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प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार और कहानीकार प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी के 90वें जन्मदिवस पर हुआ “बालवाटिका” पत्रिका का लोकार्पण

मंगलवार, 12 मार्च 2019


     प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार और कहानीकार प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी के 90वें जन्मदिवस पर  हुआ “बालवाटिका” पत्रिका का लोकार्पण

                श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव हिंदी के प्रतिष्ठित कहानीकार,लेखक और बालसाहित्यकार हैं।दिनांक 11मार्च को उनका 90वां जन्मदिन हिंदी के प्रतिष्ठित दैनिक “जन्संदेश टाइम्स” लखनऊ के सभाकक्ष में मनाया गया।इस अवसर पर भीलवाड़ा,राजस्थान से प्रकाशित बच्चों की स्थापित पत्रिका ”बालवाटिका” के श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव पर केन्द्रित मार्च-2019 अंक का लोकार्पण भी संपन्न हुआ।इस अवसर पर लखनऊ एवं कानपुर के बालसाहित्यकार,पत्रकार एवं प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव के पाठक एवं प्रशंसक मौजूद थे।
                                 
   
         दीप प्रज्ज्वलन एवं श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी की तस्वीर पर माल्यार्पण के पश्चात  उपस्थित समस्त अतिथियों ने “बालवाटिका” पत्रिका का लोकार्पण किया।
         कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कानपुर से आये वरिष्ठ बाल साहित्यकार कौशल पाण्डेय ने प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी के बाल साहित्य के प्रति सपर्पण की बात बताते हुए कहा कि “प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी का 1950 से शुरू हुआ लेखन जीवन पर्यंत चलता रहा।उन्होंने बड़ों की  कहानी,रेडियो नाटकों के लेखन के साथ ही प्रचुर मात्रा में बाल साहित्य भी लिखा।उनकी 50से ज्यादा किताबें भी प्रकाशित हुयी लेकिन उन्होंने जीवन में न ही कभी किसी प्रकाशक से किताबें छापने का अनुरोध किया न ही किसी समीक्षक,आलोचक से अनुरोध किया कि वो उनकी किताबों की समीक्षा करे या उस पर टिप्पणी लिखे।न ही किसी रंगकर्मी से अपने नाटकों के मंचन की बात कही। इस मामले में प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी साहित्य के प्रति पूरी तरह से समर्पित और स्वाभिमानी  व्यक्तित्व वाले लेखक थे।”

    इस अवसर पर बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि डा० सुभाष राय ने “बालवाटिका” पत्रिका की चर्चा करते हुए कहा कि “बालवाटिका” का बाल साहित्यकारों के समग्र जीवन को पाठकों से जोड़ने का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है।उन्होंने पत्रिका में प्रकाशित प्रेमस्वरूप जी की बात का उदाहरण देते हुए कहा कि ”पत्रिका में डा० हेमन्त कुमार ने इस बात का उल्लेख किया है कि प्रेमस्वरूप जी कहा करते थे कि “अगर उनका लेखन ख़तम हो गया तो जीवन का क्या मतलब?” यानि लेखन को उन्होंने जीवन से जोड़ा।उसे ही अपनी जीवनधारा माना।

   सुभाष राय ने कहा कि लिखना यदि जीवन से जुड़ा हो तो वो लिखना किसी भी साहित्यकार का हो वह बहुत महत्वपूर्ण है।इसी बात को आगे बढाते हुए उन्होंने  ने यह भी कहा कि लेखक का लिखा हुआ पाठक तक पहुँचना चाहिए तभी उस लेखन की सार्थकता है।डा० राय ने हरिशंकर परसाई जी का उदाहरण देते हुए बताया कि वो अपनी अप्रकाशित रचनाओं की कई प्रतियाँ बना कर थैले में रखते थे और उसे मुफ्त ही लोगों को पढने के लिए देते थे।
     
प्रसिद्ध रंगकर्मी मेराज आलम ने कहा कि हम सभी को अपने अन्दर के बच्चे को जीवित और सक्रिय रखना होगा तभी हम पाठक को अच्छा बाल साहित्य और नाटक दे सकेंगे और बाल रंगमंच को सार्थक दिशा भी दे सकेंगे।कानपुर से आयी प्रसिद्ध बाल साहित्यकार और बाल मनोविज्ञान की  पारखी  अर्पणा पाण्डेय ने प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी के जीवन से जुड़े कई रोचक संस्मरण सुना कर उनकी स्मृतियों को ताजा किया।प्रतिष्ठित बालसाहित्यकार,कहानीकार और उपन्यासकार संजीव जायसवाल ने प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी को प्रौढ़ों और बच्चों का पुरोधा साहित्यकार बताते हुए उनके प्रसिद्ध बाल उपन्यास “मौत के चंगुल में” का उल्लेख किया और कहा कि उनका यह उपन्यास बालसाहित्य के पाठकों के लिए अभूतपूर्व देन है।

       अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में प्रतिष्ठित बालसाहित्य समीक्षक और आलोचक श्री बंधु कुशावर्ती ने कहा कि प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी मूलतः कहानीकार और नाटककार हैं और 1964 में इलाहाबाद आने के पहले वो खुद को एक कहानीकार के रूप में प्रतिष्ठित कर चुके थे।1964 में शिक्षा प्रसार विभाग के फिल्म प्रोडक्शन सेक्शन में स्क्रिप्ट राइटिंग से जुड़ने के बाद से ही उन्होंने बाल साहित्य लेखन भी शुरू किया और रेडियो पर बाल कहानियों नाटकों के अलावा तत्कालीन सभी पत्र पत्रिकाओं में बाल कहानियाँ लिखना  शुरू किया।बाद के समय में उन्होंने अपना अधिकाँश लेखन बच्चों के लिए किया।और बाल साहित्य लेखन में उन्होंने खुद को उसी तरह स्थापित किया जिस तरह बड़ों की कहानियों के लेखन में किया था।
   बंधुजी ने बताया कि सन 1964 का समय वह समय था जब सरकारी स्तर पर भी अच्छे बाल साहित्य लेखन के लिए प्रयास किये जा रहे थे तथा श्री संपूर्णानंद जी के मुख्यमंत्रित्व काल में इस दिशा  में काफी काम भी हुआ।शिक्षा विभाग द्वारा भी बाल पत्रिकाओं का प्रकाशन शुरू किया गया।संभवतः शिक्षा विभाग में नौकरी करने और प्राथमिक शिक्षा विभाग द्वारा हो रहे प्रयासों से प्रभावित हो कर ही प्रेमस्वरूप जी का रुझान बाल साहित्य लेखन की तरफ बढ़ा और उन्होंने जीवन पर्यंत बाल साहित्य को समृद्ध किया।बंधू कुशावर्ती ने बताया कि प्रेमचंद के सम्पूर्ण साहित्य को एकत्रित करने और उसे पाठकों तक पहुँचाने में उनके पुत्र अमृत राय का बहुत बड़ा योगदान है। प्रेमचंद के लिए जो काम अमृत राय ने किया था वही काम प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव के साहित्य को पाठकों तक पहुंचाने के लिए आज डा०हेमन्त कुमार कर रहे हैं।  
       प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव के पुत्र और बाल साहित्यकार डा० हेमन्त कुमार ने प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी से जुड़ी यादों को साझा करने के साथ ही “बालवाटिका” के सम्पादक डा० भैंरूलाल गर्ग जी एवं प्रतिष्ठित बालसाहित्यकार एवं बालसाहित्य इतिहास लेखक डा० प्रकाश मनु जी के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया जिनके प्रयासों से “बालवाटिका” का प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी पर केन्द्रित यह अंक प्रकाशित हो सका।कार्यक्रम के अंत में प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार अखिलेश श्रीवास्तव चमन ने श्रीवास्तव जी के बाल साहित्य लेखन परम्परा को आगे बढाने के लिए डा० हेमन्त को बधाई देने के साथ सभी आगंतुक अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया।
           इस कार्यक्रम में वरिष्ठ कवि,लेखक भगवान स्वरूप कटियार, बाल साहित्यकार पूनम श्रीवास्तव,डा० शीला पाण्डेय,पर्यावरण के प्रसिद्ध फिल्मकार श्री चिक्का मुनियप्पा,शैक्षिक दूरदर्शन की साउंड इंजीनियर सुधाश्री,प्रसिद्ध युवा कवयित्री एवं गायिका डा०प्रीति गुप्ता,रेडियो उद्घोषिका और कलाकार शिखा दुबे,युवा बाल गीतकार नित्या शेफाली ने उपस्थित होकर कार्यक्रम की गरिमा बढाई साथ ही प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव के जन्मदिवस पर आयोजित इस कार्यक्रम को सफल बनाया।
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डा० हेमन्त कुमार
मोबाइल—9451250698   
                          
         

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प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव स्मृति साहित्य प्रतियोगिता एवं पुरस्कार वितरण

सोमवार, 31 जुलाई 2017

          आज दिनांक 31 जुलाई 2017 को प्रतिष्ठित बालसाहित्यकार श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी की पहली पुण्य तिथि है।उनकी स्मृति में पिछले दिनों प्रतिष्ठित संस्था  सेवा संकल्प  द्वारा विबग्योर हाई स्कूल,गोमती नगर,लखनऊ के बच्चों के लिए एक साहित्य प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था।आज इस साहित्य प्रतियोगिता के प्रतिभागी विबग्योर हाई स्कूल के समस्त छात्र-छात्राओं को स्कूल परिसर में सेवा संकल्प द्वारा आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में पुरस्कार स्वरूप साहित्यिक किताबें,मूमेंटो एवं प्रमाण पत्र वितरित किया गया।बच्चों को ये पुरस्कार जनसन्देश टाइम्स के प्रधान संपादक डा०सुभाष राय और प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार बंधु कुशावर्ती के कर कमलों द्वारा वितरित किया गया।
                        कार्यक्रम की शुरुआत श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी की तस्वीर पर
आगंतुक अतिथियों द्वारा माल्यार्पण एवं सरस्वती वंदना से हुयी।तत्पश्चात विबग्योर हाई स्कूल की प्रधानाचार्य सुश्री रश्मि सिंह जी ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ दे कर किया।सेवासंकल्प संस्था की महामंत्री सुखप्रीत कौर ने बच्चों और अतिथियों को सेवा संकल्प संस्था के विषय में संक्षिप्त जानकारी दी।  
                       
                  कार्यक्रम में श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव के साहित्यिक योगदान पर चर्चा हुयी।हिंदी के प्रतिष्ठित दैनिक जनसन्देश टाइम्स के प्रधान संपादक डा०सुभाष राय ने श्री प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव के समग्र साहित्यिक अवदान पर चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने साहित्य की हर विधा पर कम किया है।कहानी,नाटक,रेडियो नाटकों के साथ ही बाल  उपन्यास एवं संस्मरणात्मक साहित्य उनके लेखन की प्रिय विधाएँ  थी।डा०राय ने बच्चों को भारत वर्ष के पूर्व राष्ट्रपति डा० कलाम साहब का उदाहरण देते हुए कहा कि कलाम साहब को बच्चों से बहुत लगाव था।उनका कहना था की हर बच्चे के अन्दर रचनात्मकता होती है।बच्चों की इस रचनात्मकता को हमें निखारना होगा। 

प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार एवं समालोचक श्री बंधु कुशावर्ती ने श्री प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव के बाल उपन्यासों और बाल  नाटकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनके नाटक और बाल  उपन्यास दोनों में ही देश प्रेम की भावना कूट कूट कर भरी है।उनका उपन्यास “मौत के चंगुल” में काफी चर्चित हुआ है।उनके  बाल नाटकों का एक संग्रह नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा शीघ्र प्रकाशनाधीन है ।बंधु कुशावर्ती  ने बच्चों को मुंशी प्रेमचंद के साहित्य के बारे में भी विस्तार से बताया और उन्हें मुंशी प्रेमचंद की कहानियों का उदहारण देते हुए बताया कि उनकी सारी बाल  कहानियां उनके आस-पास के बचपन के दोस्तों से जुडी हैं ।बंधु जी ने बच्चों से ये भी कहा की प्रेमचंद जी और प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी दोनों में प्रेम शब्द सामान है और हमें इसी प्रेम को भाईचारे की भावना  दुनिया में फैलाना है।
            
प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव जी के पुत्र प्रतिष्ठित बाल साहित्यकार एवं कवि डा०हेमंत कुमार ने कहा कि उनके पिता श्री प्रेमस्वरूप जी एक सकारात्मक विचारों वाले  और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे ।लेखन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता इतनी थी कि अपने जीवन के अंतिम दिनों तक लिखते रहे। निधन के लगभग एक माह पूर्व उन्होंने एक बाल उपन्यास और दो रेडियो नाटक पूर्ण किये।अब उनके समस्त अप्रकाशित साहित्य को पाठकों के समक्ष लाने का प्रयास किया  जा रहा  है।
            समारोह में विब्ग्योर हाई की प्रधानाचार्य सुश्री रश्मि सिंह,उप-प्राचार्य मिस लवलीन,संयोजिका-सुश्री जास्लीन के साथ ही सेवा संकल्प संस्था के उपाध्यक्ष श्री शिव कुमार, महामंत्री सुखप्रीत कौर, हिंदी की प्रतिष्ठित ब्लागर एवं कवयित्री श्रीमती पूनम श्रीवास्तव,श्री विपुल कुमार,युवा चित्रकर्त्री नित्या शेफाली ने उपस्थित होकर कार्यक्रम में पुरस्कृत बच्चों का उत्साह वर्धन किया।
क्रिएटिवकोना के लिए रिपोर्टिंग:




नित्या शेफाली  


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नारी के अन्तर्मन में झांकती तस्वीरें

सोमवार, 23 नवंबर 2009

किसी भी कला के अंकुर व्यक्ति में दो तरह से विकसित होते हैं।एक तो जन्मजात ईश्वरीय वरदान के रूप में।दूसरे पारंपरिक रूप से सीख कर या प्रशिक्षण लेकर।सुनीता कोमल के अन्दर कला के अंकुर जन्मजात ईश्वरीय वरदान के रूप में ही प्रस्फ़ुटित हुये हैं।सुनीता कोमल खुद स्वीकार करती हैं कि,“कला मेरी जिन्दगी में उसी तरह आई है जैसे पेड़ पर पत्ते आते हैं।” यानि कि एकदम प्राकृतिक रूप से।
महिला एवं बाल विकास विभाग मध्य प्रदेश में मास्टर ट्रेनर के रूप में
नौकरी कर रही सुनीता के चित्रों की एकल प्रदर्शनी 16 नवंबर09 से22नवंबर 09 तक ललित कला अकादमी लखनऊ में आयोजित हुयी।इस प्रदर्शनी का उद्घाटन हिन्दी के वरिष्ठ कथाकार श्री कामतानाथ ने किया।सुनीता के चित्रों को देख कर कामतानाथ जी ने उनकी कमेण्ट बुक में लिखा,“पारंपरिक रूप से स्त्री का बाह्य सौन्दर्य ही चर्चा का विषय रहा है।किन्तु सुनीता के चित्रों में परिलक्षितनारी के सौन्दर्य में एक गहन अन्तरदृष्टि है,जिसके पीछे दुनिया को और बेहतर देखने की उत्कृष्ट आकांक्षा निहित है।”सचमुच सुनीता कोमल के चित्र व्यक्ति के ऊपर एक अलग प्रभाव डालते हैं।इनके चित्र फ़िगरेटिव ऐब्स्ट्रैक्ट हैं। अपने चित्रों में काले रंग का इस्तेमाल अभिव्यक्ति के एक सशक्त माध्यम के रूप में किया है।इनके ब्लैक इंक और पेंसिल से किये गये स्केच में नारी का एक अगठित लेकिन जबर्दस्त प्रभाव डालने वाला रुप उभर कर आया है।इन चित्रों में नारी अपनी सम्पूर्ण विशेषताओं के साथ होते हुये भी एक अलग रूप में सामने आती है। इनकी पेण्टिंग्स में पीला ,भूरा,नीला,नारंगी रंग बड़ी खूबसूरती से इनकी अध्यात्मिक रुझान को हमारे सामने लाता है। इन्होंने अपने चित्रों में कमल,मछली,चट्टान जैसे प्रकृति से उठाये गये प्रतीकों का इस्तेमाल पवित्रता,शुचिता,संवेदनशीलता,संघर्ष जैसे जीवन मूल्यों की स्थापना के लिये किया है।
नारी तो इनके स्केच और पेण्टिंग्स दोनों में ही मुख्य विषय वस्तु के रूप में उपस्थित है। सुनीता खुद स्वीकार करती हैं किनारी प्रकृति एवं ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना है। नारी ही त्याग की पराकाष्ठा को पार कर सकती है,और सृजन करने में सक्षम हैं। नारी अपनी सम्पूर्ण कोमल भावनाओं प्रेम,दया,करुणा,ममत्व,सहिष्णुता,समर्पण एवम आन्तरिक सौन्दर्य के साथ इनकी पेण्टिंग्स के मुख्य केन्द्र बिन्दु के रूप में मौजूद है।चूंकि सुनीता ने खुद एक लंबा संघर्ष किया है इस मुकाम तक पहुंचने के लिये ,इसीलिये नारी संघर्ष का सन्देश भी वे अपनी पेण्टिंग्स के माध्यम से देना चाहती हैं।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि वनस्पति विज्ञान एवम समाजशास्त्र से पोस्टग्रेजुएट सुनीता ने कला का कोई व्यावसायिक या पारम्परिक प्रशिक्षण नहीं लिया है।फ़िर भी अपनी पेण्टिंग्स, चित्रों के माध्यम से कला की दुनिया में अपनी उपस्थिति इन्होंने जबर्दस्त ढंग से करायी है। इनकी पेण्टिंग्स की कई एकल एवम समूह प्रदर्शनियां दिल्ली,मुम्बई,चण्डीगढ़,भोपाल में भी आयोजित हो चुकी हैं।कला के क्षेत्र में कई सम्मान एवम पुरस्कार भी इनके खाते में आ चुके हैं।
प्रदर्शनी के अन्तिम दिन ललित कला अकादमी में ही “स्त्री,सृजन संवाद” विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।इस संगोष्ठी में प्रसिद्ध बाल साहित्यकार एवम कवि डा0 हेमन्त कुमार ख्याति प्राप्त चित्रकार राजीव मिश्र, कवि श्री राम शुक्ल,श्री संजय जायसवाल,नन्द कुमार मनोचा,चौगवां टाइम्स के सम्पादक श्री सुशील अवस्थी ने अपने विचार व्यक्त किये। इनके साथ ही अन्य कई साहित्यकार,कलाकार,मीडियाकर्मी एवम बुद्धिजीवी उपस्थित थे।
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हेमन्त कुमार




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चिल्ड्रेन्स वर्कशाप आन वीडियो प्रोडक्शन……एक अभिनव प्रयोग

गुरुवार, 6 अगस्त 2009


दुनिया का हर बच्चा अपने आप में अलग और अनोखा होता है। हर बच्चे के भीतर कुछ नया करने ,बनाने की ललक के साथ ही कल्पनाओं का एक विशाल भण्डार छुपा रहता है।यदि इन बच्चों को सही दिशा निर्देश मिले तो ये ऐसे काम भी कर सकते हैं ,जिन्हें हम उनकी पहुंच के बाहर मान लेते हैं ।पिछले दिनों बच्चों की सृजनात्मकता को संवरने का एक ऐसा ही अवसर मिला राज्य शैक्षिक तकनीकी सस्थान ,लखनऊ में।
सी आई ई टी ,नई दिल्ली के सहयोग से इस संस्थान ने बच्चों को वीडियो कर्यक्रम निर्माण से परिचित कराने और उन्हें कुछ नया सिखलाने के लिये 20 से 30 जुलाई 09 तक एक कार्यशाला आयोजित की।कार्यशाला का उद्देश्य परिषदीय विद्यालयों के बच्चों की सृजनात्मकता को बढ़ाना था। इस कार्यशाला में कस्तूरबा गांधी विद्यालय माल,मलीहाबाद एव काकोरी के लगभग 15 बच्चों ने हिस्सा लिया।
कार्यशाला का उद्घाटन संस्थान के निदेशक डा0 दलजीत सिंह पुरी ने किया।कार्यशाला के औपचारिक उद्घाटन के बाद सबसे पहले संस्थान की डिप्टी प्रोडक्शन इन्चार्ज श्रीमती ललिता प्रदीप ने बच्चों से दूरदर्शन के विभिन्न धारावाहिकों के बारे में चर्चा करने के साथ ही उन्हें चैनलों के विस्तार के साथ ही मीडिया में आते जा रहे बदलावों के बारे में बताया।सी आई ई टी नई दिल्ली से आये विशेषज्ञ डा0
लाल सिंह एवम श्री पदम सिंह ने भी बच्चों को शैक्षिक फ़िल्मों के बारे में बताया।
राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान में दस दिनों तक चली इस कार्यशाला में बच्चों को वीडियो कर्यक्रम निर्माण से सम्बन्धित हर पहलू से परिचित कराया गया।उन्हें संस्थान के लेक्चरर प्रोडक्शन डा0हेमन्त कुमार तथा प्रस्तु्तकर्ता श्रीमती मृदुला सुशील ने वीडियो फ़िल्मों की स्क्रिप्ट लिखना सिखलाया तो प्रस्तुतकर्ता राकेश निगम ने समचार बुलेटिन तैयार करना सिखलाया।सीनियर प्रोड्यूसर श्री विनोद धस्माना ने बच्चों को स्टूडियो एवम आउट्डोर शूटिंग के बारे में जानकारियां दीं।संस्थान के सीनियर कैमरामैन श्री दिनेश जोशी एवम श्री चिक्का मुनियप्पा ने इन बच्चों को कैमरा संचालन के साथ ही एडिटिंग एवम साउन्ड रिकार्डिंग की बारीकियों से परिचित कराया।
फ़िल्म निर्माण के प्रति बच्चों के उत्साह को देखते हुये उन्हें दो समूहों में विभाजित कर दिया गया।बच्चों की ही सहमति से यह तय हुआ कि बच्चों का एक समूह समाचारों पर आधारित कार्यक्रम बाल समाचार का निर्माण करेगा तथा दूसरा समूह अपने शिक्षकों की शिक्षण पद्धति पर आधारित एक हास्य नाटक का निर्माण करेगा। इस समूह विभाजन के साथ ही खुल गया बच्चों के दिमाग का पिटारा। और निकलने लगे उनमें से रोचक समाचार,रोचक घटनायें और रोचक कहानियों के प्लाट।
बच्चों ने अपने समूह के साथ मिलकर शुरू कर दिया समाचारों का संकलन,नाटक के दृश्यों और संवादों का लेखन। बच्चों की यह दिमागी कसरत तीन दिनों तक चलती रही। इन तीन दिनों में बच्चों ने बहुत सारे आइडिया प्रस्तुत किये ,उन पर विचार विमर्श किया।उन्हें रद्द भी कर दिया।फ़िर से नये आइडिया, कहानी का प्लाट ढूंढ़ा और अन्ततः फ़ाइनल न्यूज बुलेटिन बाल समाचार और एक हास्य नाटक अद्भुत विद्यालय की स्क्रिप्टें हेमन्त कुमार के दिशा निर्देशन में तैयार हो गयीं।
25-26 जुलाई दो दिनों तक बच्चे जुटे रहे अपने दोनों कार्यक्रमों के गहन रिहर्सल में। और इस काम में उनको दिशा निर्देश मिल रहा था संस्थान की प्रस्तुतकर्ता मृदुला सुशील एवम अमरेन्द्र सहाय से।इन दो दिनों में बच्चों ने सीखा शुद्ध उच्चारण ,संवाद बोलना,संवादों में स्वरों का उतार चढ़ाव तथा शारीरिक अभिनय के साथ चेहरे पर लाये जाने वाले भावों और भंगिमाओं को।
और 27 एवम 28 जुलाई को तो संस्थान परिसर में अजीब नजारा था। हर गैलरी
में बच्चे रंग बिरंगी ड्रेस पहने हुये टहल रहे थे। कहीं बच्चे लाइट,रोल कैमरा,ऐक्शन्……जैसे कमाण्ड बोलते सुने गये।तो कहीं अपने सवादों को दुहराते हुये।27जुलाई को बच्चों ने संस्थान के मिनी स्टूडियो में अपने समाचार बुलेटिन की और 28 को मुख्य स्टूडियो में अपने नाटक अद्भुत विद्यालय की रिकार्डिंग पूरी की।इन दोनों ही दिनों बच्चों के अन्दर एक अलग ढंग का उत्साह दिखाई पड़ा। आखिर उनका फ़िल्म बनाने का स्वप्न जो पूरा हो रहा था।
29 जुलाई को सभी बच्चे इकट्ठा हुये एडीटिंग रूम में। और नान लीनियर एडीटिंग सेटप पर श्री चिक्का मुनियप्पा द्वारा अपनी फ़िल्मों को एडिट होते देख कर आनन्दित होते रहे। अन्ततः तैयार हो गयी उनकी दोनों फ़िल्में बाल समाचार और अद्भुत विद्यालय।
वीडियो प्रोडक्शन सीखने की इस प्रक्रिया के दौरान बच्चे अनुभवों के विभिन्न
दौरों से गुजरे।कभी लाइट चली गयी कभी कहीं किसी उपकरण का कनेक्शन लूज हो गया।पर इस समय का उपयोग भी उन्होंने गाना गाकर,डांस करके और अभिनय दिखाकर किया।इस वर्कशाप का उद्देश्य बच्चों को वीडियो कार्यक्रमों के निर्माण की पूरी प्रक्रिया से परिचित कराना था न कि उन्हें उसमें निपुण बनाना।इस दृष्टि से यह वर्कशाप पूरी तरह सफ़ल थी।
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हेमन्त कुमार




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. ‘देख लूं तो चलूं’ "आदिज्ञान" का जुलाई-सितम्बर “देश भीतर देश”--के बहाने नार्थ ईस्ट की पड़ताल “बखेड़ापुर” के बहाने “बालवाणी” का बाल नाटक विशेषांक। “मेरे आंगन में आओ” ११मर्च २०१९ ११मार्च 1mai 2011 2019 अंक 48 घण्टों का सफ़र----- अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस अक्षत अण्डमान का लड़का अनुरोध अनुवाद अपराध अपराध कथा अभिनव पाण्डेय अभिभावक अमित तिवारी अम्मा अरविन्द दुबे अरुणpriya अर्पण पाण्डेय अर्पणा पाण्डेय। अशोक वाटिका प्रसंग अस्तित्व आज के संदर्भ में कल आतंक। आतंकवाद आत्मकथा आनन्द नगर” आने वाली किताब आबिद सुरती आभासी दुनिया आश्वासन इंतजार इण्टरनेट ईमान उत्तराधिकारी उनकी दुनिया उन्मेष उपन्यास उपन्यास। उम्मीद के रंग उलझन ऊँचाई ॠतु गुप्ता। एक टिपण्णी एक ठहरा दिन एक तमाशा ऐसा भी एक बच्चे की चिट्ठी सभी प्रत्याशियों के नाम एक भूख -- तीन प्रतिक्रियायें एक महत्वपूर्ण समीक्षा एक महान व्यक्तित्व। एक संवाद अपनी अम्मा से एल0ए0शेरमन एहसास ओ मां ओडिया कविता ओड़िया कविता औरत औरत की बोली कंचन पाठक। कटघरे के भीतर कटघरे के भीतर्। कठपुतलियाँ कथा साहित्य कथाकार समीर गांगुली कथावाचन कर्मभूमि कला समीक्षा कलाकार कविता कविता। कविताएँ कवितायेँ कहां खो गया बचपन कहां पर बिखरे सपने--।बाल श्रमिक कहानी कहानी कहना कहानी कहना भाग -५ कहानी सुनाना कहानी। काफिला नाट्य संस्थान काल चक्र काव्य काव्य संग्रह किताबें किताबों में चित्रांकन किशोर किशोर शिक्षक किश्प्र किस्सागोई कीमत कुछ अलग करने की चाहत कुछ लघु कविताएं कुपोषण कैंसर-दर-कैंसर कैमरे. कैसे कैसे बढ़ता बच्चा कौशल पाण्डेय कौशल पाण्डेय. कौशल पाण्डेय। क्षणिकाएं क्षणिकाएँ खतरा खेत आज उदास है खोजें और जानें गजल ग़ज़ल गर्मी गाँव गीत गीतांजलि गिरवाल गीतांजलि गिरवाल की कविताएं गीताश्री गुलमोहर गौरैया गौरैया दिवस घर में बनाएं माहौल कुछ पढ़ने और पढ़ाने का घोसले की ओर चिक्कामुनियप्पा चिडिया चिड़िया चिड़ियाँ पिकनिक करने आईं चित्रकार चुनाव चुनाव और बच्चे। चौपाल छिपकली छोटे बच्चे ---जिम्मेदारियां बड़ी बड़ी जज्बा जज्बा। जन्मदिन जन्मदिवस जयश्री राय। जयश्री रॉय। जागो लड़कियों जाडा जात। जाने क्यों ? जेठ की दुपहरी टिक्कू का फैसला टोपी ठहराव ठेंगे से डा० शिवभूषण त्रिपाठी डा0 हेमन्त कुमार डा०दिविक रमेश डा0दिविक रमेश। डा0रघुवंश डा०रूप चन्द्र शास्त्री डा0सुरेन्द्र विक्रम के बहाने डा0हेमन्त कुमार डा0हेमन्त कुमार। डा0हेमन्त कुमार्। डॉ.ममता धवन डोमनिक लापियर तकनीकी विकास और बच्चे। तपस्या तलाश एक द्रोण की तितलियां तीसरी ताली तुम आए तो थियेटर दरख्त दरवाजा दशरथ प्रकरण दस्तक दिशा ग्रोवर दुनिया का मेला दुनियादार दूरदर्शी देश दोहे द्वीप लहरी नई किताब नई पत्रिका नदी किनारे नया अंक नया तमाशा नयी कहानी नववर्ष नवोदित रचनाकार। नागफ़नियों के बीच नारी अधिकार नारी विमर्श निकट नित्या नित्या शेफाली नित्या शेफाली की कविताएं नियति निवेदिता मिश्र झा निषाद प्रकरण। नेता जी नेता जी के नाम एक बच्चे का पत्र(भाग-2) नेहा शेफाली नेहा शेफ़ाली। पढ़ना पतवार पत्रकारिता-प्रदीप प्रताप पत्रिका पत्रिका समीक्षा परम्परा परिवार पर्यावरण पहली बारिश में पहले कभी पहले खुद करें–फ़िर कहें बच्चों से पहाड़ पाठ्यक्रम में रंगमंच पार रूप के पिघला हुआ विद्रोह पिता पिता हो गये मां पिताजी. पितृ दिवस पुण्य तिथि पुण्यतिथि पुनर्पाठ पुरस्कार पुस्तक चर्चा पुस्तक समीक्षा पुस्तक समीक्षा। पुस्तकसमीक्षा पूनम श्रीवास्तव पेंटिंग्स पेड़ पेड़ बनाम आदमी पेड़ों में आकृतियां पेण्टिंग प्यारा कुनबा प्यारी टिप्पणियां प्यारी लड़की प्यारे कुनबे की प्यारी कहानी प्रकृति प्रताप सहगल प्रतिनिधि बाल कविता -संचयन प्रथामिका शिक्षा प्रदीप सौरभ प्रदीप सौरभ। प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक शिक्षा। प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव। प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव. प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव। प्रेरक कहानी प्रो0 सुरेन्द्र विक्रम फ़ादर्स डे।बदलते चेहरे के समय आज का पिता। फिल्म फिल्म ‘दंगल’ के गीत : भाव और अनुभूति फ़ेसबुक बंकू बंधु कुशावर्ती बखेड़ापुर बचपन बचपन के दिन बच्चे बच्चे और कला बच्चे का नाम बच्चे का स्वास्थ्य। बच्चे पढ़ें-मम्मी पापा को भी पढ़ाएं बच्चे। बच्चों का विकास और बड़ों की जिम्मेदारियां बच्चों का आहार बच्चों का विकास बच्चों को गुदगुदाने वाले नाटक बच्चों को जरूर पढाएं ये किताब बदलाव बया बहनें बाघू के किस्से बाजू वाले प्लाट पर बादल बारिश बारिश का मतलब बारिश। बाल अधिकार बाल अपराधी बाल दिवस बाल नाटक बाल पत्रिका बाल मजदूरी बाल मन बाल रंगमंच बाल विकास बाल साहित्य बाल साहित्य प्रेमियों के लिये बेहतरीन पुस्तक बाल साहित्य समीक्षा। बाल साहित्यकार बालवाटिका बालवाणी बालश्रम बालिका दिवस बालिका दिवस-24 सितम्बर। बीसवीं सदी का जीता-जागता मेघदूत बूढ़ी नानी बेंगाली गर्ल्स डोण्ट बेटियां बैग में क्या है ब्लाइंड स्ट्रीट ब्लाग चर्चा भजन भजन-(7) भजन-(8) भजन(4) भजन(5) भजनः (2) भद्र पुरुष भयाक्रांत भारतीय रेल मंथन मजदूर दिवस्। मदर्स डे मनीषियों से संवाद--एक अनवरत सिलसिला कौशल पाण्डेय मनोविज्ञान महुअरिया की गंध मां माँ मां का दूध मां का दूध अमृत समान माझी माझी गीत मातृ दिवस मानस मानस रंजन महापात्र की कविताएँ मानस रंजन महापात्र की कवितायेँ मानसी। मानोशी मासूम पेंडुकी मासूम लड़की मिशन ग्रीन वार मुंशी जी मुद्दा मुन्नी मोबाइल मूल्यांकन मेरा दोस्त मेरा नाम है मेराज आलम मेरी अम्मा। मेरी कविता मेरी रचनाएँ मेरे मन में मोइन और राक्षस मोनिका अग्रवाल मौत के चंगुल में मौत। मौसम यात्रा यादें झीनी झीनी रे युवा युवा स्वर रंग बिरंगी दुनिया रंगबाज रंगबाजी करते राजीव जी रस्म मे दफन इंसानियत राजीव मिश्र राजेश्वर मधुकर राजेश्वर मधुकर। राधू मिश्र रामकली रामकिशोर रिपोर्ट रिमझिम पड़ी फ़ुहार रूचि रोचिका शर्मा लखनऊ लगन लघुकथा लघुकथा। लड़कियां लड़कियां। लड़की लालटेन चौका। लिट्रेसी हाउस लू लू की सनक लेख लेख। लेखसमय की आवश्यकता लोक चेतना और टूटते सपनों की कवितायें लोक संस्कृति लोकार्पण लौटना वनभोज वनवास या़त्रा प्रकरण वरदान वर्कशाप वर्ष २००९ वह दालमोट की चोरी और बेंत की पिटाई वह सांवली लड़की वाल्मीकि आश्रम प्रकरण विकास विचार विमर्श। विज्ञानं बाल कविताएँ विश्व पुतुल दिवस विश्व फोटोग्राफी दिवस विश्व फोटोग्राफी दिवस. विश्व रंगमंच दिवस व्यंग्य व्यक्तित्व व्यन्ग्य शक्ति बाण प्रकरण शब्दों की शरारत शाम शायद चाँद से मिली है शिक्षक शिक्षक दिवस शिक्षक। शिक्षा शिक्षालय शैलजा पाठक। शैलेन्द्र श्र प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव स्मृति साहित्य प्रतियोगिता श्रद्धांजलि श्रीमती सरोजनी देवी संजा पर्व–मालवा संस्कृति का अनोखा त्योहार संदेश संध्या आर्या। संवाद जारी है संसद संस्मरण संस्मरण। सड़क दुर्घटनाएं सन्ध्या आर्य सन्नाटा सपने दर सपने सफ़लता का रहस्य सबरी प्रसंग सभ्यता समय समर कैम्प समाज समीक्षा समीक्षा। समीर गांगुली समीर लाल। सर्दियाँ सांता क्लाज़ साक्षरता निकेतन साधना। सामायिक सारी रात साहित्य अमृत सीता का त्याग.राजेश्वर मधुकर। सुनीता कोमल सुरक्षा सूनापन सूरज सी हैं तेज बेटियां सोन मछरिया गहरा पानी सोशल साइट्स स्तनपान स्त्री विमर्श। स्मरण स्मृति स्वतन्त्रता। हंस रे निर्मोही हक़ हादसा हादसा-2 हादसा। हाशिये पर हिन्दी का बाल साहित्य हिंदी कविता हिंदी बाल साहित्य हिन्दी ब्लाग हिन्दी ब्लाग के स्तंभ हिम्मत हिरिया हेमन्त कुमार होलीनामा हौसला accidents. 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