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पुस्तक समीक्षा-धरती से आसमान तक धमाल मचाने के लिए--बच्चों को जरुर पढ़ायें ये किताब

रविवार, 17 मई 2020


पुस्तक समीक्षा
समीक्षक-डा0हेमन्त कुमार

धरती से आसमान तक धमाल मचाने के लिए--बच्चों को जरुर पढ़ायें ये किताब
                                                                         

                      पुस्तक का नाम: मेरा नाम है
(चार पुस्तकों की श्रृंखला)
लेखक—चित्रकार:आबिद सुरती
प्रकाशक:साहित्य अकादमी
रवीन्द्र भवन,35 फिरोजशाह मार्ग
नई दिल्ली-110001

                             अक्सर अभिभावक,प्राथमिक स्कूल के शिक्षक या बड़े साहित्यकार भी ये कहते सुने जाते हैं कि हिंदी में बच्चों के लिए अच्छा साहित्य नहीं लिखा जा रहा।या बाजार में बच्चों के पढने के लिए अच्छी किताबें हिंदी में उपलब्ध नहीं हैं।जबकि वास्तविकता यह नहीं है।आज की तारीख में बच्चों के लिए बहुत कुछ अच्छा लिखा जा रहा और प्रकाशित भी हो रहा है।हाँ ये जरूर है कि सर्कुलेशन या प्रचार प्रसार की कमी से भी बच्चों तक बहुत सारी अच्छी किताबें नहीं पहुँच पाती।
     बहरहाल मेरा मकसद यहाँ बाल साहित्य या उसके प्रचार प्रसार की समस्या गिनाना नहीं बल्कि बच्चों की एक बेहद खूबसूरत और खासकर छोटे बच्चों के लिए जरूर पठनीय पुस्तक के बारे में बताना है।इस पुस्तक का नाम ही “मेरा नाम है”।यानि कि पुस्तक के शीर्षक से ही लेखक ने बच्चों को जोड़ने की कोशिश की है।वो इस तरह कि किताब के अनुक्रम के बाद पहले पेज पर ही बच्चे के नाम लिखने की जगह दी गयी है।यानि उसी वक्त से बच्चा किताब से सीधे सीधे एक स्वामित्व वाले भाव से जुड़ जाएगा।और जब किताब उसकी होगी तो जाहिर सी बात है कि इसे वो पढ़ेगा भी। 
      इस किताब का शीर्षक पढ़ कर ही बच्चों के मन में इसे पढने कि उत्सुकता बढ़ जायेगी।इस खूबसूरत किताब के लेखक हैं बहुत ही वरिष्ठ पर मन से बच्चे—प्रसिद्ध साहित्यकार आबिद सुरती।आबिद जी लेखक से पहले एक मशहूर चित्रकार और कार्टूनिस्ट भी हैं।उन्होंने ही इस पूरी किताब को अपने द्वारा बनाये गए खूबसूरत चित्रों से सजाया भी है।किताब हाथ में आने के बाद यह निर्णय करना थोड़ा कठिन है कि पहले इसके चित्र बनाए गए हैं या कि किताब लिखी जाने के बाद चित्र बने हैं।किताब में कुल चार कहानियाँ हैं—1-चकमक चश्मे वाला 2-तैयबअली टाई वाला 3-फोफो फोटो वाला 4-रानी फूल पत्ती वाला 
           इन चारों खूबसूरत कहानियों को खुद आबिद जी ने इतने सुन्दर चित्रों से सजाया है कि ये किताब देखते ही कोई भी बच्चा इसे पढने को मचल उठेगा।इसके हर पृष्ठ पर दो पंक्तियाँ दी हैं “बहते चलो बच्चों बहते चलो” और“लहराते चलो बच्चों लहराते चलो”। इन्हें हम इस किताब की टैग लाइन भी कह सकते हैं जो बच्चे या पाठक को किताब को आगे पढने के लिए प्रेरित करती हैं।किताब की ख़ास बात ये है कि इसका हर पृष्ठ अपने आप में मुकम्मल है और एक कहानी,एक कविता का आनंद देता है।हर कहानी की एक शुरुआत है तो एक अंत भी है।
 किताब की सबसे बड़ी विशेषता जो बच्चों को निश्चित ही आकर्षित करेगी और बच्चों की जुबान पर भी चढ़ेगी वो है पूरी किताब का लिरिकल होना।यानि किताब का हर पृष्ठ बच्चों को एक गीत का भी आनंद देगा।अब आप पहली कहानी की शुरुआत ही देखियेयह कहानी मेरे सपनों की है/जिसे मैं इस साल देखूंगा/इसकी शुरुआत एक चूहे से होती/देखो वह कैसे फुदक रहा है इधर से उधर/और चिल्ला रहा उछल-उछल कर....इसी तरह पेज दस पर देखिये---सूरज मुस्कुरा रहा है/किरणें हुयी हैं मंद/कैंची ने किया है/मुंह मैडम का बंद।
    इसी तरह पेज 34-35 को हम देखते हैं तो वहां भी बच्चों के लिए मजेदार चित्रों की दुनिया सजी है।एक तरफ एक उड़ते सांप की पीठ  पर बैठा तोता यानि मिट्ठू और उस उड़ते सांप को एक हाथ से पकड़े लटका हुआ बच्चा नन्नू जिसके दूसरे हाथ में फलियों से भरा बर्तन।---सांप के सर पर रखा हीरा(शायद नागमणि)--दूसरी ओर हवा में उड़ता जोकर और उसे पकड़ कर लटका चंदू।साथ में इनका गीतमय शब्दों में वर्णन।---बहते हैं मियाँ मिट्ठू संग सबके/हीरे पर है उसकी ललचायी नजर/फलियाँ कैसे खाए नन्हा-मुन्ना नन्नू /इसी दुविधा में झूल रहा मगर---अब अगर ध्यान से पढ़ा जाय तो ये ऎसी पंक्तियाँ लगती हैं जिनका आपस में बहुत ज्यादा मेल न होते हुए भी आपस में ये पंक्तियाँ एक दूसरे की पूरक भी हैं।क्योंकि बच्चा इन्हें पढने के साथ पंक्तियों को पेज पर बनी तस्वीरों से भी रिलेट करता चलेगा।इस तरह उसे एक तरह के मानसिक अभ्यास का भी मौक़ा लेखक ने दिया है।    
   पूरे किताब की चारों ही कहानियां इसी प्रकार की गीतात्मक शैली में आगे बढती हैं और इन गीतों में भी शब्द बहुत सरल इस्तेमाल किये गए हैं जो आसानी से बच्चों की समझ में भी आये और उन्हें याद भी हो जाए।आबिद जी की इस किताब को पढ़ते हुए और उसकी गीतात्मक शैली का आनंद उठाते हुए मुझे बच्चों की फिल्म “जग्गा जासूस” की याद आ गयी जिसमें पूरी फिल्म मे रणबीर कपूर और अन्य कलाकार अपने सारे डायलाग गा कर बोलते हैं।      
    चित्रों से भरपूर इस किताब की एक और बड़ी विशेषता का जिक्र यहाँ मुझे जरूरी लगता है–वो यह कि  इस किताब का वो बच्चा भी आनंद उठा सकता है जिसे अभी अक्षर ज्ञान भी नहीं है।यानि जिसने अभी पढ़ना लिखना नहीं सीखा है या जो अभी स्कूल नहीं जा सका।ऐसा बच्चा भी इस किताब के हर पृष्ठ पर बने रंग-बिरंगे और बेहद खूबसूरत चित्रों को देख कर आनंद उठा सकता है और इतना ही नहीं उसके अन्दर पुस्तकों के प्रति आकर्षण भी बढेगा साथ ही भविष्य में किताबों से नाता जोड़ने की प्रवृत्ति  भी उसमें जागेगी।
     जैसा की सर्व विदित है आज भी बच्चों की पहली पसंद फैंटेसी और परी लोक की कहानियां हैं।क्योंकि बच्चा दुनिया के यथार्थ को महसूस करने से पहले तक अपनी कल्पनाओं की दुनिया में विचरना चाहता है।उसे हर पल कुछ अलग,कुछ नया दिखना चाहिए।उसका ध्यान बहुत ज्यादा देर तक किसी एक घटना या पात्र पर नहीं टिका रह सकता।इस दृष्टि से भी ये किताब बाल पाठकों के मनोनुकूल है।
            इस किताब की हर कहानी एक सपने के साथ शुरू होती है।और पूरी कहानी बच्चों को सपनों की दुनिया या कहें फैंटेसी में विचरने,कल्पना लोक की सैर करके आनंदित होने का पूरा अवसर देती है।आबिद जी की ये सबसे बड़ी विशेषता कही जायेगी की उन्होंने बच्चों के कल्पना लोक को इस किताब की माध्यम से बखूबी जिया है।बच्चों की कल्पनाओं के पंख उसे जहां जहां तक उड़ान भरवा सकते हैं—चाँद तारों पर---आसमान में—पहाड़ों के बीच –समुद्र में हर जगह आबिद जी ने बाल पाठकों को उड़ान भरने का पूरा अवसर दिया है।चाहे वो शब्दों के माध्यम से हो या हर पेज पर बने रंग-बिरंगे खूबसूरत चित्रों के माध्यम से।
  यदि इस पुस्तक को मुकम्मल रूप में एनीमेशन फिल्म के रूप में फिल्माया जाय और सारे गीतों संवादों को संगीत के साथ लयबद्ध ढंग से प्रस्तुत किया जाय तो यह निश्चित रूप से छोटी उम्र के बच्चों के लिए एक शानदार एनीमेशन फिल्म बन सकती है।
  समग्र रूप से यह निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि आज भारतीय बच्चों के लिए ऎसी ही रंग-बिरंगी चित्रात्मक किताबों की ज्यादा जरूरत भी है और बच्चों को ऎसी किताबें पसंद भी आयेंगी।
                ०००००
समीक्षक-डा0हेमन्त कुमार

1 टिप्पणियाँ:

Onkar 17 मई 2020 को 3:49 am  

सुन्दर समीक्षा

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