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पुस्तक समीक्षा-- बच्चे पढ़ें—मम्मी पापा को भी पढ़ाएं—“लू लू की सनक”

मंगलवार, 9 जून 2015

पुस्तक-लू लू ली सनक
(बाल कहानी संग्रह)
लेखक-दिविक रमेश
चित्र-अतुल वर्धन
प्रकाशक-नेशनल बुक ट्रस्ट,इंडिया
नेहरू भवन,5,इंस्टीट्युशनल एरिया,फ़ेज-2
वसंत कुंज,नई दिल्ली-110070

संस्करण-2014 मूल्य-रू075/मात्र।

        हिन्दी में बाल साहित्य लिखा तो खूब जा रहा है,प्रकाशित भी हो रहा है।लेकिन इसमें नये प्रयोग बहुत कम हो रहे हैं।प्रयोग से यहां मेरा तात्पर्य रचनात्मक खिलन्दड़ेपन से है।मतलब रचनाओं से रचनाकार कुछ इस तरह खेले जो बाल मन को भाए,आकर्षित करे।उनके अंदर किताब को पढ़ने की ललक बढ़ाए।
     अभी कुछ ही दिनों पहले(2014) नेशनल बुक ट्र्स्ट से प्रकाशित दिविक रमेश जी का बाल कहानी संग्रह लू लू की सनक एक ऐसा ही प्रयोगधर्मी बाल कहानियों का संकलन है।इस संकलन में दिविक जी की कुल छः कहानियां संकलित हैं।लू लू की मां,लू लू की सनक,लू लू बड़ा हो गया,लू लू की बातें,लू लू का गुस्सा,और लाल बत्ती पर।संकलन की खास बात यह है कि इसकी सभी कहानियों का नुख्य पात्र लू लू नाम का स्कूल जाने वाला एक बच्चा है।हर कहानी में लू लू के साथ ही ्घटने वाली घटनाओं,उसके मन में उठने वाले प्रश्नों,उसकी मां द्वारा दिये गये उत्तरों और उसके आस-पास के वातावरण के माध्यम से दिविक जी ने सारी कहानियों का ताना बाना बुना है।
   एक ही पात्र को लेकर कई कहानियां लिखना किसी भी लेखक के लिये एक रचनात्मक प्रयोग तो है पर इसमें एक बड़ा खतरा भी है।खास तौर से तब जब कहानियां छोटे बच्चों के लिये लिखी जा रही हों।खतराघटनाओं,दृश्यों,शब्दों के दुहराव काखतरा रोचकता की कमी आने से पाठकों की ऊब कामुख्य पात्र के अतिरिक्त अन्य पात्रों से पकड़ छूट जाने का।लेकिन बाल मनोविज्ञान पर अच्छी पकड़ और बाल मनोभावों की गहराई तक पैठ बनाने वाले दिविक रमेश जी ने  यह प्रयोग बहुत सफ़लता पूर्वक किया है।
       संकलन की पहली कहानीलू लू की मां।इसमें लू लू के माध्यम से लेखक ने उन बच्चों को रिप्रजेण्ट किया है जो आलसी होते हैं।अपना काम खुद नहीं करना चाहते्।दूसरों पर आश्रित हो जाते हैं।जैसे कहानी का मुख्य पात्र लू लू अपना हर काम अपनी मां से करवाता है।क्योंकि यह उसे अच्छ लगता है।मां परेशान।पर लू लू के पड़ोसी टी लू की मां ने लू लू की मां को जो मन्त्र दिया उससे लू लू पूरी तरह बदल गया। और अपना हर काम खुद करने लगा।
      दूसरी कहानी—“लू लू ली सनकउन बच्चों के ऊपर आधारित है जो खाने पीने में आनाकानी करते हैं।सिर्फ़ किसी एक चीज को खाने के लिये अपने मां बाप से जिद करते हैं।कहानी में लू लू रोज स्कूल के टिफ़िन में सिर्फ़ चिप्स ले जाता है।कोई और चीज उसे पसंद नहीं।पर टी लू की मां और स्कूल की शिक्षिका ने जो मजेदार योजना उसे सुधारने की बनायी यह कहानी पढ़ कर ही समझा जा सकता है। और अन्ततः लू लू सुधर गया।
   संकलन की तीसरी कहानी लू लू बड़ा हो गयामें लू लू के माध्यम से लेखक ने ऐसे बच्चों के जीवन को दिखाने की कोशिश की है जो सिर्फ़ अपनी ही दुनिया में खोए रहते हैं और किसी से कोई मतलब नहीं रखना चाहते।लू लू अपने जन्म दिवस के उपहारों के लिये इतनी बेसब्री दिखाता है कि अगले जन्मदिन के इन्तजार का एक एक दिन उसके लिये काटना मुश्किल।लेकिन मां द्वारा ढंग से समझाने पर उसे यह समझ में आ गया कि जितनी खुशी उपहार पाने पर है उससे कहीन अधिक खुशी उपहार देने पर होती है।जिस दिन उसने अपने घर की कमवाली के बेटे को उसके जन्मदिवस पर अपना प्यारा पिग्गी बाक्स उपहार में दे दिया उस दिन उसे सच्ची खुशी मिली।
    संकलन की चौथी कहानी लू लू की बातें,पांचवीं लू लू का गुस्सा,और अंतिम रेड लाइट पर”—में भी दिविक लेखक ने एक छोटे बच्चे के मनोभावों को बड़ी सूक्ष्मता के साथ प्रस्तुत किया है।लू लू के मन में उठने वाले तरह तरह के सवालों के मां द्वारा दिए जाने वाले उत्तर उसे संतुष्ट करते हैं।लू लू का मेढक की तरह उचक उचक कर चलना फ़िर सोचना कि मेढक इस तरह उचक उचक कर चलते हुये क्या सोचता होगा?ये बातें बाल मन का कोई बहुत सूक्ष्म पारखी ही लिख सकता है। और यह काम लेखक ने बखूबी किया है।
   संकलन की सभी कहानियों की भाषा इतनी सरल और सहज है कि बच्चा इन कहानियों को बहुत ही आसानी से समझ सकेगा।सबसे बड़ी बात कथानक को शब्दों में इस तरह से बांधा गया है कि बच्चे के मन में बराबर ये उत्सुकता भी बनी रहेगी  कि लू लू अगली कहानी में क्या गुल खिलाने वाला है?वह अपनी मां से क्या बातें पूछेगा?
    एक बात औरयह संकलन जितनाबच्चों के लिये रोचक,मनोरंजक प्रेरणापद और पठनीय है उतना ही यह अभिभावकों के लिये भी महत्वपूर्ण है।क्योंकि हर कहानी में लू लू की मां को जिस ढंग से लू लू को हैण्डिल करते दिखाया गया है वह काबिले तारीफ़ है।लू लू की मां लू लू की हर सनक को,उसके हर प्रश्न को बिना गुस्सा हुये बहुत ही सहजता के साथ हैण्डिल करती है,उसका समाधान निकालती है। जबकि आज की तारीख में ज्यादा संख्या ऐसे अभिभावकों की है जो बच्चों के प्रश्नों पर या तो खीझते हैं या फ़िर उन्हें टाल देते हैं। ऐसे अभिभावकों को लू लू की सनक से निश्चित ही प्रेरणा मिलेगी। और यह इस संकलन की सबसे बड़ी सफ़लता होगी।
     पुस्तक में अतुल वर्धन द्वारा बनाए गये चित्रों ने पात्रों को सजीव तो किया ही है कथानक को औअ सुसज्जित कर दिया है।इस पठनीय और अच्छी पुस्तक के प्रकाशन के लिये दिविक जी के साथ ही नेशनल बुक ट्रस्ट को भी बधाई।
                           00000
समीक्षक-डा0हेमन्त कुमार

डा0दिविक रमेश
डा0 दिविक रमेश हिन्दी साहित्य  के प्रतिष्ठित कथाकार,कवि, एवम बाल साहित्यकार हैं।
आपकी अब तक कविता,आलोचनात्मक निबन्धों,बाल कहानियों,बालगीतों की 50 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।तथा आप कई राष्ट्रीय एवम अन्तर्राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किये जा चुके हैं।पिछले वर्ष आपको उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा बाल साहित्य भारती सम्मान से नवाजा गया है।फ़िलवक्त आप दिल्ली में रह कर स्वतन्त्र लेखन कर रहे हैं।

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“नया तमाशा नयी कहानी”

सोमवार, 25 मई 2015

नया तमाशा नयी कहानी
(बाल नाटक)डा0हेमन्त कुमार
(मंद बुद्धि बच्चों के मनोभावों को आप तक पहुंचाने की एक कोशिश)
मैं आज आपके सामने अपने लगभग पूरे हो चुके बाल नाटक नया तमाशा नयी कहानी के दो दृश्य प्रकाशित कर रहा हूं।आपकी प्रतिक्रियाएं मुझे नाटक को सुधारने/घटाने /बढ़ाने मे मदद करेंगी।
(दृश्य3)
(गनेसी के घर का बराम्दा।नन्हकऊ एक नया पीढ़ा बना रहा है।पास में ही गनेसी बसेहटी खटिया पर पालथी मार कर बैठा मोटर चलाने का अभिनय कर रहा है।उसके हाथ में किसी छोटी साइकिल का टायर है।वह उसी को स्टेयरिंग की तरह इधर उधर घुमा रहा है साथ ही मुंह से तरह तरह की आवाजें भी निकाल रहा है।)
गनेसी:(टायर को स्टेयरिंग की तरह घुमाते हुए) घुल्लघुल्लपोंपोंपींपींपहतो भाई हतोमेली मोतल चल पड़ीहत जाओ बापू सामने छे हत जाओ ---पींपींप---।
(गनेसी की मां पार्वती का प्रवेश।पार्वती के एक हाथ में एक थैला है।दूसरे में गत्ते का एक छोटा डिब्बा।)
पार्वती:(गनेसी से)ले बेटा गनेसीये थैला जरा भीतर रख आ---और इस डिब्बे में कुछ है खा ले।सुबह से भूखा होगा मेरा---लाल।
   (गनेसी के पास जाकर आंचल से उसका मुंह पोंछती है।गनेसी उसी तरहा टायर घुमाता रहता है।जैसे उसने सुना ही न हो।)
गनेसी:पींपींपहत्तो अम्माहज्जाओमेली मोटल आ र्रर्रर्रर्रही है---देखो अम्मा हम ल को र्रर्रर्र बोल दिये---पीं पींप---।
पार्वती:अरे बेटवा---पहिले कुछ खाई ले फ़िर चलाना मोटर।
गनेसी:(टायर घुमाते हुए)मिथाई लाई हो का अम्मा?
पार्वती:मिठाई नहीं तो बाबा जी का ठुल्लू लाए हैं। अरे सबेरे से एक बोरा गेहूं साफ़ किया तो ठकुराइन ने चार ठो बासी पूड़ी औ सब्जी दी है।ले बइठ के खाई ले।
(गनेसी टायर छोड़ कर  बहुत जोर से ताली पीटता है और हंसता है)
गनेसी: हा हाहाहाबाबा जी का थुल्लू।लाओ अम्मा देखें कैसा होता है बाबा जी का थुल्लू?मीठा होता है का--?
(पार्वती उसके सामने दफ़्ती का डिब्बा रख कर माथा पकड़ कर बैठ जाती है।नन्हकऊ अपने काम में लगा रहता है।गनेसी गत्ते का डिब्बा लेकर नन्हकऊ के सामने जाता है।)
गनेसी:(नन्हकऊ से)बापूबापू लो तुम भी खा लोअम्मा बाबा जी का थुल्लू लाई हैं।
(नन्हकऊ बोलता नहीं अपने काम में लगा रहता है।)
गनेसी:बापू,कभी खाए हो बाबा जी का थुल्लू?
(नन्हकऊ गुस्से में एक बार गनेसी की तरफ़ देखता है फ़िर उसे कस कर एक झापड़ मारता है।गनेसी हतप्रभ हो जाता है।)
नन्हकऊ:भाग साले इहां सेपागल कहीं काकाम नहीं करने दे रहा।सबेरे से घुरुर घुरुर लगाए है।इस्कुलवौ में बैठते नहीं बनताजा भाग।
(गनेसी हक्का बक्का हो कर नन्हकऊ को करुणा भरी निगाहों से देखता है।फ़िर पूड़ियों का डिब्बा नन्हकऊ की तरफ़ फ़ेंक कर हंसता हुआ तेजी से बाहर की ओर भागता है।)
गनेसी:हाहाहाबाबा जी का थुल्लू---थुल्लू---।
(पार्वती उसे आवाज देती है)
पार्वती:अरे रुक जा बेटापूड़ी खा ले फ़िर जा---।
    (गनेसी रुकता नहीं तेजी से भाग जाता है।)
पार्वती:क्यों मार दिया बिचारे को?पूड़ी तो खा लेने दिये होते उसको----।
नन्हकऊ:(गुस्से में)मारें न तो का पूजा करें?साला पागलढपोंग का पंडवा होइ गया।इसकी उमर के बच्चे काम धाम करके कमा रहे हैं।ई ससुरा सबेरे से घरवै में कोहराम मचाए रहता है।मर भी नहीं जाता साला।
पार्वती:(करुण स्वरों में)काहे कोस रहे हो बिचारे को---अब भगवान ने कम बुद्धि दे के भेजा है तो ऊ का करै?कहां से हो जाए और लड़कन की तरहबिचारे को पूड़ी भी नहीं खाए दिये---।
(नन्हकऊ गुस्से में पीढ़ा हथौड़ी पटक कर बाहर की तरफ़ निकल जाता है।करुण संगीत।दृश्य यहीं  फ़ेड आउट होता है।)
दृश्य-7
(गांव का ही दृश्य।मंच पर हल्का प्रकाश।मंच के एक तरफ़ से गनेसी,गुड़िया,शंकर और तीन चार अन्य मंद बुद्धि बच्चे कतार बद्ध होकर बहुत धीरे-धीरे आते हैं।मंच के बीचोबीच रुक जाते हैं।दर्शकों की तरफ़ मुंह करके उन्हें संबोधित करते हैं।)
गनेसी:(हाथ उठाकर दुखी स्वरों में)
            हम हैं बड़े अभागे बच्चे
            हम हैं बड़े उपेक्षित बच्चे
            कुछ भी कह लें आप सभी पर
            आखिर हम भी आप के बच्चे।
            फ़िर भला हमारी क्या है गलती
            क्यूं मिलती रोज हमें है झिड़की।
गुड़िया:(दर्शकों की तरफ़ झुक कर)
             फ़िर भला हमारी क्या है गलती
             क्यूं मिलती रोज हमें है झिड़की।
बच्चा(तीन):   घरों पे मिलती हमें उपेक्षा
             स्कूल भी दोस्त नहीं क्यूं सच्चा
             हमें चिढ़ाता क्यूं हर बच्चा
             शिक्षक कहते पगला बच्चा।
             फ़िर भला हमारी क्या है गलती
             क्यूं मिलती रोज हमें है झिड़की।
बच्चा(चार):   हम भी कभी थे प्यारे बच्चे
            गोल मटोल बबुओं के जैसे
            बढ़ता गया आकार हमारा
            दिखता गया विकार हमारा।
            फ़िर भला हमारी कहां थी गलती
            क्यूं मिलती रोज हमें है झिड़की।
(पूरे मंच पर अंधकार।केवल एक स्पाट लाइट मंच के बीच बैठे गनेसी के ऊपर पड़ेगी।गनेसी मंच के बीच में उकड़ूं बैठ कर दोनों पांवों के बीच अपना सर छुपा लेता है।बाकी सारे बच्चे एक दूसरे का हाथ पकड़ कर उसके चारों ओर घूमते रहते हैं।)
सारे बच्चे(सामूहिक स्वर में):
         आखिर हमने क्या की गलती
         रोज हमें क्यूं मिलती झिड़की।
(बच्चों के घूमने की गति तेज होती है।तेजी से घूमने के साथ ही सारे बच्चेआखिर हमने क्या--।
गाते रहते हैं।बीच में गनेसी और अधिक सिकुड़ कर बैठता जाता है।गनेसी सिसकता भी हैऽन्त में सारे बच्चे गनेसी के ऊपर झुक जाते हैं। दृश्य यहीं फ़्रीज होकर फ़ेड आउट हो जाता है।)
         (यह अन्त नहीं एक शुरुआत है…)


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भजन-(8)-वाल्मीकि आश्रम प्रकरण

शुक्रवार, 8 मई 2015

नाथ सदा तुम साथ  मेरे बस  बिनती यही है हमें ना बिसरइहो।
तुम बिन सिय आधार कहां, निज सिय को चरन सदा बइठइहो।।

छोड़ अवधपुर निर्जन वन में दरसन को यह मन है रोता,
कैसे होगे मम रघुराई बस हर पल हिय में यही है होता,
अवध से त्यागे निज सिय को प्रभु हिय से सिय को नाहिं हटइहो।
नाथ सदा तुम साथ  मेरे, बस बिनती यही है हमें ना बिसरइहो।।

कन्द मूल खा भूमि शयन कर एक एक दिन कटि जइहें,
विरह बियोग शोक दुख सारे  प्रभु देह साथ चलि जइहैं
जब तक प्राण रहे तन में इस आंखिन माहिं सदा बसि रहिहो।
नाथ सदा तुम साथ  मेरे, बस बिनती यही है हमें ना बिसरइहो।।

आपन तो सुध चैन नहिं मन आवत मेरे प्रभु कस होइहें,
यहि सोच एक एक दिन बीतत कुशल क्षेम कस पइहें,
सूर्यवंश कुलदीप महाप्रभु बस बिनती यही मन भीतर  रहिहो।
नाथ सदा तुम साथ  मेरे, बस बिनती यही है हमें ना बिसरइहो।।
000
राजेश्वर मधुकर
       शैक्षिक दूरदर्शन लखनऊ में प्रवक्ता उत्पादन के पद पर कार्यरत श्री राजेश्वर मधुकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।मधुकर के व्यक्तित्व में कवि,लेखक,उपन्यासकार और एक अच्छे फ़िल्मकार का अनोखा संगम है।सांझ की परछांई(बौद्ध दर्शन पर आधारित  उपन्यास),आरोह स्वर(कविता संग्रह),घड़ियाल(नाटक), छूटि गइल अंचरा के दाग(भोजपुरी नाटक) आदि  इनकी  प्रमुख कृतियां हैं। इनके अतिरिक्त मधुकर जी ने अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक टी वी सीरियलों का लेखन एवं निर्देशन तथा सांवरी नाम की भोजपुरी फ़ीचर फ़िल्म का  लेखन,निर्देशन एवं निर्माण भी किया है।आपके हिन्दी एवं भोजपुरी गीतों के लगभग 50 कैसेट तथा कई वीडियो एलबम भी बन चुके हैं। 
 मो0 9415548872    


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रंगबाजी करते राजीव जी

बुधवार, 6 मई 2015

           


एक ठो हमारे मित्र हैं।नाम है पंडित राजीव मिश्र।बहुत नामचीन अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के रंगबाज।जब देखो तब रंग बाजी—सुबहदोपहर-शाम रंगबाजी हम उनको बहुत समझाते हैं कि भैया हर वक्त की रंगबाजी अच्छी नहीं तो बोलेंगे कुछ नहीं मुस्कुरा भर देंगे। पर उनकी वही कातिलाना मुस्कराहट ही तो बड़ी बड़ी लैलाओं को घायल कर देती है और बड़े से बड़े मजनूं उनके मुरीद हो जाते हैं।आखिर उन्होंने इश्क भी किया है रंगों से और जिन्दगी भर रंगबाजी करने की कसम खायी है।
   एक बार का वाकया बतायेंहम लोग चाय पीने निशातगंज गये थे।दोपहर का वक्त गरमी के कारण सड़कों पर सन्नाटा।मैंने कहा यार ये तो मरघट हो गया है शहर। पँडित राजीव बोले गुलजार कर दूं अभी? मैंने कहा कर दो भैया। पंडित जी ने तपाक से एक  जेब से एक फ़ुलस्केप कागज निकाला इंक पेन निकाली और चाय वाले को बोले कुर्सी पर बैठ जाओ।वो उनकी शकल देखने लगा। और पंडित जी चालू हो गये एक किताब पर कागज रख कर उसका लाइव पोर्ट्रेट बनाने में।मैं देखने लगा।चाय के सारे ग्राहक देखने लेगे उनका काम।थोड़ी देर में साइकिल,रिक्शा और पैदल वाले भीड़ लगा लिये। अन्ततः
ट्राफ़िक जाममच गयी पोंपोंटींटीं। और निशतगंज पुलिस चौकी से दीवान जी दौड़े आये।क्या मामलाभीड़ काहे कीदेखा यहां तो पंडितजी की रंगबाजी चल रही।कुछ बोले नहीं बेचारेपहले डंडा फ़टकारा भीड़ हटायीफ़िर संकोच से बोले साहब एक मेरा भी पोर्ट्रेट बना दें ड़राइंग रूम की शोभा बढ़ेगी।----तो ये तो एक छोटा सा नमूना पेश किया मैंने पंडित राजीव मिश्र की रंगबाजी का।
      राजीव जी एक प्रतिष्ठित चित्रकार,संगीतकार,मूर्तिकार होने के साथ ही एक बेहतरीन इन्सान भी हैं।चित्रकारी की हर विधा में उनकी अच्छी पकड़ हैऽउर जिसको कहते हैं साधना ---उन्होंने पेण्टिंग के हर माध्यमवाश,एक्रेलिक,क्रेयान्स,पेन इंक,कलर पेंसिल,डाट पेन,आयल कलर से हजारों की संख्या में पेण्तिंग्स की हैं।राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पेण्टिंग की प्रदर्शनियां हुयी हैं।
     राजीव जी आजकल एक बड़ी एग्जीबीशन की तैयारी में लगे हैं।इस प्रदर्शनी की तारीख और स्थान की सूचना वो जल्द ही आपको देंगे।फ़िलवक्त उनकी मूर्तिकारी और चित्रकारी,रंगबाजी के कुछ नमूने देखिये।








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डा0हेमन्त कुमार   

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भजन-(7)-सीता का त्याग

सोमवार, 4 मई 2015

माता को पुत्र कैसे निर्जन में छोड़ आये, बिनती हमारी नाथ ऐसा ना कीजै।
चैदह बरस दिन कांटों में बीता है, फिर घूमें वन वन प्रभु ऐसा ना कीजै।।

ऐसा विधाता खेल कैसे तू खेलता है, इतना निठुर हिया कैसे हो जाता है,
फूलों में रहने वाली काटों में सोये, कहते हुए हिय कांप नहीं जाता है,
नन्हीं  चिनगारी कहीं अवध को जला न जाये,अवसर अभी है विचार प्रभु कीजै।
माता को पुत्र कैसे निर्जन में छोड़ आये, बिनती हमारी नाथ ऐसा ना कीजै।।

राजा है आप मुझे मृत्यु दंड दे दें,लेकिन मैं ऐसा आदेश नहीं मानूंगा।
गंगा समान मां ममतामयी को साथ ले,जंगल में छोड़नें ना जाऊँगा॥
दया की भीख आज सेवक को दे दें नाथ, मैया सिया के साथ ऐसा ना कीजै।
चौदह बरस दिन कांटों में बीता है, फिर घूमें वन वन प्रभु ऐसा ना कीजै।।
                                  00000

राजेश्वर मधुकर
शैक्षिक दूरदर्शन लखनऊ में प्रवक्ता उत्पादन के पद पर कार्यरत श्री राजेश्वर मधुकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।मधुकर के व्यक्तित्व में कवि,लेखक,उपन्यासकार और एक अच्छे फ़िल्मकार का अनोखा संगम है।सांझ की परछांई(बौद्ध दर्शन पर आधारित  उपन्यास),आरोह स्वर(कविता संग्रह),घड़ियाल(नाटक), छूटि गइल अंचरा के दाग(भोजपुरी नाटक) आदि  इनकी  प्रमुख कृतियां हैं। इनके अतिरिक्त मधुकर जी ने अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक टी वी सीरियलों का लेखन एवं निर्देशन तथा सांवरी नाम की भोजपुरी फ़ीचर फ़िल्म का  लेखन,निर्देशन एवं निर्माण भी किया है।आपके हिन्दी एवं भोजपुरी गीतों के लगभग 50 कैसेट तथा कई वीडियो एलबम भी बन चुके हैं। 

 मो0 9415548872    

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भजन-(6)शक्ति बाण प्रकरण

गुरुवार, 30 अप्रैल 2015

क्या लेके अवधपुर जाऊँगा, मैं तात को क्या बतलाऊँगा।
जब मातु पूछेगी लखन कहां,तब कैसे मैं समझाऊँगा।।
यदि लखन छोड़कर मुझे गया,तो महा प्रलय आयेगा,
कुल देव अनर्थ की स्थिति में,माथे कालिख पुत जायेगा,
है सूर्यवंश का महाशपथ, ना अवध में मुंह दिखलाऊंगा।
क्या लेके अवधपुर जाऊँगा,मैं तात को क्या बतलाऊँगा।।

उठो वीरवर राम पुकारें, सच तू तो बहुत बलशाली है
तुम बिन राम जियेगा कैसे, तुम बिन जीवन खाली है,
जो तुम ना उठे तो शपथ है ये,अग्नि समाधि सजाऊंगा।
क्या लेके अवधपुर जाऊँगा, मैं तात को क्या बतलाऊँगा।
न आये अभी बूटी लेकर,अब भोर भी होने वाली है,
कुल देव करें रक्षा मेरी,अब मेरी ये झोली खाली है,
यदि लखन मुझे मिल जायेगा, तुम पर सर्वस्व लुटाऊँगा।
क्या लेके अवधपुर जाऊँगा, मैं तात को क्या बतलाऊँगा।
00000

   
राजेश्वर मधुकर
शैक्षिक दूरदर्शन लखनऊ में प्रवक्ता उत्पादन के पद पर कार्यरत श्री राजेश्वर मधुकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।मधुकर के व्यक्तित्व में कवि,लेखक,उपन्यासकार और एक अच्छे फ़िल्मकार का अनोखा संगम है।सांझ की परछांई(बौद्ध दर्शन पर आधारित  उपन्यास),आरोह स्वर(कविता संग्रह),घड़ियाल(नाटक), छूटि गइल अंचरा के दाग(भोजपुरी नाटक) आदि  इनकी  प्रमुख कृतियां हैं। इनके अतिरिक्त मधुकर जी ने अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक टी वी सीरियलों का लेखन एवं निर्देशन तथा सांवरी नाम की भोजपुरी फ़ीचर फ़िल्म का  लेखन,निर्देशन एवं निर्माण भी किया है।आपके हिन्दी एवं भोजपुरी गीतों के लगभग 50 कैसेट तथा कई वीडियो एलबम भी बन चुके हैं। 
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भजन(5)--अशोक वाटिका प्रसंग

सोमवार, 27 अप्रैल 2015

डूब गयी अखियां असुअन में, नींद नही तो सपन न आये।
राम बिना सिय कैसे जिये, जिय जाये नहीं हिय चैन ना आये।।.......

राम बिमुख सिय जीवन कैसे, होई कबहू नहिं पूरा,
कोई घट ज्यों बिन जल सूना, रोवत फिरत अधूरा,
पसरा शोक अशोक तले तजू देह, सदा यहि मन में आये।
डूब गयी अखियां अंसुअन में, नींद नही तो सपन न आये।।..........

सातो वचन का भूल गये, सिय की याद अबहूं नहिं आई
बेगिहिं आई हरो दुख मेरो, हे दीन बन्धु दया रघुराई,
संकट सबहिं मिटै वहि पल, जेहिं छन नयना दरसन को पाये।
राम बिना सिय कैसे जिये, जिय जाये नहीं हिय चैन ना आये।।.......

हे रघुकुल रघुनाथ प्रान प्रिय, विनती सुनौ अब बेगिहि आओ,
राक्षस दल करि दलन दशानन हति, निज सिय को लेई जाओ,
तरस गयी अंखियां देखन छबि, वो रुप दीखै जो मन को भाये।
राम बिना सिय कैसे जिये, जिय जाये नहीं हिय चैन ना आये।।.......
000
राजेश्वर मधुकर
       शैक्षिक दूरदर्शन लखनऊ में प्रवक्ता उत्पादन के पद पर कार्यरत श्री राजेश्वर मधुकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।मधुकर के व्यक्तित्व में कवि,लेखक,उपन्यासकार और एक अच्छे फ़िल्मकार का अनोखा संगम है।सांझ की परछांई(बौद्ध दर्शन पर आधारित  उपन्यास),आरोह स्वर(कविता संग्रह),घड़ियाल(नाटक), छूटि गइल अंचरा के दाग(भोजपुरी नाटक) आदि  इनकी  प्रमुख कृतियां हैं। इनके अतिरिक्त मधुकर जी ने अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक टी वी सीरियलों का लेखन एवं निर्देशन तथा सांवरी नाम की भोजपुरी फ़ीचर फ़िल्म का  लेखन,निर्देशन एवं निर्माण भी किया है।आपके हिन्दी एवं भोजपुरी गीतों के लगभग 50 कैसेट तथा कई वीडियो एलबम भी बन चुके हैं। 

 मो0 9415548872        

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भजन(4)सबरी प्रसंग...........

रविवार, 26 अप्रैल 2015


धन्य धन्य प्रभु दरसन दीन्हो, निज सेवक के भाग्य जगायो।
हे करुणानिधि आसन बइठो, धो लूं चरन मोरी कुटिया आयो।।

अचरज भरी दृष्टि से हे प्रभु अइसे ठाढ़े नाहीं निहारो,
बाट जोहत मोरे नयना थकि गये अब तो नाथ उबारो,
चुनि चुनि बेर सहेज रखी मैं जान पड़ी प्रभु भागि के आयो।
धन्य धन्य प्रभु दरसन दीन्हो, निज सेवक के भाग्य जगायो।।

नाहिं प्रभु तनि धीर धरो ई सबरी बेर अइसे ना दीहै,
बेर कहीं खटटी होई तो सकल जतन पानी फिर जइहै,
मैं चख लूं मीठी जब निकले बस वो ही बेर नाथ तुम खायो।
धन्य धन्य प्रभु दरसन दीन्हो, निज सेवक के भाग्य जगायो।।

लो चख लो यह बेर महाप्रभु अइसी बेर ना कबहूं पइहो,
तू मालिक प्रभु मैं वनबासी चाहे कितनो जुगत लगइहो,
सच दूजै हाथ ई बेर ना मिलिहैं, भक्ति भाव एहि बेर समाया।
धन्य धन्य प्रभु दरसन दीन्हो, निज सेवक के भाग्य जगायो।।
               000

राजेश्वर मधुकर
शैक्षिक दूरदर्शन लखनऊ में प्रवक्ता उत्पादन के पद पर कार्यरत श्री राजेश्वर मधुकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।मधुकर के व्यक्तित्व में कवि,लेखक,उपन्यासकार और एक अच्छे फ़िल्मकार का अनोखा संगम है।सांझ की परछांई(बौद्ध दर्शन पर आधारित  उपन्यास),आरोह स्वर(कविता संग्रह),घड़ियाल(नाटक), छूटि गइल अंचरा के दाग(भोजपुरी नाटक) आदि  इनकी  प्रमुख कृतियां हैं। इनके अतिरिक्त मधुकर जी ने अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक टी वी सीरियलों का लेखन एवं निर्देशन तथा सांवरी नाम की भोजपुरी फ़ीचर फ़िल्म का  लेखन,निर्देशन एवं निर्माण भी किया है।आपके हिन्दी एवं भोजपुरी गीतों के लगभग 50 कैसेट तथा कई वीडियो एलबम भी बन चुके हैं। 

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भजन(3)वनवास या़त्रा प्रकरण

सोमवार, 20 अप्रैल 2015

देखे दो तपसी और एक नारी, दो सुकुमार एक सुकुमारी।
गौर वर्ण छबि नैन बसि गयी, निरखत ना हटी दृष्टि हमारी।।
माथे तिलक केश अति सुन्दर, नर नाहीं नरायण लागे,
कौन देश जो इनको त्यागे, कौन देश के लोग अभागे,
बिधना का तुम सोई गये जो डारि दियो अस बिपदा भारी।
देखे दो तपसी और एक नारी, दो सुकुमार एक सुकुमारी।।
कोमल बदन कमल मुख धूमिल,पांव छिले दुख नाहिं सहाये,
संग सुकुमारी सहत दुख सारे, देखत अइस नैन भरि आये,
मातु पिता गुरु कौन अधर्मी चांद सुरुज को दीन्ह निकारी।
देखे दो तपसी और एक नारी, दो सुकुमार एक सुकुमारी।।
वन का जीवन बन वनवासी, कइसे सगरी उम्र बितइहै,
भूमि शयन आ कन्द मूल खा, कइसे सगरी उम्र बितइहै
देखि दशा पाथर भी पिघले, हम मानव का जोर हमारी।
देखे दो तपसी और एक नारी, दो सुकुमार एक सुकुमारी।।
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राजेश्वर मधुकर
       शैक्षिक दूरदर्शन लखनऊ में प्रवक्ता उत्पादन के पद पर कार्यरत श्री राजेश्वर मधुकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।मधुकर के व्यक्तित्व में कवि,लेखक,उपन्यासकार और एक अच्छे फ़िल्मकार का अनोखा संगम है।सांझ की परछांई(बौद्ध दर्शन पर आधारित  उपन्यास),आरोह स्वर(कविता संग्रह),घड़ियाल(नाटक), छूटि गइल अंचरा के दाग(भोजपुरी नाटक) आदि  इनकी  प्रमुख कृतियां हैं। इनके अतिरिक्त मधुकर जी ने अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक टी वी सीरियलों का लेखन एवं निर्देशन तथा सांवरी नाम की भोजपुरी फ़ीचर फ़िल्म का  लेखन,निर्देशन एवं निर्माण भी किया है।आपके हिन्दी एवं भोजपुरी गीतों के लगभग 50 कैसेट तथा कई वीडियो एलबम भी बन चुके हैं। 
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भजनः (2)निषाद प्रकरण

गुरुवार, 16 अप्रैल 2015



यह राज पाट सब ले लो प्रभु, बन राजा राज करो।
हे रघुनन्दन ये बिनती है, तुम अब स्वीकार करो।।
मत जाओ वन बन सन्यासी, अब सहन नहीं होता है।
यह रुप देखकर हे प्रभुवर यह मेरा अन्तर्मन रोता ह॥
सेवक को सेवा का अवसर, हे नाथ प्रदान करो।
हे रघुनन्दन ये बिनती है, तुम अब स्वीकार करो।।
निज चरणों का आश्रय देकर, यह जीवन धन्य करें प्रभुवर।
तन मन धन सब तुम पर अर्पण, उपकार करें प्रभु हम पर॥
बन सेवक  सदा करूं सेवा, प्रभु ये उपकार करो।
हे रघुनन्दन ये बिनती है, तुम अब स्वीकार करो।।
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राजेश्वर मधुकर
शैक्षिक दूरदर्शन लखनऊ में प्रवक्ता उत्पादन के पद पर कार्यरत श्री राजेश्वर मधुकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।मधुकर के व्यक्तित्व में कवि,लेखक,उपन्यासकार और एक अच्छे फ़िल्मकार का अनोखा संगम है।सांझ की परछांई(बौद्ध दर्शन पर आधारित  उपन्यास),आरोह स्वर(कविता संग्रह),घड़ियाल(नाटक), छूटि गइल अंचरा के दाग(भोजपुरी नाटक) आदि  इनकी  प्रमुख कृतियां हैं। इनके अतिरिक्त मधुकर जी ने अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक टी वी सीरियलों का लेखन एवं निर्देशन तथा सांवरी नाम की भोजपुरी फ़ीचर फ़िल्म का  लेखन,निर्देशन एवं निर्माण भी किया है।आपके हिन्दी एवं भोजपुरी गीतों के लगभग 50 कैसेट तथा कई वीडियो एलबम भी बन चुके हैं। 
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भजन—(1) दशरथ प्रकरण

सोमवार, 13 अप्रैल 2015

आज से आप यहां आनन्द ले सकते हैं भजनों की एक नयी शृंखला का जिसमें मेरे अभिन्न मित्र श्री राजेश्वर मधुकर जी ने राम कथा के कुछ चुनिंदा प्रसंगों को भजनों के रूप में शब्दबद्ध किया है।इसी कड़ी का पहला भजन। 
दशरथ प्रकरण

तज दूंगा प्राण राम तुझ बिन, बन वनवासी मत वन जाओ।
हे अवधपुरी कुलदीप सुनो, बन वनवासी मत वन जाओ।

चाहे मर्यादा खण्डित हो यह रघुकुल जग में परिहास बने,
दोनो ही जग में हो निन्दा इस अवध का जो इतिहास बने,
अन्यायपूर्ण इस निर्णय का प्रतिकार करो मत वन जाओ।
तज दूंगा प्राण राम तुझ बिन, बन वनवासी मत वन जाओ।

कैकेयी को जो वचन दिया यह सुन तुम बन जा विद्रोही,
इस अवध का हित बस इसमें है जो कहता हूं तू कर वो ही,
कर युद्ध छीन लो अवधराज और तुम राजा बन जाओ।
तज दूंगा प्राण राम तुझ बिन, बन वनवासी मत वन जाओ।

हे राम तेरे बिन ये जीवन  मणि खोकर सर्प क्या जीता है,
बिन जल के घट का मोल नही उस घट का जीवन रीता है,
प्रतिकार करो मेरे वचनों का हे राम इसी पल झुठलाओ।
तज दूंगा प्राण राम तुझ बिन, बन वनवासी मत वन जाओ।
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राजेश्वर मधुकर
    शैक्षिक दूरदर्शन लखनऊ में प्रवक्ता उत्पादन के पद पर कार्यरत श्री राजेश्वर मधुकर बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं।मधुकर के व्यक्तित्व में कवि,लेखक,उपन्यासकार और एक अच्छे फ़िल्मकार का अनोखा संगम है।सांझ की परछांई(बौद्ध दर्शन पर आधारित  उपन्यास),आरोह स्वर(कविता संग्रह),घड़ियाल(नाटक),छूटि गइल अंचरा के दाग(भोजपुरी नाटक) आदि  इनकी  प्रमुख कृतियां हैं। इनके अतिरिक्त मधुकर जी ने अब तक लगभग एक दर्जन से अधिक टी वी सीरियलों का लेखन एवं निर्देशन तथा सांवरी नाम की भोजपुरी फ़ीचर फ़िल्म का  लेखन,निर्देशन एवं निर्माण भी किया है।आपके हिन्दी एवं भोजपुरी गीतों के लगभग 50 कैसेट तथा कई वीडियो एलबम भी बन चुके हैं। 
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लेबल

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जेठ की दुपहरी टिक्कू का फैसला टोपी ठहराव ठेंगे से डा० शिवभूषण त्रिपाठी डा0 हेमन्त कुमार डा०दिविक रमेश डा0दिविक रमेश। डा0रघुवंश डा०रूप चन्द्र शास्त्री डा0सुरेन्द्र विक्रम के बहाने डा0हेमन्त कुमार डा0हेमन्त कुमार। डा0हेमन्त कुमार्। डॉ.ममता धवन डोमनिक लापियर तकनीकी विकास और बच्चे। तपस्या तलाश एक द्रोण की तितलियां तीसरी ताली तुम आए तो थियेटर दरख्त दरवाजा दशरथ प्रकरण दस्तक दिशा ग्रोवर दुनिया का मेला दुनियादार दूरदर्शी देश दोहे द्वीप लहरी नई किताब नई पत्रिका नदी किनारे नया अंक नया तमाशा नयी कहानी नववर्ष नवोदित रचनाकार। नागफ़नियों के बीच नारी अधिकार नारी विमर्श निकट नित्या नित्या शेफाली नित्या शेफाली की कविताएं नियति निवेदिता मिश्र झा निषाद प्रकरण। नेता जी नेता जी के नाम एक बच्चे का पत्र(भाग-2) नेहा शेफाली नेहा शेफ़ाली। पढ़ना पतवार पत्रकारिता-प्रदीप प्रताप पत्रिका पत्रिका समीक्षा परम्परा परिवार पर्यावरण पहली बारिश में पहले कभी पहले खुद करें–फ़िर कहें बच्चों से पहाड़ पाठ्यक्रम में रंगमंच पार रूप के पिघला हुआ विद्रोह पिता पिता हो गये मां पिताजी. पितृ दिवस पुण्य तिथि पुण्यतिथि पुनर्पाठ पुरस्कार पुस्तक चर्चा पुस्तक समीक्षा पुस्तक समीक्षा। पुस्तकसमीक्षा पूनम श्रीवास्तव पेंटिंग्स पेड़ पेड़ बनाम आदमी पेड़ों में आकृतियां पेण्टिंग प्यारा कुनबा प्यारी टिप्पणियां प्यारी लड़की प्यारे कुनबे की प्यारी कहानी प्रकृति प्रताप सहगल प्रतिनिधि बाल कविता -संचयन प्रथामिका शिक्षा प्रदीप सौरभ प्रदीप सौरभ। प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक शिक्षा। प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव प्रेम स्वरूप श्रीवास्तव। प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव. प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव। प्रेरक कहानी फ़ादर्स डे।बदलते चेहरे के समय आज का पिता। फिल्म फिल्म ‘दंगल’ के गीत : भाव और अनुभूति फ़ेसबुक बंकू बंधु कुशावर्ती बखेड़ापुर बचपन बचपन के दिन बच्चे बच्चे और कला बच्चे का नाम बच्चे का स्वास्थ्य। बच्चे पढ़ें-मम्मी पापा को भी पढ़ाएं बच्चे। बच्चों का विकास और बड़ों की जिम्मेदारियां बच्चों का आहार बच्चों का विकास बच्चों को गुदगुदाने वाले नाटक बच्चों को जरूर पढाएं ये किताब बदलाव बया बहनें बाघू के किस्से बाजू वाले प्लाट पर बादल बारिश बारिश का मतलब बारिश। बाल अधिकार बाल अपराधी बाल दिवस बाल नाटक बाल पत्रिका बाल मजदूरी बाल मन बाल रंगमंच बाल विकास बाल साहित्य बाल साहित्य प्रेमियों के लिये बेहतरीन पुस्तक बाल साहित्य समीक्षा। बाल साहित्यकार बालवाटिका बालवाणी बालश्रम बालिका दिवस बालिका दिवस-24 सितम्बर। बीसवीं सदी का जीता-जागता मेघदूत बूढ़ी नानी बेंगाली गर्ल्स डोण्ट बेटियां बैग में क्या है ब्लाइंड स्ट्रीट ब्लाग चर्चा भजन भजन-(7) भजन-(8) भजन(4) भजन(5) भजनः (2) भद्र पुरुष भयाक्रांत भारतीय रेल मंथन मजदूर दिवस्। मदर्स डे मनीषियों से संवाद--एक अनवरत सिलसिला कौशल पाण्डेय मनोविज्ञान महुअरिया की गंध मां माँ मां का दूध मां का दूध अमृत समान माझी माझी गीत मातृ दिवस मानस मानस रंजन महापात्र की कविताएँ मानस रंजन महापात्र की कवितायेँ मानसी। मानोशी मासूम पेंडुकी मासूम लड़की मिशन ग्रीन वार मुंशी जी मुद्दा मुन्नी मोबाइल मूल्यांकन मेरा दोस्त मेरा नाम है मेराज आलम मेरी अम्मा। मेरी कविता मेरी रचनाएँ मेरे मन में मोइन और राक्षस मोनिका अग्रवाल मौत के चंगुल में मौत। मौसम यात्रा यादें झीनी झीनी रे युवा युवा स्वर रंग बिरंगी दुनिया रंगबाज रंगबाजी करते राजीव जी रस्म मे दफन इंसानियत राजीव मिश्र राजेश्वर मधुकर राजेश्वर मधुकर। राधू मिश्र रामकली रामकिशोर रिपोर्ट रिमझिम पड़ी फ़ुहार रूचि रोचिका शर्मा लखनऊ लगन लघुकथा लघुकथा। लड़कियां लड़कियां। लड़की लालटेन चौका। लिट्रेसी हाउस लू लू की सनक लेख लेख। लेखसमय की आवश्यकता लोक चेतना और टूटते सपनों की कवितायें लोक संस्कृति लोकार्पण लौटना वनभोज वनवास या़त्रा प्रकरण वरदान वर्कशाप वर्ष २००९ वह दालमोट की चोरी और बेंत की पिटाई वह सांवली लड़की वाल्मीकि आश्रम प्रकरण विकास विचार विमर्श। विज्ञानं बाल कविताएँ विश्व पुतुल दिवस विश्व फोटोग्राफी दिवस विश्व फोटोग्राफी दिवस. विश्व रंगमंच दिवस व्यंग्य व्यक्तित्व व्यन्ग्य शक्ति बाण प्रकरण शब्दों की शरारत शाम शायद चाँद से मिली है शिक्षक शिक्षक दिवस शिक्षक। शिक्षा शिक्षालय शैलजा पाठक। शैलेन्द्र श्र प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव स्मृति साहित्य प्रतियोगिता श्रद्धांजलि श्रीमती सरोजनी देवी संजा पर्व–मालवा संस्कृति का अनोखा त्योहार संदेश संध्या आर्या। संवाद जारी है संसद संस्मरण संस्मरण। सड़क दुर्घटनाएं सन्ध्या आर्य सन्नाटा सपने दर सपने सफ़लता का रहस्य सबरी प्रसंग सभ्यता समय समर कैम्प समाज समीक्षा समीक्षा। समीर गांगुली समीर लाल। सर्दियाँ सांता क्लाज़ साक्षरता निकेतन साधना। सामायिक सारी रात साहित्य अमृत सीता का त्याग.राजेश्वर मधुकर। सुनीता कोमल सुरक्षा सूनापन सूरज सी हैं तेज बेटियां सोन मछरिया गहरा पानी सोशल साइट्स स्तनपान स्त्री विमर्श। स्मरण स्मृति स्वतन्त्रता। हंस रे निर्मोही हक़ हादसा हादसा-2 हादसा। हाशिये पर हिन्दी का बाल साहित्य हिंदी कविता हिंदी बाल साहित्य हिन्दी ब्लाग हिन्दी ब्लाग के स्तंभ हिम्मत हिरिया हेमन्त कुमार होलीनामा हौसला accidents. 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