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खूबसूरत बाल कविताओं का खजाना----- रंग बिरंगी दुनिया

सोमवार, 29 दिसंबर 2025

 

पुस्तक समीक्षा



खूबसूरत बाल कविताओं का खजाना----- रंग बिरंगी दुनिया










पुस्तक :दुनिया रंग बिरंगी



(बाल विज्ञान कविताएँ)



लेखक :अरविन्द दुबे



प्रकाशक :प्रकाशन विभाग



भारत सरकार



हिंदी बाल साहित्य में विज्ञान कथाएँ,उपन्यास ,नाटक तो बहुत लिखे जा रहे हैं और प्रकाशित भी हो रहे हैं ।लेकिन इनकी तुलना में विज्ञान और उसका परिचय देने वाली कविताएँ बहुत कम लिखी गई हैं ।लिखी भी गई हैं तो फुटकर रूप में पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं ।लेकिन एक पुस्तक के रूप में संकलित होकर विज्ञानं कविताएँ कम ही सामने आई हैं ।



पिछले दिनों डा0 अरविन्द दुबे की एक विज्ञानं पर आधारित बल कविताओं का संकलन “दुनिया रंग –बिरंगी” प्रकाशन विभाग से प्रकाशित होकर आई है ।इसमें बच्चों के लिए कुल 27बाल कविताएँ संकलित हैं ।जिनमें ज्यादातर प्रकृति,धरती,सूरज,चाँद,बर्फ ,आंधी जैसे विषयों पर आधारित हैं ।मतलब इसमें हमारी पूरी प्रकृति—असमान—भूमंडल ,यहाँ घटित होने वाली घटनाओं को कविता के रूप में प्रस्तुत किया गया है ।साथ ही उनके कारणों को भी बताने की कोशिश की गई है कि ये प्राकृतिक घटना या परिवर्तन कैसे होते हैं ।मसलन बच्चा अगर सूरज देखता है तो उसके मन में सवाल उठता है कि सूरज निकलता कैसे है ?कहाँ से आटा है ?ये हमें गरमी कैसे देता है ?और बच्चों के मन में उठाने वाले इन सवालों का जवाब भी उसे कविता के रूप में ही मिलता है ।



    एक खास बात और हर कविता के सामने वाले पेज पर उस चीज से या उसमें होने वाली घटनाओं को भी चित्र बना कर दिखाया गया है कि ये घटना कैसे हो रही ?इसके पीछे क्या वैज्ञानिक कारण हैं ।

  अब “सूरज कैसे गर्मी देता “कविता में शुरू में बच्चों के मन में उठने वाले प्रश्न को लिखा गया है –



“कैसे सूरज रोज चमकता



कैसे गर्म धूप है आती



यह गर्मी में बदन जलाती



और सर्दी में मन को भाती।”



फिर इसी कविता में आगे बच्चों के मन में उठने वाले प्रश्न का उत्तर भी दिया गया है—



“सूरज एक गैस का गोला



अंदर गुस्सा बहार भोला



भरा हुआ जलती गैसों से



सूरज के ईंधन का झोला ।



जब ये गैसें होती फ्यूज



सूर्य की भट्ठी दहके



पैदा होता है प्रकाश और



बेहिसाब गर्मी निकले ।”



ये तो एक कविता की बात ।और आगे बढ़ने पर आगे की कविताओं में भी बताया गया है कि सूरज किस दिशा से निकल कर किस दिशा को जाता है ।इसी प्रकार--“चम् चम् चमके चंदा,चाँद पे धब्बे क्यों ?आकार बदलता रहता चंदा जैसी कविताओं में चन्द्रमा में छुपे गूढ़ रहस्यों को भी बच्चों को बहुत सरल भाषा में बताने का प्रयास किया गया है ।अब बचपन से ही जो बच्चा माँ की लोरियों में,कहानियों में चाँद के बारे में,उसमें छुपी बुढ़िया के बारे में सुनता रहा हो उसे जब कविताओं के माध्यम से चाँद से जुड़े रहस्यों,उसकी वास्तविकताओं को बताया जाएगा तो निश्चित ही वह उन बैटन को समझ सकेगा ।

   


इस संकलन में एक तरफ सूरज,चाँद की कविताएँ हैं तो चंद्रग्रहण सूर्यग्रहण जैसी प्राकृतिक घटनाओं को भी कविताओं के माध्यम से बच्चों तक पहुँचाने की कोशिश की गई है ।दिन –रत ,तारों की बातें हैं तो बारिश,बरफ,हिमपात,बिजली गिरने जैसी घटनाओं को भी कविताओं में बुना गया है ।प्रकृति की इन्हीं घटनाओं के साथ ही शहद बनने की प्रक्रिया,मछली रानी,बिल्ली की आँखें चमकीली,जैसी कविताओं में कुछ जीवों के अजूबे रहस्यों से भी पर्दा उठाया गया है ।

     


डा०अरविन्द दुबे वैसे तो पेशे से बच्चों के एक कुशल चिकित्सक हैं ।लेकिन इसके साथ ही वो विज्ञानं साहित्य के एक सशक्त हस्ताक्षर भी हैं ।उनकी दैनिक जीवन में विज्ञानं पर आधारित कई पुस्तकें अब तक प्रकाशित हो चुकी हैं ।जिनमें विज्ञानं कथाएँ,उपन्यास,नाटक लेख सभी कुछ हैं ।और ज्यादातर बच्चों या किशोरों के लिए ।डा०अरविन्द ने रेडियो के लिए कई विज्ञानं पर आधारित सीरिज लिखी हैं ।शैक्षिक दूरदर्शन केंद्र लखनऊ के लिए कई शैक्षिक फिल्मों की स्क्रिप्ट लिखने के साथ बतौर प्रजेंटर भी सैकड़ों कार्यक्रमों में अपना योगदान किया है ।एक तरह से विज्ञानं साहित्य और खासकर बल विज्ञानं साहित्य का उनके पास चालीस सैलून से ज्यादा का अनुभव है ।इसी अनुभव के आधार पर उन्होंने अपनी ये बल विज्ञानं कविताएँ रची हैं ।हिंदी के बल साहित्य के पाठकों और विद्वानों द्वारा निश्चित ही इस अनोखी किताब का स्वागत होना चाहिए ।मुझे तो लगता है इनमें से कुछ कविताएँ प्राथमिक कक्षा की पाठ्य पुस्तकों में भी रखी जानी  चाहिए ।जिससे बच्चे विज्ञान के प्रति आकर्षित हों विज्ञान से जुड़ें भी ।उनके अंदर वैज्ञानिक सोच का विकास भी हो सके ।

    


इस पुस्तक का एक थोडा निगेटिव पक्ष भी है । वो यह की डिजाईनिंग में (चित्रों के रंग संयोजन) के स्तर पर बहुत मेहनत नहीं की गई है ।जिससे बहुत बेहतरीन कंटेंट ,बहुत खुबसूरत कवितायेँ होने के बाद भी ये किताब उतनी बेहतरीन नहीं बन पाई जितनी होनी चाहिए थी ।पुस्तक में कई पृष्ठों पर बैकग्राउंड का रंग इतना चटक लगाया गया है जिसका प्रभाव काले रंग के फांट वाले अक्षरों पर पड़ा है और वो कहीं दब रहे हैं ।यदि उन गहरे रंग वाले पेज पर अक्षरों का फाँट कलर रिवर्स में रखा गया होता तो अक्षर शब्द उभर कर दीखते और किताब और आकर्षक बन सकती थी ।पर इसमें लेखक का कोई दोष नहीं ।उसने तो जब प्रकाशन संस्था को पाण्डुलिपि सौंप दी तो ये प्रकाशन संस्थान,वहां के संपादक,चित्रकार या डिजाइनर की जिम्मेदारी है की वो किताब को कितनी आकर्षक और बेहतरीन बनाएं ।उम्मीद है प्रकाशन विभाग इस किताब की आगे की आवृत्तियों पर इस तरफ ध्यान देंगे ।------बहरहाल डा०अरविन्द दुबे जी से यह उम्मीद है कि भविष्य में भी अपने लेखन से हिंदी बल साहित्य को यूं ही समृद्ध करते रहेंगे ।



०००



डा०हेमन्त कुमार



9451250698  

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बच्चों की असीमित कल्पनाओं के अद्भुत कथाकार : समीर गांगुली

बुधवार, 17 दिसंबर 2025

 

बच्चों की असीमित कल्पनाओं के अद्भुत कथाकार :

समीर गांगुली

समीर गांगुली 

किसी बाल साहित्यकार या कहानीकार का समग्र मूल्यांकन करना अपने आप में एक कठिन काम है ।खासकर ऐसे में जब आपके पास उस लेखक का समग्र साहित्य न उपलब्ध हो ।लेकिन कहा जाता है कि चूल्हे पर चढ़े भगौने के एक चावल को दबाने से ही पता चल जाता है कि सारे चावल पाक गए हैं या नहीं ।तो मैं कह सकता हूँ कि समीर गांगुली बच्चों के एक पके हुए कथाकार हैं ।जिनके बाल कथा साहित्य की विविधता देखते ही बनती है ।मैंने समीर गांगुली जी के बारे में यह धारणा उनकी मात्र चार किताबें पढ़ कर बनाई है ।कारण मेरे पास उनकी सिर्फ चार किताबें ही उपलब्ध थीं ।1-एक था दाना अनजाना 2-मायावन और धन धना धन 3-मिशन ग्रीन वार 4-रंगीली बुलेट और वीर ।

       


मैंने समीर जी की इन चारों किताबों के आधार पर ही उनके द्वारा अभी तक लिखे गए बाल साहित्य के मूल्यांकन का खतरा भी उठाया है ।यहाँ मैं यह बता देना भी जरूरी समझता हूँ  कि समीर जी की बाल साहित्य की और भी कई किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं ।जिनकी समय समय पर काफी चर्चा भी होती रही है ।देश भर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में भी इनकी ढेरों कहानियां ,कुछ नाटक और अन्य साहित्य भी प्रकाशित होता रहता है ।विज्ञानं कथा लेखन में भी उन्हें महारत हासिल है ।

      


यहाँ मैं सबसे पहले समीर जी की नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित चित्रात्मक कहानी पुस्तक “एक था दाना अनजाना ”की चर्चा करूंगा ।इस किताब में जिस ढंग से एक दूकान में बोरियों में भरे अनाज के दानों,चूहे और गौरैय्या के माध्यम से बरगद के महत्त्व को बताया गया है वह अद्भुत है ।बरगद का नन्हां बीज जिसे दूसरे अनाज के दाने ज्यादा महत्त्व नहीं देते थे क्योंकि वह सबसे छोटा था और उसके बारे में दूसरे अनाजों के दाने जानते भी नहीं थे ।बरगद के उस नन्हें दाने के बारे में जब गौरैय्या ने अन्य दानों को बताया तो सभी अनाज के दानों ने उस अनजाने नन्हें दाने को भी अपना साथी बना लिया ।इस एक छोटी सी पर मजेदार कहानी के माध्यम से लेखक ने बीजों –उनके अंकुरण—पौधा बनाने ---पौधों पर फूल आने—और अंत में फल आकर फिर बीज बनने की प्रक्रिया के चक्र को बहुत खूबसूरती के साथ बयान किया है ।

   


यह कहानी तो बच्चों को आकर्षित और आनंदित करेगी ही साथ ही इस्माइल लहरी द्वारा बनाये गए खूबसूरत चित्र और कवर पेज भी बच्चों को अपनी तरफ  आकर्षित करेंगे ।बच्चे निश्चित रूप से इस कहानी को पूरा पढ़े बिना छोड़ेंगे नहीं ।

          


आमतौर पर हिन्दी भाषा में बच्चों के लिए अर्थ यानि धन से रिलेटेड विषयों यानि बैंक,बाजार,हमारे देश की अर्थव्यवस्था जैसे विषयों को लेकर कहानियां या उपन्यास नहीं  लिखे गए हैं। अन्य भारतीय भाषाओं के बारे में मैं कह नहीं सकता । “माया वन में धन धना धन” समीर गांगुली द्वारा एक ऐसे ही विषय को लेकर लिखा गया उपन्यास है ।दरअस्ल यह बच्चों की एक फैंटेसी है ।जिसके माध्यम से शेयर बाजार,म्युचुअल फंड्स,शेयर की खरीदारी,म्युचुअल फंड में पैसे लगाने ,इन सभी के नफे नुकसान और उनके टेक्नीकल शब्दों आदि की जानकारी बच्चों को दी गई है ।कथा के मुख्य पात्र चार बच्चे –रिया,कोमल,एंडी और कबीर हैं ।जिन्हें एक आभासी कार द्वारा शेयर मार्केट की आभासी दुनिया की सैर कराई  गई है ।और इस सैर के माध्यम से ही रास्ते में उन्हें शेयर मार्केट,म्युचुअल फंड,निवेश,नफ़ा-नुकसान के बारे में बताने की कोशिश की गई है ।

    


समीर जी का यह प्रयास सराहनीय है ।ऐसे विषयों पर भी बच्चों के लिए किताबें लिखी जानी चाहिए ।इस किताब में कहानी को आगे बढ़ने का फार्मेट और भाषा भी काफी सहज है ।कुल मिलकर यह बच्चों  के लिए एक उपयोगी किताब है ।लेकिन मेरा व्यक्तिगत तौर पर यह भी विचार है कि इस उपन्यास में कंटेंट की मात्र बहुत ज्यादा है ।अब बच्चे इस कंटेंट में से कितना समझ सकेंगे कितना नहीं,कितना वो ग्रहण कर सकेंगे ये तो कुछ बच्चों को यह किताब पढ़वाकर उनका फीड बैक लेकर ही पता लगाया जा सकता है ।पूरी किताब एक तरह से देखा जाय तो प्रश्नोत्तर शैली में ही लिखी गई है ।इसमें आभासी कार में बैठे बच्चे हर नई चीज देख कर उसके बारे में प्रश्न पूछ रहे और उनके साथ गई गाइड उनके हर प्रश्न का उत्तर देकर उन्हें समझा रही ।मुझे लगता है समीर जी ने यदि इस उपन्यास में कंटेंट की मात्रा बीस प्रतिशत और मनोरंजन की मात्रा अस्सी प्रतिशत रखी होती तो शायद यह किताब बच्चों के लिए और बेहतर बन सकती थी ।

       


“मिशन ग्रीन वार” की यदि हम बात करें तो यह एक बेहतरीन वैज्ञानिक उपन्यास है ।यह ख़ुशी की बात है कि अभी हाल में ही हरिकृष्ण देवसरे न्यास द्वारा  समीर जी को इसी उपन्यास के लिए “डा०हरिकृष्ण देवसरे “पुरस्कार देकर सम्मानित भी किया जा रहा है।

       


इस उपन्यास में बाल और किशोर पाठकों को वर्त्तमान समय की  खेती में होने वाली समस्याओं से रूबरू कराया गया है ।साथ ही बच्चों को भविष्य में होने वाली खेती,उसमें इस्तेमाल होने वाली अनोखी तकनीकों,उनके प्रयोग से होने वाले फायदों को भी बताया गया है ।



उपन्यास की पूरी कथा वास्तु इसके मुख्या पात्रों—नरेश ,जुबिन, मोहन, शास्त्री सर,बैनर्जी सर,गौरी जोशी,अर्जुन आदि के इर्द गिर्द घूमती है ।इस उपन्यास में बच्चों,किशोरों के लिए रहस्य, रोमांच, उत्सुकता –यानि एक बाल उपन्यास के सभी तत्व मौजूद हैं ।कृषि कालेज से शुरू होकर उपन्यास की कहानी में कई उतर चढाव,कई मोड़ आते हैं और अंत में फिर कृषि कालेज पहुँच कर उपन्यास की कहानी पूरी होती है ।बीच में घटित होने वाली घटनाएँ बच्चों के अन्दर आगे की कहानी पढ़ने की उत्सुकता तो जगाती हैं साथ ही उन्हें रोमांच भी प्रदान करती हैं ।उपन्यास की भाषा शैली बहुत सरल,सहज और प्रवाहमय है ।निश्चित ही समीर जी का यह उपन्यास बाल और किशोर पाठकों को पढ़ने में आनंद आएगा ।

      


यहाँ मैं समीर जी द्वारा लिखे गए एक और मजेदार उपन्यास की चर्चा करूंगा ।ये उपन्यास है भारत सरकार के प्रकाशन विभाग द्वारा प्रकाशित “रंगीली बुलेट और वीर” ।यह अद्भुत उपन्यास है ।इसका मुख्य पात्र है वीर जो मुम्बई से गरमी की एक महीने की छुट्टियाँ बिताने अपने पापा मम्मी के साथ अपने दद्दू फ़ौज से रिटायर्ड ब्रिगेडियर के पास देहरादून के एक गांव में जाता है ।वीर के मम्मी पापा तो एक हफ्ते बाद वहां से वापस लौट गए ।लेकिन वीर पूरे एक महीने तक उस खूबसूरत गांव में रहता है ।

       


इस पूरे एक माह के प्रवास के दौरान उसने वहां बहुत कुछ देखा बहुत कुछ समझा ।उसने देखा कि ब्रिगेडियर साहब ने किस तरह गांव वालों के सहयोग से उस गांव को एक साफ़ सुथरा आदर्श गांव बना दिया था । उस गांव में वीर के कई नए दोस्त भी बने ---रंगीली चिड़िया,बुलेट जैसा समझदार कुत्ता ,बातूनी पेड़,मेढक,टिड्डे और भी बहुत से ।वीर रोज सबेरे सबेरे बुलेट और रंगीली के साथ गांव घूमने जाता ।अपने दोस्तों के साथ रोज के इस भ्रमण के दौरान भी उसने बहुत कुछ देखा बहुत कुछ समझा ।हेलीकाप्टर “ड्रैगनफ्लाई”,की मजेदार उड़ान,कीट पतंगों का नाच ,गाना,बजाना,उड़ने वाले मेढक और मछलियाँ,बंदरों की सभा,इन सभी के साथ गाँव का पारंपरिक मेला भी ।इन सब में वीर को मजा,आनंद तो आया ही साथ ही बहुत सी सीख भी मिली ।

     


प्रकृति से प्रेम करने ,उसका संरक्षण करने,वन्य जीवों ,कीट –पतंगों के प्रति दया और मित्रता का भाव रखने,पालतू जानवरों से मित्रता भाव रखने जैसी सीख ।कुल मिलाकर समीर गांगुली की यह किताब भी निश्चित रूप से बच्चों को आनंदित करने के साथ ही बहुत कुछ सिखाएगी  भी ।

  


समीर गांगुली की तीन किताबें और भी मेरी आलमारी से झाँक रही हैं ।1-जेड जुइंग की डायरी 2- घड़ी घर के समय प्रहरी 3- एक गुलाबी भैंसा अलग सा ।ये तीनों ही किताबें फ्लाईड्रीम पब्लिकेशन से प्रकाशित हुई हैं ।लेकिन अभी मैं इन्हें पढ़ नहीं सका हूँ ।इसलिए इन पर चर्चा आगे कभी करूंगा ।



समीर गांगुली की अन्य किताबें भले ही अभी तक मैं पढ़ नहीं पाया हूँ लेकिन पढूंगा तो जरुर ही ।फिलहाल यह कहने में मुझे कोई संकोच नहीं कि समीर गांगुली के सम्पूर्ण बाल साहित्य के लेखन में विषयों की जो विविधता ,जो प्रयोगधर्मिता और नवाचार दिखाई पड़ता है ।वह आज के समय के कम बाल साहित्य लेखकों में देखने को मिलता है ।उनकी किताबें “एक था दाना अनजाना” हो या फिर “मिशन ग्रीन वार”, “रंगीली बुलेट और वीर”,या फिर “माया वन में धन धना धन” ---सभी किताबें लीक से हटकर एकदम नए नए विषयों पर लिखी गई कथा पुस्तकें हैं।आशा है समीर गांगुली भविष्य में भी ऐसी ही प्रयोगधर्मिता अपनाते हुए अनछुए विषयों को अपने बाल कथा साहित्य में स्थान देकर बाल साहित्य को समृद्ध करते रहेंगे ।



०००



डा०हेमन्त कुमार



9451250698

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बच्चों को जरूर पढाएं ये किताब

गुरुवार, 6 नवंबर 2025

 

बच्चों को जरूर पढाएं ये किताब




पुस्तक : चिड़ियाँ पिकनिक करने आईं



(बाल कविता संग्रह)



कवयित्री :रोचिका अरुण शर्मा



प्रकाशक : जी एस पब्लिशर डिस्ट्रीब्यूटर्स



नवीन शाहदरा,नई दिल्ली -110032



हिंदी में यदि सबसे ज्यादा किसी विधा में  लेखन हो रहा है तो वह कविता में ।चाहे वह मुख्य धारा का साहित्य हो या फिर बाल साहित्य ।लेकिन दिक्कत वाली बात यह है कि हिंदी बाल साहित्य में बाल कविताएं काफी प्रचुर मात्र में लिखी जाने के बावजूद बाल कविताओं की किताबें बहुत कम छपती हैं ।बाल कविताएं सिर्फ अख़बारों के या पत्रिकाओं के पन्ने पर अधिक दिखती हैं। या पुस्तकाकार छपती भी हैं तो प्रोडक्शन की दृष्टि से बहुत स्तरीय नहीं होतीं। क्योंकि प्रकाशक उन किताबों में कवर तो आकर्षक लगा देते हैं लेकिन अन्दर के पृष्ठों पर सिर्फ टेक्स्ट या बाल कविताएं ही रहती हैं ।कोई  रंगीन चित्र या रेखांकन नहीं ।और कविताएं भी छोटे फांट साइज में ।जबकि बाल कविताओं के पाठक के लिए तो रंग बिरंगे चित्रों वाली खूबसूरत किताबें होनी चाहिए ।फांट साइज भी बड़ा होना चाहिए।लेकिन दुखद स्थिति यह है कि कोई प्रकाशक बाल कविताओं की किताबों पर चित्रांकन कराने के लिए पैसा खर्च नहीं करना चाहते।

   


इधर मेरे पास कुछ बाल कविताओं की किताबें भी आई हैं ।इनमें से एक है “चिड़ियाँ पिकनिक करने आईं” ।इस बाल कविता संकलन की कवयित्री हैं पेशे से इंजिनियर रोचिका अरुण शर्मा ।रोचिका की कहानियां तो मैंने बहुत पढ़ी हैं बच्चों की भी बड़ों की भी ।लेकिन उनकी बाल कविताओं से परिचय इस संकलन के माध्यम से ही हुआ ।

      


“चिड़ियाँ पिकनिक करने आईं” संकलन देखा कर ही लगता है कि इसमें कवयित्री,चित्रकार और प्रकाशक तीनों ने ही मेहनत की है ।यही कारण है कि प्रोडक्शन की दृष्टि से यह एक सुन्दर किताब के रूप में बाल पाठकों के लिए तैयार हुई है ।संभवतः इसीलिए मैं भी पहले इस किताब की कविताओं के बारे में बात न करके पहले इसकी खूबसूरती की ही चर्चा कर रहा ।

    


प्रोडक्शन की दृष्टि से इस किताब की सबसे बड़ी विशेषता है –हर कविता के सामने बने हुए ब्लैक एंड व्हाईट या श्वेत श्याम रेखांकन या चित्र ।साथ ही कविताओं की बड़ी फांट साइज ।ये चित्र किताब को आकर्षक तो बना ही रहे उससे बड़ी बात एक और है कि ये चित्र बच्चों को भी कुछ क्रिएटिव करने का स्पेस दे रहे ।रोचिका जी से बात होने पर उन्होंने इस ओर इंगित भी किया कि सभी चित्र इस हिसाब से बनाए गए हैं कि बच्चे उनमें अपने हिसाब से मनचाहा रंग भी भर सकें ।साथ ही किताब के अंत में दो पेज बच्चों के लिए छोड़ा भी गया है जिसमें वो भी चाहें तो ऐसी ही कोई कविता या कुछ और लिख सकते हैं । इस तरह से देखा जाय तो बाल गीतों की यह किताब बच्चों के लिए एक अच्छी एक्टिविटी बेस्ड किताब कही जा सकती है । यद्यपि इस बात का उल्लेख किताब में कहीं नहीं किया गया है जबकि किताब के शुरू में या अंत में बच्चों के लिए इस तरह का निर्देश दिया जा सकता था ।इसे मैं पुस्तक की कमी नहीं कहूँगा क्योंकि आगे इसका रीप्रिंट होने पर बच्चों के लिए यह निर्देश किताब के शुरू में ही कहीं दी जा सकते हैं ।

    


जहां तक कविताओं की बात है तो इस बाल कविता संकलन में रोचिका अरुण शर्मा की कुल तीस कविताएं संकलित हैं ।रोचिका की इन कविताओं में वह सब कुछ है जो बच्चों को पसंद आएगा ।इनकी कविताओं में बच्चों का प्रिय खेल है,समाज है,परिवार है,मानवीय रिश्ते हैं,प्रकृति है,जीव जंतु हैं,बाल मनोभाव हैं और भी बहुत कुछ ऐसा जो बच्चों को आनंदित करेगा,गुनगुनाने को प्रेरित करेगा और कहीं कहीं उन्हें गुदगुदाएगा भी ।वैसे तो “चिड़ियाँ पिकनिक करने आईं ”संकलन की सभी कविताएं बाल मनोभावों के अनुकूल हैं और उन्हें आनंद भी देंगी ।लेकिन मैं यहां रोचिका अरुण शर्मा की कुछ कविताओं का उल्लेख करना चाहूँगा ।

    


इस संकलन की पहली ही कविता है “मेरी मां” ।मां के लिए बच्चों की तरफ से यह बेहतरीन अभिव्यक्ति है –रोचिका जी की इस अभिव्यक्ति की बानगी इन पंक्तियों में देखी  जा सकती है ---




गिरूँ तो धूल पोंछे वो,खड़ा करती पकड़ बाहें



मुझे निस दिन निखारे वो,सुझाए नित नई राहें।

    



आज बच्चे इस कदर स्कूली बस्ते के बोझ,कंप्यूटर,मोबाइल में उलझते जा रहे हैं कि उनका बचपन खेलों की मौज मस्ती कहीं गुम होती जा रही है ।संकलन की एक कविता “आँख मिचौली” ऐसे ही एक पारंपरिक खेल के बारे में बच्चों को बताने के साथ ही कविता के माध्यम से इस पारंपरिक खेल को बचाने की भी कोशिश कही जा सकती है ।इसी कविता की ये पंक्तियाँ देखिए –



आओ खेलें आँख मिचौली,बांधो आंखों पर पट्टी



पास जो आए उसको छू लूँ भूलूं सब झगड़ा कट्टी।  

       



इसी तरह “दादा जी की ऐनक” संयुक्त परिवार ,रिश्तों और परिवार की गर्माहट,खुशियों और सार्थकता को बताने वाली एक खूबसूरत कविता है ।बच्चों को स्कूल के दिनों के बीच में मिलने वाली छुट्टियों से बहुत प्यार होता है ।स्कूलों में जब छुट्टियां होनी होती हैं तो बच्चे पहले से ही उन छुट्टियों को बेहतरीन और मजेदार ढंग से बिताने की योजना बनाने लगते हैं ।बच्चों की ऎसी ही योजनाओं की अभिव्यक्ति “छुट्टियाँ आई हैं” कविता की इन पंक्तियों में देखी जा सकती हैं---



“नाना नानी बुला रहे हैं,अरे छुट्टियाँ आई हैं



बड़ी बुआ मिलने को आईं खूब खिलौने लाई हैं ।



दादी जी का मुखड़ा चमका,चाचा-चाची भी आओ



दादा जी ने मूंछे तानीं पोते पोती दिखलाओ ।”

 



इस कविता में बच्चों की छुट्टियां बिताने के आनंद के साथ ही पूरे संयुक्त परिवार की महाता और खुशियों को भी रेखांकित किया गया है ।

 


इसी ढंग की कुछ और उल्लेखनीय कविताएं इस संकलन में हैं ।“अनुशासन रख लूंगा” कविता में बच्चा खुद अपने मां बाप से कह रहा की मोबाइल के साथ वो समय का ताल मेल बना कर चलेगा और समय का सदुपयोग करेगा । “मेहनत का फल” कविता के माध्यम से कवयित्री ने बच्चों को कृषि के प्रति जागरूक करने के साथ ही श्रम के महत्त्व को भी बताया है ।“रबर-पेन्सिल” कविता में रबर पेन्सिल की लड़ाई या कहें वर्चस्व की लड़ाई निश्चित ही बाल मन को भाएगी ।

  


संकलन की जिन दो अन्य महत्वपूर्ण कविताओं का उल्लेख करना जरूरी है और जिनके बिना इस किताब की चर्चा अधूरी रह जाएगी ।वो कविताएं हैं—“चिड़ियाँ पिकनिक करने आईं” और दूसरी कविता  “किसने रीत बनाई” । “चिड़ियाँ पिकनिक करने आईं” में जहां बच्चों को प्रदूषण और पर्यावरण के बारे में बताया गया है वहीं यह भी बताया गया है कि आज हमारे चारों और की हवा इतनी प्रदूषित और गंदी हो रही कि आदमी क्या पशु-पक्षियों को भी पर्यावरण के इस प्रदूषण के गंभीर परिणाम भुगतने पड़ रहे हैं ।कविता की शुरू की ही पंक्तियों में हम यह देख समझ सकते हैं—



“सारी चिड़ियाँ गईं कहां पर नजर कहीं ना आएं



रोज जगाती गीत सुना कर ना चहकें ना गाएं ।



बंटू ने खिड़की से झांका बाहर धुंआ-धुंआ है



कोको भी तो खांस रहा है भौंके चुआं चुआं है ।”




इसी तरह “किसने रीत बनाई” कविता में पारंपरिक पहनावे को बताते हुए बच्चों के मन में उठने वाले प्रश्नों को भी जगह दी गई है –



“मम्मी,दीदी,दादी क्यों ना मनमौजी सी होतीं



जो जी चाहे वही पहनतीं जबरन रीत न ढोतीं ।”



एक तरह से देखा जाय तो पहनावे के माध्यम से इस कविता में बालक-बालिका में किए जा रहे भेद को भी उठाया गया है ।बच्चे के मन में भी प्रश्न उठते हैं कि आखिर पहनावे के मामले में सारी छूट लड़कों या पुरुषों को ही क्यों दी जा रही ? दीदी,दादी,मम्मी को क्यों नहीं ?वो अपनी मन पसंद कपड़े क्यूं नहीं पहन सकतीं ?



रोचिका अरुण शर्मा के इस संकलन की सभी कविताएं बच्चों के लिए पठनीय तो हैं हीं और वो बच्चों को आनंदित,आह्लादित करने के साथ ही उन्हें प्रकृति,जीव जंतुओं,मानव जीवन,पर्यावरण,मानवीय रिश्तों ,पारंपरिक  खेलों के प्रति निश्चित ही संवेदनशील भी बनाएंगी ।साथ ही उन्हें किताब के खूबसूरत चित्रों को अपने मनचाहे रंगों में रंगने का भी मौक़ा मिलेगा,अपने मन की कुछ कविताओं को किताब के अंतिम दो पृष्ठों पर शब्दांकित करने का भी अवसर मिलेगा ।बशर्ते इस खूबसूरत किताब के अगले रीप्रिंट में बच्चों के लिए ही एक छोटा सा निर्देश भी दिया जाय ।कवयित्री रोचिका अरुण शर्मा जी के साथ ही चित्रकार दिलीप शर्मा जी और प्रकाशक को बहुत बधाई ।



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समीक्षक : डा0 हेमन्त कुमार

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. ‘देख लूं तो चलूं’ "आदिज्ञान" का जुलाई-सितम्बर “देश भीतर देश”--के बहाने नार्थ ईस्ट की पड़ताल “बखेड़ापुर” के बहाने “बालवाणी” का बाल नाटक विशेषांक। “मेरे आंगन में आओ” ११मर्च २०१९ ११मार्च 1mai 2011 2019 अंक 48 घण्टों का सफ़र----- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अक्षत अण्डमान का लड़का अनुरोध अनुवाद अपराध अपराध कथा अभिनव पाण्डेय अभिभावक अमित तिवारी अम्मा अरविन्द दुबे अरुणpriya अर्पण पाण्डेय अर्पणा पाण्डेय। अशोक वाटिका प्रसंग अस्तित्व आज के संदर्भ में कल आतंक। आतंकवाद आत्मकथा आनन्द नगर” आने वाली किताब आबिद सुरती आभासी दुनिया आश्वासन इंतजार इण्टरनेट ईमान उत्तराधिकारी उनकी दुनिया उन्मेष उपन्यास उपन्यास। उम्मीद के रंग उलझन ऊँचाई ॠतु गुप्ता। एक टिपण्णी एक ठहरा दिन एक तमाशा ऐसा भी एक बच्चे की चिट्ठी सभी प्रत्याशियों के नाम एक भूख -- तीन प्रतिक्रियायें एक महत्वपूर्ण समीक्षा एक महान व्यक्तित्व। एक संवाद अपनी अम्मा से एल0ए0शेरमन एहसास ओ मां ओडिया कविता ओड़िया कविता औरत औरत की बोली कंचन पाठक। कटघरे के भीतर कटघरे के भीतर्। कठपुतलियाँ कथा साहित्य कथाकार समीर गांगुली कथावाचन कर्मभूमि कला समीक्षा कलाकार कविता कविता। कविताएँ कवितायेँ कहां खो गया बचपन कहां पर बिखरे सपने--।बाल श्रमिक कहानी कहानी कहना कहानी कहना भाग -५ कहानी सुनाना कहानी। काफिला नाट्य संस्थान काल चक्र काव्य काव्य संग्रह किताबें किताबों में चित्रांकन किशोर किशोर शिक्षक किश्प्र किस्सागोई कीमत कुछ अलग करने की चाहत कुछ लघु कविताएं कुपोषण कैंसर-दर-कैंसर कैमरे. कैसे कैसे बढ़ता बच्चा कौशल पाण्डेय कौशल पाण्डेय. कौशल पाण्डेय। क्षणिकाएं क्षणिकाएँ खतरा खेत आज उदास है खोजें और जानें गजल ग़ज़ल गर्मी गाँव गीत गीतांजलि गिरवाल गीतांजलि गिरवाल की कविताएं गीताश्री गुलमोहर गौरैया गौरैया दिवस घर में बनाएं माहौल कुछ पढ़ने और पढ़ाने का घोसले की ओर चिक्कामुनियप्पा चिडिया चिड़िया चिड़ियाँ पिकनिक करने आईं चित्रकार चुनाव चुनाव और बच्चे। चौपाल छिपकली छोटे बच्चे ---जिम्मेदारियां बड़ी बड़ी जज्बा जज्बा। जन्मदिन जन्मदिवस जयश्री राय। जयश्री रॉय। जागो लड़कियों जाडा जात। जाने क्यों ? जेठ की दुपहरी टिक्कू का फैसला टोपी ठहराव ठेंगे से डा० शिवभूषण त्रिपाठी डा0 हेमन्त कुमार डा०दिविक रमेश डा0दिविक रमेश। डा0रघुवंश डा०रूप चन्द्र शास्त्री डा0सुरेन्द्र विक्रम के बहाने डा0हेमन्त कुमार डा0हेमन्त कुमार। डा0हेमन्त कुमार्। डॉ.ममता धवन डोमनिक लापियर तकनीकी विकास और बच्चे। तपस्या तलाश एक द्रोण की तितलियां तीसरी ताली तुम आए तो थियेटर दरख्त दरवाजा दशरथ प्रकरण दस्तक दिशा ग्रोवर दुनिया का मेला दुनियादार दूरदर्शी देश दोहे द्वीप लहरी नई किताब नई पत्रिका नदी किनारे नया अंक नया तमाशा नयी कहानी नववर्ष नवोदित रचनाकार। नागफ़नियों के बीच नारी अधिकार नारी विमर्श निकट नित्या नित्या शेफाली नित्या शेफाली की कविताएं नियति निवेदिता मिश्र झा निषाद प्रकरण। नेता जी नेता जी के नाम एक बच्चे का पत्र(भाग-2) नेहा शेफाली नेहा शेफ़ाली। पढ़ना पतवार पत्रकारिता-प्रदीप प्रताप पत्रिका पत्रिका समीक्षा परम्परा परिवार पर्यावरण पहली बारिश में पहले कभी पहले खुद करें–फ़िर कहें बच्चों से पहाड़ पाठ्यक्रम में रंगमंच पार रूप के पिघला हुआ विद्रोह पिता पिता हो गये मां पिताजी. पितृ दिवस पुण्य तिथि पुण्यतिथि पुनर्पाठ पुरस्कार पुस्तक चर्चा पुस्तक समीक्षा पुस्तक समीक्षा। पुस्तकसमीक्षा पूनम श्रीवास्तव पेंटिंग्स पेड़ पेड़ बनाम आदमी पेड़ों में आकृतियां पेण्टिंग प्यारा कुनबा प्यारी टिप्पणियां प्यारी लड़की प्यारे कुनबे की प्यारी कहानी प्रकृति प्रताप सहगल प्रतिनिधि बाल कविता -संचयन प्रथामिका शिक्षा प्रदीप सौरभ प्रदीप सौरभ। प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक शिक्षा। प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव। प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव. प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव। प्रेरक कहानी फ़ादर्स डे।बदलते चेहरे के समय आज का पिता। फिल्म फिल्म ‘दंगल’ के गीत : भाव और अनुभूति फ़ेसबुक बंकू बंधु कुशावर्ती बखेड़ापुर बचपन बचपन के दिन बच्चे बच्चे और कला बच्चे का नाम बच्चे का स्वास्थ्य। बच्चे पढ़ें-मम्मी पापा को भी पढ़ाएं बच्चे। बच्चों का विकास और बड़ों की जिम्मेदारियां बच्चों का आहार बच्चों का विकास बच्चों को गुदगुदाने वाले नाटक बच्चों को जरूर पढाएं ये किताब बदलाव बया बहनें बाघू के किस्से बाजू वाले प्लाट पर बादल बारिश बारिश का मतलब बारिश। बाल अधिकार बाल अपराधी बाल दिवस बाल नाटक बाल पत्रिका बाल मजदूरी बाल मन बाल रंगमंच बाल विकास बाल साहित्य बाल साहित्य प्रेमियों के लिये बेहतरीन पुस्तक बाल साहित्य समीक्षा। बाल साहित्यकार बालवाटिका बालवाणी बालश्रम बालिका दिवस बालिका दिवस-24 सितम्बर। बीसवीं सदी का जीता-जागता मेघदूत बूढ़ी नानी बेंगाली गर्ल्स डोण्ट बेटियां बैग में क्या है ब्लाइंड स्ट्रीट ब्लाग चर्चा भजन भजन-(7) भजन-(8) भजन(4) भजन(5) भजनः (2) भद्र पुरुष भयाक्रांत भारतीय रेल मंथन मजदूर दिवस्। मदर्स डे मनीषियों से संवाद--एक अनवरत सिलसिला कौशल पाण्डेय मनोविज्ञान महुअरिया की गंध मां माँ मां का दूध मां का दूध अमृत समान माझी माझी गीत मातृ दिवस मानस मानस रंजन महापात्र की कविताएँ मानस रंजन महापात्र की कवितायेँ मानसी। मानोशी मासूम पेंडुकी मासूम लड़की मिशन ग्रीन वार मुंशी जी मुद्दा मुन्नी मोबाइल मूल्यांकन मेरा दोस्त मेरा नाम है मेराज आलम मेरी अम्मा। मेरी कविता मेरी रचनाएँ मेरे मन में मोइन और राक्षस मोनिका अग्रवाल मौत के चंगुल में मौत। मौसम यात्रा यादें झीनी झीनी रे युवा युवा स्वर रंग बिरंगी दुनिया रंगबाज रंगबाजी करते राजीव जी रस्म मे दफन इंसानियत राजीव मिश्र राजेश्वर मधुकर राजेश्वर मधुकर। राधू मिश्र रामकली रामकिशोर रिपोर्ट रिमझिम पड़ी फ़ुहार रूचि रोचिका शर्मा लखनऊ लगन लघुकथा लघुकथा। लड़कियां लड़कियां। लड़की लालटेन चौका। लिट्रेसी हाउस लू लू की सनक लेख लेख। लेखसमय की आवश्यकता लोक चेतना और टूटते सपनों की कवितायें लोक संस्कृति लोकार्पण लौटना वनभोज वनवास या़त्रा प्रकरण वरदान वर्कशाप वर्ष २००९ वह दालमोट की चोरी और बेंत की पिटाई वह सांवली लड़की वाल्मीकि आश्रम प्रकरण विकास विचार विमर्श। विज्ञानं बाल कविताएँ विश्व पुतुल दिवस विश्व फोटोग्राफी दिवस विश्व फोटोग्राफी दिवस. विश्व रंगमंच दिवस व्यंग्य व्यक्तित्व व्यन्ग्य शक्ति बाण प्रकरण शब्दों की शरारत शाम शायद चाँद से मिली है शिक्षक शिक्षक दिवस शिक्षक। शिक्षा शिक्षालय शैलजा पाठक। शैलेन्द्र श्र प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव स्मृति साहित्य प्रतियोगिता श्रद्धांजलि श्रीमती सरोजनी देवी संजा पर्व–मालवा संस्कृति का अनोखा त्योहार संदेश संध्या आर्या। संवाद जारी है संसद संस्मरण संस्मरण। सड़क दुर्घटनाएं सन्ध्या आर्य सन्नाटा सपने दर सपने सफ़लता का रहस्य सबरी प्रसंग सभ्यता समय समर कैम्प समाज समीक्षा समीक्षा। समीर गांगुली समीर लाल। सर्दियाँ सांता क्लाज़ साक्षरता निकेतन साधना। सामायिक सारी रात साहित्य अमृत सीता का त्याग.राजेश्वर मधुकर। सुनीता कोमल सुरक्षा सूनापन सूरज सी हैं तेज बेटियां सोन मछरिया गहरा पानी सोशल साइट्स स्तनपान स्त्री विमर्श। स्मरण स्मृति स्वतन्त्रता। हंस रे निर्मोही हक़ हादसा हादसा-2 हादसा। हाशिये पर हिन्दी का बाल साहित्य हिंदी कविता हिंदी बाल साहित्य हिन्दी ब्लाग हिन्दी ब्लाग के स्तंभ हिम्मत हिरिया हेमन्त कुमार होलीनामा हौसला accidents. 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