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इन्तजार

बुधवार, 21 अक्तूबर 2009


इस जंगल के
दरख्तों से
क्यों पूछते हो
इनकी खैरियत ।

इनके
दहशतजर्द चेहरों पर तो
खुद ही चस्पा है
रोज तिल तिल कर
मरते हुये
अपने जिबह होने के
इन्तजार
की तस्वीरें ।
000000
हेमन्त कुमार

15 टिप्पणियाँ:

परमजीत बाली 21 अक्तूबर 2009 को 9:12 am  

बहुत उम्दा रचना है।बधाई।

M VERMA 21 अक्तूबर 2009 को 9:56 am  

इस जंगल के
दरख्तों से
क्यों पूछते हो
इनकी खैरियत ।
इन दरख्तो को भी दर्द होता है. इनका एहसास भी अपने एहसास से रूबरू करवा दो.
बहुत सुन्दर रचना

अल्पना वर्मा 21 अक्तूबर 2009 को 12:01 pm  

मर्मस्पर्शी रचना.
यह samsya देखें कब ख़तम होती है.जंगल bachane की मुहीम कितनी रंग लाती है.

Udan Tashtari 21 अक्तूबर 2009 को 12:10 pm  

मार्मिक कथ्य...गहरे भाव!

anjana 21 अक्तूबर 2009 को 12:20 pm  

ज‍ंगलो मे पेड ना होने पर इस का असर पक्षियो पर भी पडा है।जिन का कल तक उस पर आशियाना था।

अनिल कान्त : 21 अक्तूबर 2009 को 11:53 pm  

क्या खूब लिखा है
वाह !!

दिगम्बर नासवा 22 अक्तूबर 2009 को 2:23 am  

वाह कितना कमाल का लिखा है .........एक गंभीर समस्या के प्रति लिखा है आपने ..........

KAVITA 22 अक्तूबर 2009 को 9:44 pm  

दरख्तों से
क्यों पूछते हो
इनकी खैरियत ।
bahut achha likha aapne दरख्तो ka दर्द jintni jaldi logon ko samjh aa jay, utna achha.

Harkirat Haqeer 24 अक्तूबर 2009 को 10:53 pm  

दहशतजर्द चेहरों पर तो
खुद ही चस्पा है
रोज तिल तिल कर
मरते हुये
अपने जिबह होने के
इन्तजार
की तस्वीरें

हेमंत जी प्रकृति से ही मनुष्य जीवन है ...हमें इन्हें बचाना चाहिए ....प्रकृति के दर्द को उकेरती बहुत सुंदर रचना ......!!

वर्तनी में सुधार करें...कुछ लय नहीं बन रही ....इन्तजार तक ही रहने देते तो ठीक था ....कृपया अन्यथा न लें ....!!

radhasaxena 27 अक्तूबर 2009 को 9:40 pm  

vatavaran aur ham ek dusare ke bina nahi rah sakate.mahatva ko samajhanaa hi hogaa.

Apanatva 28 अक्तूबर 2009 को 5:51 am  

jvalant mudde ko le likhee marmik rachana .
badhai .

Apanatva 28 अक्तूबर 2009 को 5:51 am  

jvalant mudde ko le likhee marmik rachana .
badhai .

ओम आर्य 28 अक्तूबर 2009 को 7:53 am  

वक़्त की हाथ में कांटे उग आये हैं शायद,
जहाँ भी छूटा है, एक नया जख्म

रानी पात्रिक 30 अक्तूबर 2009 को 9:52 am  

हाँ जैसे मरने वाले से पूछो कि तेरा हाल क्या है।
कविता बहुत भाई।

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