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मां का दूध अमृत समान

शुक्रवार, 3 अगस्त 2012


अपने बच्चे को स्तनपान कराने में मां एवं बच्चे दोनों को जिस सुख का अनुभव होता है उसे शब्दों में नहीं व्यक्त किया जा सकता है। उस अलौकिक सुख को या तो स्तनपान कराने वाली मां समझ सकती है या फ़िर वह अबोध शिशु। इस सुख से भी बढ़कर शिशु के विकास में भी स्तनपान की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।उसके शरीर की वृद्धि,पोषण और मानसिक विकास भी इससे प्रभावित होता है। इसका कारण यह भी है कि दुनिया में आने के बाद शिशु को सबसे पहला आहार मां के दूध के रूप में मिलता है। यह आहार प्रकृति द्वारा शिशु को दिया गया एक ऐसा सम्पूर्ण आहार है जो कि उसे इस दुनिया में रहने,विकसित होने और बाहर के जीवाणुओं,बीमारियों से लड़ने की शक्ति भी प्रदान करता है।
             चूंकि पैदा होते ही शिशु को पहला चेहरा मां का ही दिखता है,सबसे पहले वह मां से ही परिचित होता है शायद इसी लिये प्रकृति ने स्वाभाविक रूप से मां के शरीर के माध्यम से ही उसे यह आहार देने की व्यवस्था भी कर दी है।
           लेकिन दुख की बात यह है कि स्तनपान के विषय में युवा माताओं एवम पिताओं को बहुत कम जानकारियां हैं। इसी लिये हम यहां स्तनपान से संबन्धित कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं जिन्हें हर मां,पिता के साथ ही उन नव विवाहितों को भी जानना चाहिये जिन्हें भविष्य में मां,पिता बनना है।
(1)      जन्म के तुरंत बाद स्तनपान बहुत जरूरी:
                                            बच्चा पैदा होने के बाद शुरू के दो
 तीन दिनों में मां के स्तन से निकला हुआ दूध (खीस या कोलेस्ट्रम) बच्चों के लिये अमृत की तरह होता है। यही खीस ही बच्चों के शरीर को जीवन भर रोगों से लड़ने की ताकत देने के साथ उसके सम्पूर्ण विकास में भी सहायक बनता है। खीस दो तीन दिनों के बाद सामान्य दूध में बदल जाता है। यदि बच्चा शुरू में ही इसे नहीं पी पाता तो जीवन भर इस अमृत से वंचित रहेगा। इसी लिये बच्चे के पैदा होने के आधे घण्टे बाद से यह खीस पिलाना शुरू कर देना चाहिये। यदि बच्चा स्तन को मुंह में नहीं लगा रहा है(कुछ बच्चे शुरू में ऐसा करते हैं) तो किसी व्यक्ति  को चाहिये कि वह इस खीस को साफ़ चम्मच में निकाल कर बच्चे को पिलाये।इसी खीस को लेकर ही शायद छ्ठी का दूध याद दिलाने का मुहावरा भी बनाया गया है।बहुत से परिवारों में यह भी कहा जाता है कि खीस गन्दा दूध होता है इसे शिशु को नहीं पिलाना चाहिये। लेकिन यह बात तमाम शोधों से साबित हो चुकी है कि खीस पीने वाले बच्चों में आगे चलकर रोग रोधी शक्ति अधिक रहती है।
(2)      स्तनपान के फ़ायदे:
                 पैदाइश के बाद पहले चारसे छ महीनों तक बच्चे का पेट मां के दूध से ही भर जाता है।उसे इसके अलावा किसी दूसरे ऊपरी आहार की जरूरत नहीं रहती। स्तनपान के कुछ और भी फ़ायदे हैं जिन्हें हर मां को जानना चाहिये----0बच्चे को जरूरत के अनुसार शुद्ध और गरम दूध मिलता है। इस दूध से उसे दस्त नहीं आता।0मां का दूध आसानी से पच जाता है,इसीलिये इससे बच्चे के पेट में गैस नहीं बनती।0सबसे बड़ी बात यह है कि मां का दूध बच्चे की रोग रोधी ताकत (रेजिस्टेंस) को बढ़ाता है।0स्तनपान से मां और उसके शिशु को जो सुख मिलता है उसका वर्णन नहीं किया जा सकता।इससे बच्चे के अन्दर सुरक्षा,प्यार और खुद को विशिष्ट मानने की भावना बढ़ती है।0स्तनपान से सबसे महत्वपूर्ण और अन्तिम फ़ायदा यह है कि बच्चे को स्तनपान कराने के दौरान मां को दुबारा गर्भ धारण करने की संभावना कम रहती है।(इसका यह मतलब कदापि नहीं कि आप परिवार नियोजन के उपायों को अपनाना छोड़ दें।)
   (3)स्तनपान कैसे करायें: आज भी बहुत सी माताओं को स्तनपान कराने का सही  तरीका नहीं मालूम है। हम स्तनपान कराने के  सही तरीके को यहां बता रहे हैं----
   0 शिशु को स्तनपान कराने के पहले हाथ एवं स्तन दोनों को अच्छी तरह धो लें।अन्यथा हाथ  या स्तनों पर मौजूद मैल दूध के साथ बच्चे के शरीर में भी जायेगी,जो उसके स्वास्थ्य के लिये हानिकारक होगी।
0 बच्चे को स्तनपान हमेशा बैठ कर करायें। नहीं तो दूध बच्चे के कान या श्वास नली में जाकर उसे नुक्सान पहुंचा सकता है। पहले आप खुद व्यवस्थित ढंग से बैठ जायें। फ़िर बच्चे का सर अपनी बांह पर इस तरह रखें कि उसका सर स्तन से ऊंचा रहे। इससे उसके कान में दूध नहीं जायेगा।यदि आप दूध लेटकर ही पिलाना चाहें तो ध्यान रखें बच्चे की नाक कहीं से न दबे।
0 बच्चे को भूख के हिसाब से ही दूध पिलायें। एक बार 10-15 मिनट दूध पीकर बच्चा दो-तीन घण्टे तक भूख नहीं महसूस करेगा। दुबारा जब बच्चा चाहे तभी उसे स्तनपान करायें।
0 दूध पिलाकर बच्चे को अपने कंधे पर लिटा कर उसकी पीठ पर दो-तीन हल्की थपकियां दें ताकि बच्चा डकार ले। इससे बच्चा दूध उल्टेगा नहीं। अक्सर दूध पीने के बाद डकार न कराने पर शिशु डकार आने पर उसके साथ दूध भी बाहर उलट देते हैं। डकार करा देने से ऐसा नहीं होगा।यदि वह स्तनपान करते करते सो जाय तो उसे सोने दें।
0 यदि आपके स्तन में बच्चे की जरुरत से ज्यादा दूध आये तो उसे निकाल दें। नहीं तो स्तनों में कड़ापन और सूजन आ जायेगी। इससे आपको बच्चे को दूध पिलाने में परेशानी होगी।
0पहले 2-3 महीनों में बच्चा रात में भी मां को स्तनपान के लिये जगायेगा। रात में भी बच्चे को स्तनपान कराना नुक्सान दायक नहीं होता। दूध पीकर वह फ़िर सो जायेगा। कुछ महीनों बाद बच्चा जब रात में ठीक से सोने लगेगा तो धीरे धीरे रात में उसकी स्तनपान करने की आदत  खुद ही बन्द हो जायेगी।
             स्तनपान से सम्बन्धित ये कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें समझ और अपनाकर
   आप शिशु और अपना दोनों का ही जीवन संवार सकेंगी।
                
                  जन्म से छः सालों तक दो,बच्चे को प्यार सुरक्षा।
           बिन बाधा बढ़ता जायेगा ,बनेगा वो फ़िर बच्चा अच्छा॥
                           0000000
डा0हेमन्त कुमार

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