्य इस के लिये नैतिक रूप से बंधा है। राज्य को हर बच्चे के जीवन और विकास को निश्चित करना चाहिये।
2-     कोई भेद भाव नहीं:बिना भेदभाव के हर अधिकार हर बच्चे के लिये लागू होंगे।यह हर राज्य की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को किसी भी तरह के भेदभाव से बचाये। उनके अधिकारों को बढ़ाने के लिये उचित कदम उठाये।
3-     मां बाप की जिम्मेदारी:बच्चों को आगे बढ़ाने की पहली जिम्मेदारी मां बाप दोनों पर है राज्य इस काम में उन्हें सहारा देगा।राज्य मां बाप या अभिभावक को बच्चों के विकास के लिये उचित सहायता देगा।
4-स्वास्थ्य सेवायें: बच्चे को उच्चतम स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधायें पाने का अधिकार है।हर राज्य बच्चों को प्रारंभिक स्वास्थ्य की रक्षा,और शिशुओं की मृत्यु दर कम करने पर विशेष बल देगा।
5-अच्छा जीवन स्तर:हर बच्चे को अच्छा जीवन स्तर पाने का अधिकार है। जिसमें उसका पर्याप्त मानसिक,शारीरिक,बौद्धिक,नैतिक और सामाजिक विकास हो सके। उसे पर्याप्त रोटी कपड़ा और मकान मिल सके।
6-विकलांग बच्चों के लिये उचित व्यवस्था:हर अक्षम बच्चे को विशेष देखभाल,शिक्षा,प्रशिक्षण पाने का अधिकार है। जिससे वह सक्षम हो कर अपने समाज का हिस्सा बन जाय।
7-नशीले पदार्थों से बचाव:हर बच्चे को नशीली दवाओं,मादक पदार्थों के उपयोग से बचाए जाने का अधिकार है। राज्य बच्चे को इन दवाओं,नशीले पदार्थों के बनाने बेचने से बचायेगा।
8-शिक्षा की व्यवस्था:हर बच्चे को शिक्षा पाने का अधिकार है। हर राज्य का यह कर्तव्य है कि वह हर बच्चे के लिये प्राथमिक स्तर की शिक्षा निःशुल्क एवम अनिवार्य करे। बच्चों को माध्यमिक स्कूलों में प्रवेश दिलवाये।यथा संभव हर बच्चे को उच्च शिक्षा दिलवाए। विद्यालयों में अनुशासन बच्चों के आत्मसम्मान को चोट पहुंचाने वाला न हो।शिक्षा बच्चों को ऐसे जीवन के लिये तैयार करे जो उसमें समझ,शान्ति एवं सहनशीलता विकसित करे।
9-क्रीड़ा एवं सांस्कृतिक गतिविधियां: बच्चे के सम्पूर्ण विकास में खेलकूद,मनोरंजन, सांस्कृतिक गतिविधियों,विज्ञान का बड़ा हाथ होता है। इसलिये हर बच्चे को छुट्टी,खेलकूद तथा कलात्मक, सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अधिकार प्राप्त है।बच्चे को ऐसा माहौल प्रदान करना राज्य की जिम्मेदारी है।
10-दुर्व्यवहार से रक्षा: बच्चे को उपेक्षा,गाली,दुर्व्यवहार से बचाये जाने का अधिकार है।राज्य का यह कर्तव्य है वह बच्चों को हर तरह के दुर्व्यवहार से बचाये। पीड़ित बच्चों के सुधार, उचित उपचार के लिये उचित सामाजिक कार्यक्रम चलाये जाने चाहिये।
11-अनाथ बच्चों की रक्षा: अनाथ बच्चों को सुरक्षा पाने का अधिकार है।राज्य का कर्तव्य है कि अनाथ बच्चों के संरक्षण,उनको पारिवारिक माहौल देने वाली संस्थाओं या सही परिवार द्वारा गोद लेने की व्यवस्था करे।
12-बाल श्रमिकों की सुरक्षा:बच्चों को ऐसे कामों से बचाये जाने का अधिकार है जो उसके स्वास्थ्य,शिक्षा,विकास को हानि पहुंचायें। राज्य को बाल मजदूरी और नौकरी की न्यूनतम उम्र तय करने के साथ काम करने का माहौल सुधारना चाहिये।
13-बेचने,भगाने पर रोक:किसी बच्चे को बेचना,बहला फ़ुसलाकर अपहरण करना,या जबरन काम करवाना कानूनी अपराध है। राज्य की नैतिक  जिम्मेदारी है कि वह बच्चे को इनसे बचाये।
14-यौन शोषण से बचाव:हर राज्य की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों को यौन अत्याचारों,वेश्यावृत्ति या अश्लील चित्रों के व्यवसाय से बचाये।
15-यातना ,दासता पर रोक:बच्चे को कठोर दण्ड,यातना,गैर कानूनी कैद नहीं दी जा सकती। 18 साल से कम बच्चे को आर्थिक दण्ड,उम्रकैद जैसी सजा नहीं दी जा सकती।बाल कैदियों के साथ क्रूरता,कठोरता का व्यवहार नहीं होना चाहिये।
16-किशोर न्याय का प्रबन्ध:अपराध करने वाले बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार होना चाहिये जिससे उनके आत्मसम्मान,योग्यता,विकास को बल मिले।जो उन्हें समाज के साथ फ़िर से जोड़े। जहां तक संभव हो ऐसे बच्चों को कानूनी कार्यवाहियों या संस्थागत परिवर्तनों से बचाना चाहिये।
बच्चों को दोगे अधिकार,
तब पाओगे उनसे प्यार।
हेमन्त कुमार


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