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अस्तित्व

शुक्रवार, 31 जुलाई 2009


अस्तित्व -1

नेस्तनाबूद करने की
करो
हजार कोशिशें
कर दो
जमीन्दोज मुझे
पाताल की गहराइयों में ।
पर मैं
ऊपर आऊंगा जरूर
एक दिन
धरती का सीना फ़ाड़ कर
तुम्हारी खैरियत पूछने
क्योंकि
मैं एक बीज हूं ।
000000

अस्तित्व -2

माचिस
उठाने से पहले
देख तो लेते
मैं
फ़ूस का नहीं
बारूद का ढेर हूं ।
0000000
हेमन्त कुमार

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एहसास

सोमवार, 20 जुलाई 2009


कब तक खेलते रहोगे
तुम
लुका छिपी का यह खेल
मुझसे
कब तक भटकते रहोगे
इस सूखे रेगिस्तान में
बरसने को आतुर
बादलों की प्रतीक्षा में।

क्या नहीं उठती
कोई हलचल
तुम्हारे अन्तः में
बारिश की रेशमी फ़ुहारों के
स्पर्श को
अपने होठों पर
महसूस करने की।

विश्वास करो मुझ पर
मैं ध्वस्त तो नहीं कर सकता
इस रेगिस्तान को
पर महसूस करा सकता हूं
बारिश की रेशमी फ़ुहारों का स्पर्श
तुम्हारे अन्तः में
तुम एक बार
अपनी आंखों की गहराई में
झांकने का अवसर तो दो।
*****
हेमन्त कुमार


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( कहानी कहना -----कहानी सुनाना एक कला (भाग-2)

सोमवार, 13 जुलाई 2009

स्वर+गति+लय+अभिनय =अच्छी कहानी

मेरे लेखन की शुरुआत आकाशवाणी के इलाहाबाद केन्द्र से हुई थी ।वह भी बच्चों के लिये प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘बालसंघ’ से ।1974 के आसपास ‘बालसंघ’ कार्यक्रम का संचालन आदरणीय श्री विजय बोस जी किया करते थे ।श्री विजय बोस एक बेहतरीन ड्रामा आर्टिस्ट होने के साथ ही एक बढ़िया प्रस्तोता एवम वाचक भी थे …खासकर कहानियां सुनाने के मामले में तो उनका कोई जवाब नहीं था ।साधारण कहानी को भी विजय भैया इतने बढ़िया ढंग से सुनाते थे कि वह कहानी
खास बन जाती थी । और यही साधारण सी कहानी का खास बन जाना ही बच्चों का मनोरंजन करता है।उन्हें कहानी के प्रति आकर्षित करता और अन्त तक बांधे रहता है।बच्चों को कहानी सुनाना मैनें आदरणीय विजय बोस से ही सीखा था।यद्यपि बचपन में दादी,नानी,अपनी माता जी एवम अन्य बुजुर्गों से भी कहानी सुनी थी ---लेकिन कहानी सुनने का असली तरीका आकाशवाणी में ही सीख सका ।
दरअसल बच्चों को कहानी सुनाते समय हमें कई कलाओं एवम दक्षताओं का इस्तेमाल करना होता है ।इनमें वाचन,अभिनय,चित्रकला,पुतुल(पपेट),चार्ट आदि प्रमुख हैं ।यहां मैं पहले वाचन और अभिनय का ही उल्लेख करूंगा ।क्योंकि ये दोनों ही दक्षतायें कहानी को ज्यादा आकर्षक और प्रभावशाली बनाती हैं।
1-स्वर का उतार चढ़ाव :
यह तो कहानी सुनाने का सबसे महत्वपूर्ण तत्व है।यदि हम किसी बच्चे या बच्चों के समूह को एकदम साधारण ढग से ,सामान्य स्वर में कोई कहानी सुना देंगे तो वह कहानी कितनी भी अच्छी हो एकदम बेअसर हो जायेगी हो सकता है बच्चे उसे ठीक से सुनें भी न । हो सकता है कुछ बच्चे कहानी सुनते समय सोने लगें । लेकिन यही कहानी अगर कहानी के पात्रों,दृश्यों ,स्थितियों और भावों के अनुरूप अपनी आवाज में उतार चढ़ाव लाकर सुनायी जायेगी तो उसका प्रभाव ही अलग पड़ेगा ।
2-गति एवम लय :
जैसे किसी गीत को लय और गति प्रभावशाली बनाते हैं ,वैसे ही कहानी को भी यही दोनों तत्व सुनने योग्य बनाते हैं ।मान लीजिये कोई परियों की कहानी है ।उसमें परी के विवाह का वर्णन है अब उसे अगर आप कर्कश स्वरों में जल्दी जल्दी सुना देंगे तो क्या उसे बच्चे पसन्द करेंगे---नहीं न । और उसी विवाह के वर्णन को अगर आप थोड़ा कोमल स्वरों में धीरे धीरे सुनायेंगे तो उसका प्रभाव ही एकदम अलग होगा।इसी तरह अगर किसी कहानी में किसी युद्ध का वर्णन है तो आपको उसी दृश्य के अनुरूप अपने स्वरों में थोड़ा तेजी और उत्साह लाना होगा।
3-अभिनय :
कहानी सुनाने में जितनी बड़ी भूमिका स्वर,गति,लय की है उतनी ही बल्कि उससे कहीं ज्यादा अभिनय की है ।आप पूछेंगे वह कैसे ?भाई सीधी सी बात है हम सभी को राम की कहानी पढ़ने, उससे ज्यादा किसी अच्छे कथावाचक से सुनने और उससे भी ज्यादा उसे रामलीला के रूप में देखने में आनन्द आता है ।ठीक यही बात हम हर कहानी के साथ लागू कर सकते हैं।खासतौर से बच्चों को कहानी सुनाते समय तो हमें अपने अन्दर एक अच्छे अभिनेता को जगाना ही होगा।तभी हम कहानी सुनने का पूरा आनन्द बच्चों को दे सकेंगे।
मान लीजिये शेर और खरगोश की ही कहानी बच्चों को सुनानी है ।तो एक तरीका तो यह है कि हम सीधे सीधे सत्यनारायण की कथा की तरह बच्चों को यह कहानी सुना दें और फ़ुरसत पा जायें।दूसरा और मेरे हिसाब से सही तरीका यह है कि हम इस कहानी को धीरे धीरे सुनाने के साथ ही शेर और खरगोश के साथ ही अन्य जानवरों के बीच हुये संवादों को उन्हीं जानवरों की आवाजों में सुनायें। आप खुद सोच कर देखिये बच्चे आपके मुंह से शेर की दहाड़ या खरगोश की डरी हुई आवाज सुन कर कितना आनन्दित होंगे।इतना ही नहीं अगर हम खुद या फ़िर बच्चों से इन पात्रों के अभिनय करवायें तो सम्भवतः कहानी का प्रभाव दूना हो जायेगा ।
हम अभिनय के माध्यम से सिर्फ़ कहानी को ही प्रभावशाली नहीं बनाते हैं ।हम इसके माध्यम से बच्चों को कहानी में शामिल विभिन्न जानवर पात्रों के व्यवहार,उनकी बोलियों,उनके स्वभाव से भी परिचित करते हैं।इतना ही नहीं कहानी यदि किसी ऐतिहासिक घटना पर आधारित है तो उसके पात्रों के माध्यम से उस समय के लोगों की बोलने ,बातचीत की शैली भी सीखते हैं ।
हमारे प्राथमिक स्कूलों के शिक्षक बन्धुओं को तो खासातौर से अपनी कक्षाओं में कहानी सुनाते समय इन तीनों ही तत्वों स्वरों का उतार चढ़ाव,गति एवम लय तथा अभिनय का ध्यान जरूर रखना चाहिये तभी वे एक अच्छे कथावाचक की भूमिका निभा सकते हैं ।
000000000000
हेमन्त कुमार

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चिड़िया

शनिवार, 4 जुलाई 2009

चिड़िया तो आखिर चिड़िया है
उसको बेचारी को कहां पता कि हम
सभ्य हो रहे हैं
और हमारा विकास
पूरी प्रगति पर है ।

चिड़िया तो खोज रही है
सूनी आंखों से
अपना नन्हां सा घोसला
और नन्हें बच्चों को
जिन्हें वह अकेला छोड़
सुबह उड़ गई थी
दानों की खोज में
पर अब तो वहां कुछ भी नहीं
न पेड़ न घोसला न बच्चे ।

उसे तो दिख रहा है
दूर दूर तक फ़ैला हुआ
कंक्रीट और इस्पात का
एक अंतहीन जंगल
पिघले हुये
काले तारकोल की बहती नदियां
और धरती के सीने में
उड़ेला जा रहा
खौलता इस्पात ।

चिड़िया बेचारी तो
हो गयी है स्तब्ध
हमारी सभ्यता
और विकास की तेज
गति को देखकर ।

आखिर वह
अब कहां खोजे
अपना घोसला और बच्चों को
किससे करे फ़रियाद
खाकी वर्दी / खद्दरधारी से
या फ़िर यू एन ओ और
वर्ल्ड पीस फ़ाउण्डेशन के
माननीय सदस्यों से ?

लेकिन
चिड़िया तो आखिर चिड़िया है
उसको बेचारी को कहां पता
कि हम सभ्य हो रहे हैं
और हमारा विकास प्रगति पर है
हमें नहीं कोई मतलब
चिड़िया घोसले
और उसके बच्चों से ।
********
हेमन्त कुमार

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लेबल

‘देख लूं तो चलूं’ “देश भीतर देश”--के बहाने नार्थ ईस्ट की पड़ताल “बखेड़ापुर” के बहाने “बालवाणी” का बाल नाटक विशेषांक। “मेरे आंगन में आओ” 1mai 2011 48 घण्टों का सफ़र----- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अण्डमान का लड़का अनुरोध अनुवाद अभिनव पाण्डेय अभिभावक अर्पणा पाण्डेय। अशोक वाटिका प्रसंग अस्तित्व आज के संदर्भ में कल आतंक। आतंकवाद आत्मकथा आने वाली किताब आभासी दुनिया आश्वासन इंतजार इण्टरनेट ईमान उत्तराधिकारी उनकी दुनिया उन्मेष उपन्यास उपन्यास। उलझन ऊँचाई ॠतु गुप्ता। एक ठहरा दिन एक बच्चे की चिट्ठी सभी प्रत्याशियों के नाम एक भूख -- तीन प्रतिक्रियायें एक महान व्यक्तित्व। एक संवाद अपनी अम्मा से एल0ए0शेरमन एहसास ओ मां ओडिया कविता औरत औरत की बोली कंचन पाठक। कटघरे के भीतर्। कठपुतलियाँ कथा साहित्य कथावाचन कला समीक्षा कविता कविता। कविताएँ कहां खो गया बचपन कहां पर बिखरे सपने--।बाल श्रमिक कहानी कहानी कहना कहानी कहना भाग -५ कहानी सुनाना कहानी। काल चक्र काव्य काव्य संग्रह किताबें किशोर किशोर शिक्षक किश्प्र किस्सागोई कीमत कुछ अलग करने की चाहत कुछ लघु कविताएं कुपोषण कैसे कैसे बढ़ता बच्चा कौशल पाण्डेय कौशल पाण्डेय. कौशल पाण्डेय। क्षणिकाएं खतरा खेत आज उदास है खोजें और जानें गजल ग़ज़ल गर्मी गाँव गीत गीताश्री गुलमोहर गौरैया गौरैया दिवस घर में बनाएं माहौल कुछ पढ़ने और पढ़ाने का घोसले की ओर चिक्कामुनियप्पा चिडिया चिड़िया चित्रकार चुनाव चुनाव और बच्चे। चौपाल छोटे बच्चे ---जिम्मेदारियां बड़ी बड़ी जज्बा जज्बा। जयश्री राय। जयश्री रॉय। जागो लड़कियों जाडा जाने क्यों ? जेठ की दुपहरी टिक्कू का फैसला टोपी डा0 हेमन्त कुमार डा0दिविक रमेश। डा0रघुवंश डा०रूप चन्द्र शास्त्री डा0सुरेन्द्र विक्रम के बहाने डा0हेमन्त कुमार डा0हेमन्त कुमार। डा0हेमन्त कुमार्। डॉ.ममता धवन तकनीकी विकास और बच्चे। तपस्या तलाश एक द्रोण की तितलियां तीसरी ताली तुम आए तो थियेटर दरख्त दशरथ प्रकरण दस्तक दुनिया का मेला दुनियादार दूरदर्शी देश दोहे द्वीप लहरी नई किताब नदी किनारे नया अंक नया तमाशा नयी कहानी नववर्ष नवोदित रचनाकार। नागफ़नियों के बीच नारी अधिकार निकट नियति निवेदिता मिश्र झा निषाद प्रकरण। नेता जी नेता जी के नाम एक बच्चे का पत्र(भाग-2) नेहा शेफाली नेहा शेफ़ाली। पढ़ना पतवार पत्रकारिता-प्रदीप प्रताप पत्रिका पत्रिका समीक्षा परम्परा परिवार पर्यावरण पहली बारिश में पहले कभी पहाड़ पार रूप के पिघला हुआ विद्रोह पिता पिता हो गये मां पितृ दिवस पुरस्कार पुस्तक चर्चा पुस्तक समीक्षा पुस्तक समीक्षा। पेड़ पेड़ बनाम आदमी पेड़ों में आकृतियां पेण्टिंग प्यारी टिप्पणियां प्यारी लड़की प्रकृति प्रताप सहगल प्रथामिका शिक्षा प्रदीप सौरभ प्रदीप सौरभ। प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक शिक्षा। प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव। प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव. प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव। फ़ादर्स डे।बदलते चेहरे के समय आज का पिता। फिल्म फिल्म ‘दंगल’ के गीत : भाव और अनुभूति फ़ेसबुक बखेड़ापुर बचपन बचपन के दिन बच्चे बच्चे और कला बच्चे का नाम बच्चे पढ़ें-मम्मी पापा को भी पढ़ाएं बच्चे। बच्चों का विकास और बड़ों की जिम्मेदारियां बच्चों का आहार बच्चों का विकास बदलाव बया बहनें बाजू वाले प्लाट पर बारिश बारिश का मतलब बारिश। बाल अधिकार बाल अपराधी बाल दिवस बाल नाटक बाल पत्रिका बाल मजदूरी बाल मन बाल रंगमंच बाल विकास बाल साहित्य बाल साहित्य प्रेमियों के लिये बेहतरीन पुस्तक बाल साहित्य समीक्षा। बाल साहित्यकार बालवाटिका बालवाणी बालश्रम बालिका दिवस बालिका दिवस-24 सितम्बर। बीसवीं सदी का जीता-जागता मेघदूत बूढ़ी नानी बेंगाली गर्ल्स डोण्ट बेटियां बैग में क्या है ब्लाग चर्चा भजन भजन-(7) भजन-(8) भजन(4) भजन(5) भजनः (2) भयाक्रांत भारतीय रेल मंथन मजदूर दिवस्। मदर्स डे मनीषियों से संवाद--एक अनवरत सिलसिला कौशल पाण्डेय मनोविज्ञान महुअरिया की गंध माँ मां का दूध माझी माझी गीत मातृ दिवस मानस मानसी। मानोशी मासूम पेंडुकी मासूम लड़की मुद्दा मुन्नी मोबाइल मेरी अम्मा। मेरी कविता मेरी रचनाएँ मेरे मन में मोइन और राक्षस मोनिका अग्रवाल मौत के चंगुल में मौत। मौसम यात्रा युवा रंगबाजी करते राजीव जी रस्म मे दफन इंसानियत राजीव मिश्र राजेश्वर मधुकर राजेश्वर मधुकर। रामकली रामकिशोर रिपोर्ट रिमझिम पड़ी फ़ुहार रूचि लगन लघुकथा लघुकथा। लड़कियां लड़कियां। लड़की लालटेन चौका। लू लू की सनक लेख लेख। लौटना वनवास या़त्रा प्रकरण वरदान वर्कशाप वर्ष २००९ वह दालमोट की चोरी और बेंत की पिटाई वह सांवली लड़की वाल्मीकि आश्रम प्रकरण विकास विचार विमर्श। विश्व रंगमंच दिवस व्यंग्य व्यक्तित्व व्यन्ग्य शक्ति बाण प्रकरण शाम शायद चाँद से मिली है शिक्षक शिक्षक दिवस शिक्षक। शिक्षा शिक्षालय शैलजा पाठक। शैलेन्द्र संदेश संध्या आर्या। संसद संस्मरण संस्मरण। सड़क दुर्घटनाएं सन्ध्या आर्य सन्नाटा सपने दर सपने सफ़लता का रहस्य सबरी प्रसंग सभ्यता समय समर कैम्प समाज समीक्षा। समीर लाल। सर्दियाँ सांता क्लाज़ साधना। सामायिक सारी रात साहित्य अमृत सीता का त्याग.राजेश्वर मधुकर। सुनीता कोमल सुरक्षा सूनापन सूरज सी हैं तेज बेटियां सोशल साइट्स स्तनपान स्त्री विमर्श। स्वतन्त्रता। हंस रे निर्मोही हक़ हादसा। हाशिये पर हिन्दी का बाल साहित्य हिन्दी ब्लाग हिन्दी ब्लाग के स्तंभ हिम्मत होलीनामा हौसला accidents. Bअच्चे का विकास। Breast Feeding. Child health Child Labour. Children children. Children's Day Children's Devolpment and art. Children's Growth children's health. children's magazines. Children's Rights Children's theatre children's world. Facebook. Fader's Day. Gender issue. Girls Kavita. lekh lekhh masoom Neha Shefali. perenting. Primary education. Pustak samikshha. Rina's Photo World.रीना पीटर.रीना पीटर की फ़ोटो की दुनिया.तीसरी आंख। Teenagers Thietor Education. Youth

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